International Yoga Day: 2025 तक 12 लाख करोड़ का बाजार, 2033 तक 25 लाख का टारगेट, कैसे योग बना भारत की सॉफ्ट पावर?
International Yoga Day: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के 12 साल में योग 12 लाख करोड़ रुपये की वैश्विक अर्थव्यवस्था बन चुका है. जानिए कैसे योग ने भारत की सॉफ्ट पावर को नई ऊंचाई दी.
साल 2015 में जब पहली बार 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया था, तब शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि ऋषियों-मुनियों की तपस्थली से निकला 'योग' एक दिन अरबों डॉलर की वैश्विक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन जाएगा. कभी आश्रमों, गुरुकुलों और आध्यात्मिक साधना तक सीमित रहने वाला योग आज मोबाइल ऐप, कॉर्पोरेट बोर्डरूम, लक्जरी वेलनेस रिट्रीट और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियानों तक पहुंच चुका है. 12 वर्षों में योग ने केवल करोड़ों लोगों की जीवनशैली नहीं बदली, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान को भी नई ऊंचाई दी है. आज दुनिया का योग बाजार 127 अरब डॉलर यानी 21 जून के बाजार भाव के अनुसार (12 लाख करोड़) के आसपास पहुंच चुका है और 2033 तक इसके 269 अरब डॉलर (25 लाख करोड़ से ज्यादा) तक पहुंचने का अनुमान है.
सवाल यह है कि आखिर योग ने आध्यात्मिक अभ्यास से वैश्विक उद्योग और भारत की सबसे प्रभावशाली सॉफ्ट पावर बनने तक का यह असाधारण सफर कैसे तय किया?
एक प्रस्ताव से वैश्विक आंदोलन तक का सफर
साल 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का प्रस्ताव रखा था. शायद तब किसी ने नहीं सोचा होगा कि एक दशक के भीतर योग सिर्फ स्वास्थ्य अभ्यास नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक कूटनीति और सार्वजनिक स्वास्थ्य का बड़ा माध्यम बन जाएगा. 21 जून 2015 को पहली बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया था और 2026 में यह अपने 12वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है. इस दौरान योग ने भारत की सीमाओं को पार कर दुनिया भर में एक ऐसी पहचान बनाई है, जिसे आज भारत की सबसे सफल सॉफ्ट पावर पहलों में गिना जाता है.
127 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था कैसे बना योग?
योग की सफलता को अगर आर्थिक पैमाने पर मापा जाए तो तस्वीर बेहद दिलचस्प दिखाई देती है. ग्लोबल मार्केट रिसर्च और कंसल्टिंग कंपनी Grand View Research (grandviewresearch.com) के मुताबिक, वैश्विक योग बाजार का आकार 2025 में लगभग 127 अरब डॉलर आंका गया है. इसमें योग कक्षाएं, प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम, वेलनेस रिट्रीट, डिजिटल ऐप, कॉर्पोरेट वेलनेस सेवाएं, योग परिधान और उपकरण जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं. विभिन्न उद्योग अनुमानों के अनुसार 2033 तक यह बाजार 269 अरब डॉलर के करीब पहुंच सकता है.
यह वृद्धि केवल फिटनेस उद्योग की कहानी नहीं है. इसके पीछे स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता, मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ता ध्यान और योग को जीवनशैली के रूप में स्वीकार करने की प्रवृत्ति भी शामिल है. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस ने इस वैश्विक पहचान को लगातार मजबूत करने का काम किया है.
भारत में भी तेजी से बढ़ रहा योग उद्योग
योग की जन्मभूमि भारत में भी इसका आर्थिक प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है. 2025 में भारतीय योग बाजार का आकार लगभग 5.06 अरब डॉलर यानी करीब 42 हजार करोड़ रुपये आंका गया. अनुमान है कि अगले आठ वर्षों में यह 11 अरब डॉलर के आसपास पहुंच सकता है.
योग दिवस के वार्षिक आयोजनों ने योग को घर-घर तक पहुंचाने में मदद की है. इसका असर प्रशिक्षण संस्थानों, योग स्टूडियो, डिजिटल प्लेटफॉर्म, वेलनेस कंपनियों और आयुष क्षेत्र पर भी दिखाई दे रहा है. आज योग केवल आध्यात्मिक अभ्यास नहीं, बल्कि एक विकसित हो रहा आर्थिक क्षेत्र भी बन चुका है.
रोजगार का नया इकोसिस्टम
योग उद्योग के विस्तार ने रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं. आज हजारों लोग योग प्रशिक्षक, योग चिकित्सक, वेलनेस कोच, फिटनेस सलाहकार और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्य कर रहे हैं.
योग पर्यटन भी रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण स्रोत बनकर उभरा है. कर्नाटक के मैसूर जैसे शहर इसका उदाहरण हैं, जहां सैकड़ों योग स्कूल विदेशी छात्रों और प्रशिक्षुओं को आकर्षित करते हैं. इससे होटल, परिवहन, स्थानीय व्यवसाय और पर्यटन उद्योग को भी लाभ मिलता है. भले ही राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार का समेकित आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन योग से जुड़ा पूरा इकोसिस्टम लगातार विस्तार कर रहा है.
योग से पैदा होने वाले रोजगार अब केवल प्रशिक्षकों तक सीमित नहीं हैं. योग पर्यटन, वेलनेस रिसॉर्ट, डिजिटल कंटेंट, मोबाइल ऐप, हेल्थ टेक्नोलॉजी, कॉर्पोरेट वेलनेस प्रोग्राम और अंतरराष्ट्रीय शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों ने रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं. ऋषिकेश, हरिद्वार, मैसूर और केरल जैसे केंद्रों में योग से जुड़ी पूरी स्थानीय अर्थव्यवस्था विकसित हो चुकी है.
स्वास्थ्य जागरूकता का सबसे बड़ा अभियान
योग दिवस की सबसे बड़ी उपलब्धि शायद आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक है. पिछले एक दशक में योग को लेकर जनजागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. करोड़ों लोग योग दिवस कार्यक्रमों में हिस्सा ले चुके हैं और नियमित योग अभ्यास करने वालों की संख्या भी बढ़ी है.
तनाव, चिंता, अनिद्रा और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते दौर में योग को एक निवारक स्वास्थ्य उपाय के रूप में देखा जा रहा है. विभिन्न शोधों में योग के मानसिक स्वास्थ्य, रक्तचाप नियंत्रण, लचीलापन बढ़ाने और जीवन की गुणवत्ता सुधारने जैसे सकारात्मक प्रभाव सामने आए हैं. यही वजह है कि इस वर्ष की थीम "Yoga for Healthy Ageing" रखी गई, जो बढ़ती उम्र में स्वस्थ जीवन पर केंद्रित है.
स्कूल से सेना तक, योग की मेनस्ट्रीम में एंट्री
एक समय योग को केवल आध्यात्मिक अभ्यास माना जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है. आज स्कूलों, विश्वविद्यालयों, कॉर्पोरेट वेलनेस कार्यक्रमों, अस्पतालों, खेल संस्थानों और सुरक्षा बलों में भी योग को अपनाया जा रहा है.
कई देशों में योग को तनाव प्रबंधन, कार्यस्थल उत्पादकता और मानसिक स्वास्थ्य सुधार कार्यक्रमों का हिस्सा बनाया गया है. यह बदलाव बताता है कि योग अब सीमित सांस्कृतिक अभ्यास नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था का एक स्वीकार्य घटक बन चुका है.
भारत की सॉफ्ट पावर का सबसे मजबूत ब्रांड
योग दिवस की सबसे बड़ी रणनीतिक उपलब्धि भारत की वैश्विक छवि को मजबूत करना रही है. जिस तरह जापान की पहचान तकनीक, फ्रांस की संस्कृति और दक्षिण कोरिया की पॉप संस्कृति से जुड़ी है, उसी तरह योग भारत की वैश्विक पहचान का प्रमुख माध्यम बन गया है.
आज दुनिया के दर्जनों देशों में भारतीय दूतावास योग दिवस कार्यक्रम आयोजित करते हैं. सार्वजनिक पार्कों, ऐतिहासिक स्थलों और विश्वविद्यालय परिसरों में सामूहिक योग सत्र आयोजित होते हैं. इससे भारत की छवि एक ऐसे देश के रूप में मजबूत हुई है जो दुनिया को स्वास्थ्य, संतुलन और जीवनशैली का सकारात्मक संदेश देता है.
क्या सब कुछ सफलता की कहानी ही है?
योग दिवस की उपलब्धियों के साथ कुछ सवाल भी जुड़े हुए हैं. विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि साल में एक दिन आयोजित होने वाले बड़े कार्यक्रमों को स्थायी स्वास्थ्य परिणामों से सीधे जोड़ना आसान नहीं है. यह भी तर्क दिया जाता है कि योग के बढ़ते व्यावसायीकरण ने कई बार उसकी पारंपरिक दार्शनिक गहराई को पीछे छोड़ दिया है.
हालांकि इन आलोचनाओं के बावजूद यह तथ्य स्वीकार किया जाता है कि योग को वैश्विक चर्चा के केंद्र में लाने और लोगों को इसके प्रति जागरूक बनाने में योग दिवस की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.
12 साल बाद सबसे बड़ी उपलब्धि क्या?
अगर योग दिवस की सफलता को एक वाक्य में समेटना हो तो कहा जा सकता है कि इसने योग को आश्रमों और सीमित समुदायों से निकालकर दुनिया की मुख्यधारा तक पहुंचा दिया. आज योग एक वैश्विक स्वास्थ्य आंदोलन है, अरबों डॉलर की अर्थव्यवस्था है, लाखों लोगों के लिए रोजगार का स्रोत है और भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का सबसे प्रभावशाली माध्यम भी.
यही कारण है कि 12 साल बाद योग दिवस को केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सॉफ्ट पावर, वेलनेस डिप्लोमेसी और वैश्विक प्रभाव की सबसे सफल कहानियों में से एक माना जाता है.
आश्रम से ऐप तक: योग कैसे बना कारोबार?
योग की यह आर्थिक सफलता एक दिन में नहीं आई. 20वीं सदी की शुरुआत तक योग मुख्य रूप से आध्यात्मिक साधना और आत्म-अनुशासन का माध्यम माना जाता था. लेकिन 1920 और 1930 के दशक में तिरुमलाई कृष्णमाचार्य जैसे योगाचार्यों ने पारंपरिक योग को आधुनिक शारीरिक व्यायाम और आसनों के साथ जोड़कर आम लोगों के लिए अधिक सुलभ बनाया. इसके बाद 1940 के दशक में इंदिरा देवी जैसी हस्तियों ने योग को हॉलीवुड और पश्चिमी दुनिया तक पहुंचाया, जहां यह स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल का हिस्सा बन गया.
समय के साथ योग केवल साधना नहीं रहा, बल्कि एक संपूर्ण वेलनेस इंडस्ट्री में बदल गया. 1980 और 1990 के दशक में योग स्टूडियो, प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम, प्रीमियम योग परिधान, विशेष योग मैट और फिटनेस उत्पादों का बाजार तेजी से बढ़ा. लुलुलेमन जैसे ब्रांडों ने योग को फैशन और फिटनेस उद्योग से जोड़ दिया. भारत में बाबा रामदेव ने टेलीविजन और जनसंचार माध्यमों के जरिए योग को घर-घर तक पहुंचाया और आयुर्वेद तथा उपभोक्ता उत्पादों के साथ एक नए आर्थिक मॉडल का निर्माण किया.
डिजिटल युग ने इस विस्तार को और गति दी. आज मोबाइल ऐप, ऑनलाइन योग क्लास, वर्चुअल ट्रेनिंग, एआई आधारित फिटनेस प्लेटफॉर्म और वेलनेस सब्सक्रिप्शन सेवाएं योग अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं. कोविड महामारी के बाद ऑनलाइन योग बाजार में तेज वृद्धि हुई और योग भौगोलिक सीमाओं से निकलकर वैश्विक डिजिटल सेवा में बदल गया. यही वजह है कि आश्रमों और गुरुकुलों से शुरू हुआ योग आज 127 अरब डॉलर की वैश्विक अर्थव्यवस्था का आधार बन चुका है.




