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अपने पिछवाड़े पर आग नहीं लगवा सकता चीन, भारत से टकराने की औकात नहीं! मेजर जनरल बक्शी की जुबानी पड़ोसी की कहानी

अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के बीच जारी टकराव ने सीमा सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है. ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के बयान के बाद सवाल उठ रहे हैं कि चीन भारत के लिए कितना बड़ा खतरा है और उसका मुकाबला कैसे किया जा सकता है. मेजर जनरल जीडी बख्शी (रिटायर्ड) ने कहा कि भारत अब 1962 वाला नहीं है और चीन को जवाब देने में पूरी तरह सक्षम है.

अपने पिछवाड़े पर आग नहीं लगवा सकता चीन, भारत से टकराने की औकात नहीं! मेजर जनरल बक्शी की जुबानी पड़ोसी की कहानी
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चीन को लेकर एक बार फिर बड़ी खबर सामने आई है. इस बार भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने कहा है कि अरुणाचल प्रदेश में चीन के साथ भारत का टकराव जारी है. कई जगह टकराव हुआ और वो अभी भी जारी है. ऐसे में सवाल खड़ा हो जाता है कि आखिर चीन भारत के लिए कितना बड़ा खतरा है.

भारत कैसे उसका सामना कर सकता है और तोड़ निकाल सकता है. मेजर जनरल जीडी बख्शी (रिटायर) ने इसका बखूबी जवाब दिया है. उन्होंने साफ-साफ कहा कि चीन से डरने की जरूरत नहीं है. भारत 1962 वाला नहीं है. चीन भारत के खिलाफ अपनी पूरी ताकत नहीं लगा सकता, उसके सामने कई फ्रंट हैं. वो अपने पिछवाड़े में आग नहीं लगाना चाहेगा. भारत जवाब देने में सक्षम है.

मेजर जनरल जीडी बख्शी (रिटायर) ने कहा कि चीन आपसे कहीं ज्यादा है. उसके पास ऑलमोस्ट 3000 फाइटर जेट हैं. उसकी एयरफोर्स में 2030 तक 1000 फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट होंगे. बाकी सारी एयरफोर्स 4.5 जनरेशन की हैं. हमारे पास पुराने बहुत सारे जहाज हैं. 4.5 जनरेशन के केवल सुखाई 30 और रफाल हैं. बाकी सब पुराने है.

चीन के सामने खुले हैं कई फ्रंट

वो बिल्कुल नई एयरफोर्स बन रही है, लेकिन एक चीज हमको भी समझ जानी चाहिए. चीन तमाम अपनी शक्ति हमारे खिलाफ नहीं लगा सकता. क्यों नहीं लगा सकता? उसको डील करना है ताइवान से. उसको डील करना है साउथ चाइना सी में. इन दोनों जगह अमेरिका से डील करना है. तो उसके सारे रिसोर्सेज तो उस तरफ हैं. वियतनाम है, जापान है, साउथ कोरिया है. तो वो सारा आपके खिलाफ नहीं लगा पा रहा. उसके सामने कई सारे फ्रंट खुले हुए हैं. यह हमारा सेविंग ग्रेस है.

जीड बख्शी आगे कहते हैं कि अगर हम ये फैक्टर क्रैंक इन कर दें कि भाई वो कितना हमारे खिलाफ लगा सकता है. तिब्बत में कितना ला सकता है? तो फिर काफी सारी लिमिटेशन है. एक तो तिब्बत का पठार बहुत ऊंचा है. वहां पर जो भी जेट फाइटर टेक ऑफ करता है वो आधे कॉम्बैट लोड के साथ टेक ऑफ करता है क्योंकि हवा पतली है. हमारे फाइटर उड़ते हैं सी लेवल से फुल लोड के साथ और वहां पर बमबारी करके आ सकते हैं. तो एडवांटेज है, मतलब ज्यादा डरने की भी जरूरत नहीं है.

चीन अपने पिछवाड़े में आग नहीं लगवाना चाहता

उन्होंने कहा कि हालांकि ओवरऑल उसके नंबर और क्वालिटी दोनों में वो काफी आगे बढ़त हासिल कर गया फिर भी यह बोलना कि साहब कहते है कि नो शो है तो यह बहुत गलत होगा. यह चीन को समझ आ गया 2020 में जब उसने पंगा लिया था. उसने देखा कि टैंक फॉर टैंक, गन फॉर गन, सोल्जर फॉर सोल्जर हमने मैच कर दिया और एक्सीड कर दिया.

हमने लद्दाख में ना सिर्फ मैच किया बल्कि वो 50000 टैंक लाया तो हम 70000 ले आए. हम उससे बड़े टैंक ले आए. वो जहाज लाया हम वहां रफाल ले गए. मतलब जो कुछ भी था हमने बराबरी कर दी और उसको दिखा दिया. और अब चीन भी समझ गया. एक और चीज चीन समझ गया है कि मेरा स्ट्रेटेजिक डायरेक्शन इस तरफ किधर है? ईस्ट की तरफ. ताइवान की तरफ. साउथ चाइना सी की तरफ. जापान की तरफ. वो अपने पिछवाड़े में एक और फ्रंट पाकिस्तान को खुश करने के लिए नहीं खोलना चाहता. अपने पिछवाड़े में आग नहीं लगवाना चाहता, क्योंकि लगवाकर देख लिया. वो बोला अच्छी खासी आग लगेगी. ये वो 62 का भारत नहीं है.

मेजर जनरल जीडी बख्शी ने कहा कि तो मतलब वही है कि केवल नंबर ऑफ जहाज, नंबर ऑफ फाइटर, क्वालिटी ऑफ फाइटर देखें तो वो कहीं आगे है. उसके पास बॉम्बर्स भी हैं. लेकिन फिर भी उसके ओवरऑल समन्वय देखते हुए कि वो हमारे खिलाफ कितना लगा सकता है उसमें हम बराबरी कर रहे हैं. कहीं ज्यादा आगे निकल जाएंगे.

चीन भारत के साथ शांति चाहता है

उन्होंने कहा कि चीन का तोड़ बड़ा सीधा है, टिट फॉर टैट जैसे करोगे वैसे भरोगे. जैसे हमने गलवान में दिखाया कि आप करोगे हम भी उंगल देंगे. हम भी दे सकते हैं और देंगे. तो अब चीन को समझ आ गया है कि यार ये कोई हल्के में लेने वाला देश नहीं है. हम ये पहले कहते थे कि क्या बराबरी है हमारी. जैसे हम पाकिस्तान के लिए कहते हैं. बिल्कुल उनमें भी ये एरोगेंस था कि हमारी बराबरी कहां है? अब उनको समझ आ रहा है बराबरी कहां है. बराबरी इसमें है कि आप फंसे पड़े हैं तीन चार जगहों में और अपने पिछवाड़े में आग नहीं लगाना चाहते. चीन खासकर गलवान के बाद आपसे शांति चाहता है.

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