न्यूज चैनलों की लाइव डिबेट में अब क्या बदलेगा? भड़काऊ बयान से AI के यूज तक, जानिए मंत्रालय की एडवाइजरी के बाद क्या होगा
लाइव डिबेट में भड़काऊ बयान रोकने से लेकर AI से बनी तस्वीरों और खबरों की सच्चाई का ध्यान रखने तक, मंत्रालय ने न्यूज चैनलों को कई जरूरी निर्देश दिए हैं.
लाइव डिबेट में बहस के दौरान किसी मेहमान का भड़काऊ बयान देना हो या खबर दिखाने के लिए AI से बने ग्राफिक्स और वर्चुअल एंकर का इस्तेमाल, अब न्यूज चैनलों को हर चीज का ध्यान रखना होगा. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने टीवी चैनलों के लिए एडवाइजरी जारी कर साफ किया है कि खबरों और बहस के नाम पर ऐसी बातें नहीं दिखाई जानी चाहिए, जिनसे समाज में तनाव बढ़े या देश के खिलाफ नफरत फैले.
मंत्रालय की एडवाइजरी में लाइव डिबेट के दौरान भड़काऊ बयानों को रोकने, AI का इस्तेमाल सावधानी से करने और संवेदनशील खबरों को दिखाते समय तय नियमों का पालन करने पर जोर दिया गया है. अगर बहस में कोई मेहमान गलत या भड़काऊ बात कहता है, तो चैनल उसका माइक बंद कर सकता है. वहीं, AI से बनी तस्वीरों और वर्चुअल एंकर के जरिए गलत जानकारी नहीं दिखाई जानी चाहिए.
लाइव डिबेट में भड़काऊ बयान आया तो क्या होगा?
मंत्रालय ने चैनलों से कहा है कि उनके कार्यक्रमों में ऐसी बातें नहीं होनी चाहिए, जिनसे सांप्रदायिक तनाव बढ़े या देश के खिलाफ नफरत फैले. लाइव डिबेट में किन लोगों को बुलाना है, इसका फैसला चैनलों को सोच-समझकर करना होगा. साथ ही, कार्यक्रम शुरू होने से पहले मेहमानों को संवेदनशील मुद्दों पर संभलकर बोलने के लिए भी कहना होगा. अगर बहस के दौरान कोई व्यक्ति गलत या भड़काऊ बात कहता है, तो चैनल को तुरंत उसे रोकना होगा. इसके लिए उसका माइक बंद किया जा सकता है, स्क्रीन पर चेतावनी दिखाई जा सकती है या जरूरत पड़ने पर लाइव ब्रॉडकास्ट भी रोका जा सकता है.
AI एंकर और ग्राफिक्स पर भी नजर
आजकल न्यूज चैनल खबरें दिखाने के लिए AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद ले रहे हैं. इसे देखते हुए मंत्रालय ने एडवाइजरी है कि AI का इस्तेमाल सिर्फ मदद के लिए किया जाए. इससे खबर की सच्चाई और सही जानकारी पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए. AI की मदद से बनाए गए ग्राफिक्स या वर्चुअल एंकर के जरिए दर्शकों को ऐसी जानकारी नहीं देनी चाहिए, जो गलत हो या उन्हें भ्रम में डाल दे.
अपराध और आतंकी घटनाओं की कैसी होनी चाहिए कवरेज?
मंत्रालय की तरफ से एडवाइजरी में चैनलों से कहा गया है कि वे आतंकी हमलों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों का लाइव ब्रॉडकास्ट न करें. अपराध से जुड़ी खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर न दिखाएं और हिंसा वाली तस्वीरों को बार-बार न चलाएं. यौन अपराध के पीड़ितों की पहचान भी किसी हाल में उजागर नहीं की जानी चाहिए. इसके अलावा, बाढ़, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं की खबरें दिखाते समय भी तय नियमों का पालन करना होगा.
कहां से लें भारत का नक्शा?
मंत्रालय ने कहा है कि न्यूज चैनल भारत का नक्शा दिखाने के लिए सिर्फ सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से जारी किए गए सही नक्शों का ही इस्तेमाल करें. इससे दर्शकों को गलत नक्शा दिखाने या देश की सीमाओं को लेकर भ्रम फैलने से रोका जा सकेगा.
नियम तोड़ने पर क्या होगा?
मंत्रालय ने साफ कहा है कि इन निर्देशों को नहीं मानने पर चैनलों के खिलाफ केबल टेलीविजन नेटवर्क्स एक्ट, 1995 और इससे जुड़े नियमों के तहत कार्रवाई हो सकती है. हालांकि, किस मामले में क्या कार्रवाई होगी, यह नियम तोड़ने की गंभीरता और हालात पर निर्भर करेगा. कुल मिलाकर, मंत्रालय का कहना है कि खबर दिखाने की जल्दी में उसकी सच्चाई, समाज में शांति और लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है.




