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कभी सरहद पर मोदी, कभी अयोध्या में योगी, तो कहीं ममता की काली पूजा... आखिर क्यों चर्चा में रहती है नेताओं की दिवाली?

मोदी की जवानों संग दिवाली, योगी का अयोध्या दीपोत्सव और ममता की काली पूजा. जानिए देश के बड़े नेता कहां और कैसे मनाते हैं त्योहार और क्यों होते हैं ये आयोजन चर्चा में.

कभी सरहद पर मोदी, कभी अयोध्या में योगी, तो कहीं ममता की काली पूजा... आखिर क्यों चर्चा में रहती है नेताओं की दिवाली?
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दीपावली का त्योहार आते ही देशभर में उत्साह देखने को मिलता है. घरों में सजावट होती है, बाजार रोशनी से जगमगाते हैं और लोग परिवार के साथ खुशियां बांटते हैं. लेकिन देश के बड़े नेताओं की दीपावली सिर्फ घर और परिवार तक सीमित नहीं रहती. कोई सीमा पर तैनात जवानों के बीच पहुंचता है, कोई धार्मिक आयोजन में शामिल होता है, तो कोई पुलिसकर्मियों और आम लोगों के साथ त्योहार मनाता है. पीएम मोदी हर साल जवानों के साथ दीप ज्योति का पर्व मनाते हैं, पर कब और कहां, इस बात को मनाने से पहले वह गुप्त रखते हैं. तो क्यों न समझें राजनेताओं की दिवाली की खुशियों के राज.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दीपावली पिछले कई वर्षों से इसी वजह से चर्चा में रहती है. प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने लगातार अलग-अलग स्थानों पर सेना और सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दीपावली मनाई. कभी सियाचिन की बर्फीली चोटियों पर पहुंचे, कभी राजस्थान के रेगिस्तान में जवानों के बीच गए और कभी समुद्र में तैनात नौसेना के जवानों के साथ त्योहार मनाया. वहीं दूसरे नेताओं की दीपावली भी अपनी परंपराओं और आयोजनों के कारण सुर्खियां बटोरती रही है.

पीएम मोदी की दीपावली: सियाचिन से INS विक्रांत तक की कहानी क्या?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में सत्ता संभालने के बाद दीपावली मनाने का एक अलग तरीका अपनाया. उन्होंने लगातार 12 साल यानी 2014 से 2025 तक देश के अलग-अलग हिस्सों में तैनात सैनिकों और सुरक्षा बलों के जवानों के साथ त्योहार मनाया. इस दौरान उनकी यात्राएं केवल सीमा चौकियों तक सीमित नहीं रहीं. उन्होंने युद्ध स्मारकों, रेगिस्तानी इलाकों, पहाड़ी सीमाओं और समुद्र में तैनात नौसेना के जवानों के बीच भी दीपावली मनाई.

इन 12 वर्षों में कुछ स्थान ऐसे रहे, जहां प्रधानमंत्री का पहुंचना खास चर्चा का विषय बना.

2014 सियाचिन: प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली दीपावली सियाचिन ग्लेशियर के सैन्य अड्डे पर मनाई. यह दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्रों में से एक है.

2015 खासा और डोगराई पंजाब: 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध से जुड़े सैन्य क्षेत्र और युद्ध स्मारक पर पहुंचे. यहां सैनिकों के साथ दीपावली मनाई.

2016 सुमदो और चांगो हिमाचल प्रदेश: भारत-चीन सीमा के पास सुमदो में सेना और आईटीबीपी के जवानों से मिले. लौटते समय चांगो गांव में रुककर स्थानीय लोगों और बच्चों के साथ भी दीपावली की खुशियां बांटीं.

2017 गुरेज घाटी जम्मू-कश्मीर: नियंत्रण रेखा के पास सेना और बीएसएफ के जवानों के बीच पहुंचे. उन्होंने सैनिकों को अपना परिवार बताया.

2018 हर्षिल उत्तराखंड: सेना और आईटीबीपी के जवानों के साथ दीपावली मनाई. इसके बाद केदारनाथ भी पहुंचे.

2019 राजौरी जम्मू-कश्मीर: नियंत्रण रेखा पर तैनात सैनिकों के साथ त्योहार मनाया. अनुच्छेद 370 में बदलाव के बाद जम्मू-कश्मीर में यह उनकी पहली दीपावली थी.

2020 लोंगेवाला राजस्थान: जैसलमेर के ऐतिहासिक लोंगेवाला पोस्ट पर जवानों के साथ दीपावली मनाई. यह वही स्थान है, जहां 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय सैनिकों ने मोर्चा संभाला था.

2021 नौशेरा जम्मू-कश्मीर: अग्रिम सैन्य चौकी पर जवानों के बीच पहुंचे. यहां उन्होंने सैनिकों के साहस और बलिदान की सराहना की.

2022 कारगिल लद्दाख: कारगिल में सैनिकों के साथ दीपावली मनाई. इस मौके पर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और सेना की भूमिका पर भी बात की.

2023 लेपचा हिमाचल प्रदेश: चीन सीमा के नजदीक सेना के जवानों के साथ त्योहार मनाया. उन्होंने कहा कि जवान जहां तैनात हैं, वह स्थान उनके लिए मंदिर जैसा है.

2024 लक्की नाला सर क्रीक गुजरात: पाकिस्तान की सीमा से लगे कच्छ के सर क्रीक क्षेत्र में बीएसएफ और तीनों सेनाओं के जवानों के साथ दीपावली मनाई. यहां फ्लोटिंग सीमा चौकी पर पहुंचना भी खास रहा.

2025 आईएनएस विक्रांत अरब सागर: स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर नौसेना के जवानों के साथ दीपावली मनाई. इस दौरान तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और स्वदेशी रक्षा क्षमता का भी जिक्र किया.

2026 में बदला दीपावली मनाने का स्थान, उपराष्ट्रपति भवन पहुंचे मोदी

2026 की दीपावली इस लिहाज से अलग रही कि प्रधानमंत्री मोदी इस बार सीमा पर तैनात जवानों के बीच नहीं, बल्कि नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन पहुंचे. 7 नवंबर को उन्होंने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की और दीपावली की शुभकामनाएं दीं. इस दौरान उपराष्ट्रपति ने धार्मिक अनुष्ठान के तहत उनके माथे पर तिलक लगाया और स्मृति चिह्न भी भेंट किया.

यह मुलाकात इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि 2014 से 2025 तक लगातार 12 दीपावली जवानों के साथ मनाने के बाद इस बार उनका सार्वजनिक रूप से सामने आया प्रमुख दीपावली कार्यक्रम उपराष्ट्रपति भवन में हुआ.

योगी की अयोध्या वाली दीपावली, लाखों दीयों से जगमगाती रामनगरी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दीपावली का सबसे चर्चित आयोजन अयोध्या का दीपोत्सव होता है. 2017 में इसकी शुरुआत के बाद से रामनगरी में हर साल बड़े स्तर पर दीपोत्सव आयोजित किया जाता है. सरयू नदी के किनारे राम की पैड़ी पर लाखों दीये जलाए जाते हैं. इस आयोजन में देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं. दीपोत्सव के दौरान रामायण से जुड़े प्रसंगों की झांकियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम और लेजर शो भी आकर्षण का केंद्र रहते हैं.

योगी आदित्यनाथ की दीपावली की एक और खास बात यह है कि वे कई मौकों पर वाल्मीकि समाज, सफाईकर्मियों और वंचित बस्तियों के लोगों के बीच भी पहुंचे हैं. मिठाई बांटने और उनके साथ त्योहार मनाने की तस्वीरें चर्चा में रही हैं. इस तरह अयोध्या का धार्मिक आयोजन और समाज के अलग-अलग वर्गों के साथ त्योहार मनाना उनकी दीपावली की पहचान बन गया है.

ममता बनर्जी की घर वाली काली पूजा, 1978 से चली आ रही परंपरा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी की दीपावली और काली पूजा भी खास चर्चा में रहती है. कोलकाता के कालीघाट स्थित उनके आवास पर 1978 से काली पूजा आयोजित की जा रही है. इस पूजा में टीएमसी के नेता, मंत्री और दूसरे गणमान्य लोग शामिल होते हैं.

इस पूजा ने 2019 में खास सुर्खियां बटोरी थीं. उस समय पश्चिम बंगाल के तत्कालीन राज्यपाल जगदीप धनखड़ अपनी पत्नी के साथ ममता बनर्जी के घर काली पूजा में पहुंचे थे. खास बात यह थी कि उस समय राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच कई मुद्दों पर लगातार टकराव चल रहा था. ऐसे माहौल में राज्यपाल का मुख्यमंत्री के घर पहुंचना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया. धनखड़ ने पूजा में शामिल होने के बाद इसे अपने लिए सौभाग्य की बात बताया था.

अरविंद केजरीवाल की दिल्ली वाली दिवाली, राम मंदिर की प्रतिकृति ने खींचा ध्यान

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की दीपावली भी एक समय काफी चर्चा में रही. उनकी सरकार ने दिल्ली में सार्वजनिक रूप से दीपावली मनाने का आयोजन शुरू किया था. 2021 में त्यागराज स्टेडियम में अयोध्या के निर्माणाधीन राम मंदिर की विशाल प्रतिकृति तैयार की गई थी. इसी मंच पर केजरीवाल ने अपनी पत्नी और मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ पूजा की थी.

इस आयोजन को टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया था. उस समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले थे और आम आदमी पार्टी भी वहां चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही थी. ऐसे में अयोध्या के राम मंदिर की प्रतिकृति और दिल्ली सरकार के इस आयोजन पर राजनीतिक चर्चाएं भी हुईं.

माणिक साहा ने पुलिसकर्मियों के साथ मनाई दीपावली

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा की दीपावली भी अलग अंदाज में मनाई गई. 2025 में वे अगरतला के एडी नगर पुलिस मैदान में त्रिपुरा पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों की ओर से आयोजित काली पूजा में शामिल हुए. उन्होंने मां काली की पूजा की और पुलिसकर्मियों के साथ दीपावली का त्योहार मनाया. इस दौरान आतिशबाजी भी की गई. खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री ने त्योहार की खुशियां उन पुलिसकर्मियों के साथ बांटी, जो त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ड्यूटी पर तैनात रहते हैं.

नेताओं की दीपावली का मकसद क्या होता है?

देश के नेताओं के दीपावली मनाने के इन अलग-अलग तरीकों के पीछे धार्मिक आस्था और पारिवारिक परंपरा के साथ सार्वजनिक संदेश भी दिखाई देते हैं. हालांकि, किसी नेता का वास्तविक राजनीतिक मकसद बिना उसके बयान या प्रमाण के तय नहीं किया जा सकता.

सैनिकों के प्रति सम्मान: प्रधानमंत्री मोदी का सीमा पर जवानों के साथ दीपावली मनाना सैनिकों के योगदान और परिवार से दूर रहकर ड्यूटी करने वाले सुरक्षाकर्मियों के प्रति सम्मान का संदेश देता है.

धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा: योगी आदित्यनाथ का अयोध्या दीपोत्सव और ममता बनर्जी की काली पूजा धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों को सार्वजनिक पहचान देते हैं.

जनता और कर्मचारियों से जुड़ाव: पुलिसकर्मियों, सफाईकर्मियों और वंचित वर्गों के साथ त्योहार मनाने से नेताओं को समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच पहुंचने का अवसर मिलता है.

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान: व्हाइट हाउस में दीपावली समारोह और अमेरिकी नेताओं के शुभकामना संदेश भी हर साल चर्चा में रहते हैं. इससे भारतीय मूल के लोगों और भारतीय संस्कृति की अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी सामने आती है.

दीपावली का त्योहार नेताओं के लिए भी आम लोगों की तरह खुशियां बांटने और परंपराओं से जुड़ने का अवसर है. लेकिन ये आयोजन कई बार अपने स्थान और स्वरूप के कारण खास बन जाते हैं. प्रधानमंत्री मोदी का सियाचिन से आईएनएस विक्रांत तक का सफर, योगी आदित्यनाथ का अयोध्या दीपोत्सव, ममता बनर्जी की घर पर काली पूजा और केजरीवाल का स्टेडियम में राम मंदिर की प्रतिकृति के साथ पूजा करना इसके अलग-अलग उदाहरण हैं.

किसी ने बर्फीली चोटियों पर जवानों के साथ दीप जलाए, किसी ने समुद्र में युद्धपोत पर त्योहार मनाया और किसी ने लाखों दीयों से पूरी नगरी को रोशन किया. यही वजह है कि नेताओं की दीपावली हर साल आम लोगों के बीच भी उत्सुकता और चर्चा का विषय बन जाती है.

-सभी फोटो PIB, प्रधानमंत्री कार्यालय और सीएमओ

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