Sahil Wakode Suicide Case पर आया जातिगत एंगल, प्रोफेसर पर SC/ST Act के तहत FIR; ChatGPT से शुरू मामला पहुंचा Crime Branch तक
IIT Bombay छात्र Sahil Wakode की मौत के बाद जातिगत भेदभाव के आरोपों पर प्रोफेसर के खिलाफ SC/ST Act में FIR हुई. ChatGPT वाले परीक्षा मामले की जांच Crime Branch करेगी.
IIT Bombay के पवई कैंपस में 22 वर्षीय बीटेक छात्र साहिल रवींद्र वाकोडे की आत्महत्या के बाद मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है. छात्र की मौत के कुछ घंटे पहले परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन और ChatGPT के इस्तेमाल का मामला सामने आया था. अब इसी घटना की जांच में IIT Bombay के एक प्रोफेसर को आरोपी बनाया गया है और मुंबई पुलिस ने पूरी जांच Crime Branch को सौंप दी है.
साहिल के माता-पिता ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को संस्थागत उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा था. परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित BNS की धारा 108 और SC/ST (Prevention of Atrocities) Act की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है.
दूसरी तरफ IIT Bombay का कहना है कि परीक्षा के दौरान छात्र को मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पाया गया था और उसने कथित तौर पर प्रश्नपत्र ChatGPT पर अपलोड कर उत्तर हासिल करने की कोशिश की थी. संस्थान के मुताबिक, उस समय उसके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी और उसे समझाया गया था. अब मामला सिर्फ एक छात्र की मौत तक सीमित नहीं रह गया है. पुलिस जांच इस बात पर केंद्रित होगी कि परीक्षा के दौरान हुई घटना के बाद छात्र के साथ वास्तव में क्या हुआ और क्या परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों का कोई आपराधिक आधार है.
परीक्षा से शुरू हुआ मामला मौत के बाद पहुंचा पुलिस केस तक
मामला 18 सितंबर की घटना से जुड़ा है. साहिल वाकोडे IIT Bombay के Energy Science and Engineering विभाग में बीटेक सेकेंड ईयर के छात्र थे. पुलिस के मुताबिक, परीक्षा के दौरान उनके पास मोबाइल फोन पाए जाने की बात सामने आई थी. IIT Bombay के बयान में दावा किया गया कि छात्र ने परीक्षा का प्रश्नपत्र ChatGPT पर अपलोड करके उत्तर हासिल करने की कोशिश की थी.
इसके बाद परीक्षा से जुड़ा मामला संस्थान के स्तर पर सामने आया. लेकिन उसी शाम छात्र अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए. घटना की जानकारी सामने आते ही कैंपस में छात्रों के बीच भी नाराजगी बढ़ी और मामले की जांच की मांग उठने लगी. IIT Bombay ने कहा- कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी. छात्र की मौत के बाद IIT Bombay ने अपने बयान में परीक्षा में हुई घटना का जिक्र किया.
संस्थान के मुताबिक, छात्र को परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पाया गया था. इंस्ट्रक्टर और विभागाध्यक्ष ने छात्र से इस बारे में बातचीत की और उसे समझाया गया था. IIT Bombay का कहना है कि छात्र को यह भरोसा भी दिलाया गया था कि उस घटना का उसके अकादमिक करियर पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा. यानी संस्थान का पक्ष यह है कि परीक्षा के दौरान मोबाइल इस्तेमाल का मामला सामने आने के बावजूद छात्र के खिलाफ तत्काल कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं हुई थी.
फिर परिवार ने लगाए गंभीर आरोप
मामला तब और गंभीर हो गया जब छात्र के माता-पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. परिवार ने आरोप लगाया कि साहिल को संस्थागत उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा था. परिवार का कहना है कि इन्हीं परिस्थितियों ने छात्र पर गंभीर दबाव डाला. इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है. पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया है और अब जांच में यह तय किया जाना है कि लगाए गए आरोपों के पीछे क्या तथ्य हैं. यही वजह है कि अब Crime Branch की जांच इस पूरे मामले में अहम मानी जा रही है.
प्रोफेसर आरोपी क्यों बनाए गए?
मुंबई पुलिस के मुताबिक, परिवार की शिकायत के आधार पर दर्ज केस में IIT Bombay के एक प्रोफेसर को आरोपी बनाया गया है. मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित BNS की धारा 108 के साथ SC/ST Act की संबंधित धाराएं लगाई गई हैं. हालांकि, किसी व्यक्ति का आरोपी बनाया जाना अपने आप में उसके खिलाफ आरोप साबित होना नहीं है. पुलिस की जांच में यह तय होगा कि कथित घटनाओं और छात्र की मौत के बीच कोई आपराधिक संबंध था या नहीं. फिलहाल मामले में किसी गिरफ्तारी की जानकारी सामने नहीं आई है.
अब Crime Branch खंगालेगी पूरा मामला
मुंबई City Police ने जांच Crime Branch को ट्रांसफर कर दी है. अधिकारियों के मुताबिक, Crime Branch इस मामले में संबंधित प्रोफेसर और अन्य लोगों से पूछताछ कर सकती है. जांच Assistant Commissioner of Police (Detection) के नेतृत्व में की जाएगी. जांच में परीक्षा के दौरान हुई घटना, छात्र और शिक्षकों के बीच हुई बातचीत, परिवार की शिकायत और कैंपस में सामने आए अन्य तथ्यों को देखा जा सकता है.
साहिल की मौत के बाद IIT Bombay कैंपस में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन भी किया. प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई. कुछ छात्रों की ओर से यह भी दावा किया गया कि साहिल पर अकादमिक दबाव था और उसे निलंबन जैसे परिणामों की आशंका थी. हालांकि इन दावों की भी पुलिस जांच से पुष्टि होना बाकी है. मामले ने एक बार फिर बड़े संस्थानों में छात्रों पर पड़ने वाले अकादमिक और मानसिक दबाव को लेकर बहस छेड़ दी है.
मामला जातिगत भेदभाव तक कैसे पहुंचा?
परिवार की शिकायत में जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया गया है. इसी आधार पर SC/ST Act की संबंधित धाराएं भी FIR में शामिल की गई हैं. लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी अंतर समझना जरूरी है. FIR में किसी कानून की धाराएं शामिल होना यह साबित नहीं करता कि आरोप अदालत में सिद्ध हो चुके हैं. अब जांच एजेंसी को यह पता लगाना होगा कि क्या कथित जातिगत भेदभाव से जुड़े आरोपों के समर्थन में पर्याप्त तथ्य और सबूत मौजूद हैं.
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