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KG से PG तक मुफ्त शिक्षा, क्रांति या मास्टरस्ट्रोक? ओडिशा सरकार के ऐतिहासिक फैसले से जुड़े 10 अहम सवाल और उनके जवाब

ओडिशा सरकार ने KG से PG तक मुफ्त शिक्षा देने का बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के इस ऐतिहासिक ऐलान से 10 लाख से अधिक छात्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है. FAQ से समझें इस फैसले से जुड़े हर सवाल का जवाब

KG से PG तक मुफ्त शिक्षा, क्रांति या मास्टरस्ट्रोक? ओडिशा सरकार के ऐतिहासिक फैसले से जुड़े 10 अहम सवाल और उनके जवाब
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( Image Source:  X-@ANI )

Odisha Free Education: ओडिशा सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा फैसला लेते हुए राज्य के लाखों छात्रों को बड़ी राहत देने की घोषणा की है. मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सरकार के दो वर्ष पूरे होने के मौके पर ऐलान किया कि अब राज्य में किंडरगार्टन (KG) से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) तक की शिक्षा पूरी तरह मुफ्त होगी. इस फैसले के बाद सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने वाले छात्रों को फीस नहीं देनी पड़ेगी.

मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा संभवतः देश का पहला राज्य बन गया है जिसने शिक्षा को इस स्तर तक मुफ्त और सार्वभौमिक बनाने की व्यवस्था की है. सरकार का मानना है कि इस कदम से विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों को उच्च शिक्षा हासिल करने में मदद मिलेगी. अधिकारियों के अनुसार, इस योजना का लाभ 10 लाख से अधिक छात्रों को मिलने की संभावना है.

ओडिशा में KG से PG तक मुफ्त शिक्षा: FAQs

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने घोषणा की है कि राज्य में किंडरगार्टन (KG) से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) तक की शिक्षा मुफ्त होगी.

सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को इस योजना का लाभ मिलेगा.

हां, इस फैसले के तहत सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों में फीस नहीं ली जाएगी.

मुख्यमंत्री ने कहा है कि ओडिशा संभवतः ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन सकता है.

सरकार के अनुसार आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा.

अधिकारियों के मुताबिक 10 लाख से अधिक छात्रों को इसका लाभ मिल सकता है.

हां, राज्य में पहले से ही कक्षा 10 तक की शिक्षा मुफ्त है.

कई छात्र आर्थिक कारणों से उच्च शिक्षा जारी नहीं रख पाते थे. यह योजना ऐसे छात्रों की मदद के लिए लाई गई है.

सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में फीस अपेक्षाकृत कम थी, लेकिन सरकार ने उसे पूरी तरह समाप्त करने का फैसला किया है.

अनुमान है कि इस योजना को लागू करने पर राज्य सरकार को हर साल करीब 30 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा.

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