देश में कहां होती है सबसे ज्यादा बारिश, पानी के लिए तरसते हैं ये राज्य, आपदा का डर कहां ज्यादा? आंकड़ों में सब
भारत में सबसे ज्यादा और सबसे कम बारिश वाले राज्य, सूखे और बाढ़ की स्थिति, प्राकृतिक आपदा जोखिम और मानसून के असमान वितरण को आंकड़ों के साथ समझिए.
देश के कई राज्यों में मॉनसूनी बारिश का कहर जारी है. कहीं दिन रात बारिश हो रही तो कई राज्यों में गर्मी और सूखे की चपेट में हैं. इसी तरह भारत में कहीं बादल सालभर जमकर बरसते हैं तो कहीं लोग बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करते हैं. यही हालात देश में बाढ़, सूखा और प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को बढ़ाती है. जानें क्या कहते हैं आंकड़े.
भारत में सबसे अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में मेघालय का नाम सबसे ऊपर आता है. मावसिनराम और चेरापूंजी जैसे स्थान दुनिया के सबसे अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में शामिल हैं. देश के सबसे कम बारिश वाले इलाके मुख्य रूप से पश्चिमी राजस्थान, लद्दाख और गुजरात के कुछ हिस्सों में हैं. जैसलमेर, फलोदी और लेह जैसे क्षेत्रों में सालाना वर्षा बहुत कम होती है.
क्लाइमेट चेंज से बिगड़े हालात
बाढ़, सूखा, चक्रवात और भूकंप जैसी आपदाओं से हर साल जान-माल, कृषि और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचता है. अत्यधिक बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव और नदी कटाव बड़ी समस्या है, जबकि सूखे इलाकों में फसल नुकसान और पलायन देखने को मिलता है. जलवायु परिवर्तन ने इन चुनौतियों को और गंभीर बना दिया है.
आपदा प्रबंधन पहले से ज्यादा कारगर
पिछले कुछ वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारों ने आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए सरकार ने पूर्व चेतावनी प्रणाली, राहत अभियान और आपदा प्रबंधन योजनाओं पर जोर दिया है. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), मौसम विभाग (IMD) और राज्य एजेंसियां मिलकर जोखिम वाले क्षेत्रों की निगरानी करती हैं. जल संरक्षण, बेहतर निर्माण और स्थानीय तैयारी से आपदा के नुकसान को काफी कम किया जा सकता है.
कहां-कहां जारी है बारिश का कहर
मानसून के सक्रिय होने से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, असम और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भारी बारिश, बाढ़, जलभराव और भूस्खलन की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं.
देश में असमान बारिश क्यों?
भारत में वर्षा का वितरण मानसूनी हवाओं की दिशा, हिमालय की बाधा, पश्चिमी घाट, समुद्र से दूरी, ऊंचाई और स्थानीय भू-आकृति पर निर्भर करता है. इसी कारण कहीं अत्यधिक बारिश होती है, जबकि कुछ क्षेत्रों में मानसूनी बादल पर्याप्त वर्षा नहीं करा पाते.
राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में बारिश कम क्यों?
पश्चिमी राजस्थान अरावली पर्वतमाला की स्थिति, थार मरुस्थल और अरब सागर से आने वाली मानसूनी हवाओं के कमजोर पड़ने के कारण कम बारिश प्राप्त करता है. गुजरात के कच्छ और उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में भी भौगोलिक स्थिति और वर्षा-छाया प्रभाव के कारण औसत वर्षा अपेक्षाकृत कम रहती है.
भारत में बारिश का वितरण बेहद असमान है। मेघालय के मौसिनराम और चेरापूंजी में दुनिया की सबसे ज्यादा वर्षा होती है, जबकि राजस्थान, लद्दाख और कच्छ के कई इलाके पानी की भारी कमी झेलते हैं। जानिए इस मौसमीय विरोधाभास के पीछे की वैज्ञानिक वजह।




