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कार का एसी चलाने से माइलेज पर क्‍या होता है असर? ग्राहकों को मूर्ख नहीं बना सकेंगी ऑटो कंपनियां- नए नियमों से क्‍या बदल जाएगा?

कार का एयर कंडीशनर (AC) सीधे इंजन से पावर लेता है, जिससे ईंधन की खपत बढ़ती है और माइलेज में 10–20% तक की गिरावट आ सकती है- खासकर छोटे इंजन और ट्रैफिक वाली ड्राइविंग में. अब तक ARAI माइलेज टेस्ट बिना AC के होते थे, जिससे कंपनियों के दावे और असली सड़क के आंकड़ों में बड़ा फर्क रहता था. इस “माइलेज गैप” को खत्म करने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया है कि 1 अक्टूबर 2026 से सभी M1 कैटेगरी की पैसेंजर कारों का माइलेज टेस्ट AC ऑन करके किया जाएगा (AIS-213 मानक).

कार का एसी चलाने से माइलेज पर क्‍या होता है असर? ग्राहकों को मूर्ख नहीं बना सकेंगी ऑटो कंपनियां- नए नियमों से क्‍या बदल जाएगा?
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( Image Source:  Sora AI )
संजीव चौहान
Edited By: संजीव चौहान

Published on: 20 Jan 2026 3:53 PM

क्‍या कार में एसी चलाने से माइलेज पर असर पड़ता है? अगर आप भी गाड़ी चलाते हैं या गाड़‍ियों का शौक रखते हैं ता आपके मन भी ये सवाल कभी न कभी जरूर उठा होगा या आपने भी गाड़ी चलाते वक्‍त खुद इसे महसूस किया होगा. इसका जवाब है हां, लेकिन कितना - यह कई बातों पर निर्भर करता है. कार का एयर कंडीशनर एक कंप्रेसर के जरिए चलता है, जिसे इंजन से पावर मिलती है. जब AC ऑन होता है, तो इंजन को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है, जिससे ईंधन की खपत बढ़ जाती है और माइलेज घटता है.

लेकिन जब बात नई कार खरीदने की होती है तो ग्राहक तमाम चीजों में से एक यह भी देखते हैं कि कितना देती है, यानी गाड़ी की माइलेज क्‍या है. वर्तमान में कार कंपनियां एक तय कंडिशन में ARAI यानी The Automotive Research Association of India के नियमों के तहत टेस्‍ट कर कारों की माइलेज तय करती हैं और वो भी बिना एसी चलाए, फिर वही माइलेज ग्राहकों को बताई जाती है. लेकिन असल जिंदगी में भारत जैसे देश में बिना एसी गाड़ी चलाना लगभग नामुमकिन है. यही वजह है कि कार खरीदने के कुछ महीनों बाद ग्राहक महसूस करता है कि माइलेज उम्मीद से कहीं कम है.

लेकिन अब सरकार ये पूरा सिस्‍टम बदलने जा रही है. अब सरकार इसी ‘माइलेज गैप’ को खत्म करने की तैयारी में हैः रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री ने ऐसे नियमों का प्रस्ताव दिया है, जो ऑटो कंपनियों को ग्राहकों के सामने पूरी सच्चाई रखने पर मजबूर कर देंगे.

एसी चलाने से माइलेज पर क्या असर पड़ता है?

तकनीकी तौर पर कार का एसी इंजन से पावर लेता हैः जैसे ही एसी ऑन होता है, कंप्रेसर चलने लगता है और इंजन पर अतिरिक्त लोड पड़ता है. इसका सीधा असर पड़ता है फ्यूल कंजम्प्शन पर. आमतौर पर एसी ऑन रहने पर माइलेज में 10-20% तक की गिरावट आ सकती है. छोटे इंजन (4-सिलेंडर) वाली कारों में असर ज्यादा दिखता है. ट्रैफिक और स्टॉप-गो ड्राइविंग में माइलेज और गिर जाता है. यानी जो कार कंपनी 22 km/l का दावा करती है, वह असल में एसी ऑन होने पर 17–18 km/l तक ही सीमित रह जाती है. यही फर्क ग्राहकों को सबसे ज्यादा खलता है.

सरकार क्या नया करने जा रही है?

इस समस्या को देखते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) ने बड़ा कदम उठाने का प्रस्ताव दिया है. ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक 1 अक्टूबर 2026 से भारत में बिकने वाली सभी M1 कैटेगरी की पैसेंजर कारों (हैचबैक, सेडान, SUV, MPV) का माइलेज टेस्ट एसी ऑन करके किया जाएगा. यह टेस्ट AIS-213 स्टैंडर्ड के तहत होगा. कंपनियों को AC-on और AC-off दोनों माइलेज आंकड़े बताने होंगे. अभी तक अधिकतर ARAI माइलेज टेस्ट बिना एसी के होते हैं, जिससे आंकड़े ज्यादा अच्छे दिखते हैं लेकिन असली सड़क पर उतरते ही फेल हो जाते हैं.

ग्राहकों को क्या फायदा होगा?

नए नियम लागू होने के बाद ग्राहक को पहले से पता होगा कि असल ड्राइविंग में माइलेज कितना मिलेगा. “शोरूम बनाम सड़क” का फर्क कम होगा और खरीद से पहले स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी मिलेगी. लॉन्ग टर्म में ईंधन खर्च का बेहतर अंदाज़ा लगाया जा सकेगा. सरल शब्दों में कहें तो अब ऑटो कंपनियां सिर्फ अच्छे नंबर दिखाकर ग्राहकों को मूर्ख नहीं बना पाएंगी.

सेफ्टी में भी आएगा बड़ा बदलाव

सिर्फ माइलेज ही नहीं, सरकार सेफ्टी फ्रंट पर भी सख्ती बढ़ाने जा रही है. 1 अक्टूबर 2027 से Bharat NCAP 2 लाने की तैयारी है. अब गाड़ियों की सेफ्टी रेटिंग इन 5 पैमानों पर होगी:

  • क्रैश प्रोटेक्शन
  • पैदल यात्रियों की सुरक्षा
  • सेफ ड्राइविंग फीचर्स
  • क्रैश अवॉयडेंस सिस्टम
  • हादसे के बाद सुरक्षा

पहली बार पैदल यात्रियों और दोपहिया सवारों को भी रेटिंग में अहम जगह मिलेगी. वल्नरेबल रोड यूजर्स (VRU) को 20% वेटेज दिया जाएगा—जो यूरोपीय मानकों के करीब है.

अब सच के करीब आएगा माइलेज

भारत में कार सिर्फ एक लग्ज़री नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की जरूरत है. ऐसे में माइलेज का सच जानना हर ग्राहक का हक है. AC-on माइलेज टेस्टिंग का प्रस्ताव न सिर्फ ग्राहकों के भरोसे को मजबूत करेगा, बल्कि ऑटो कंपनियों को भी मजबूर करेगा कि वे वास्तविक दुनिया के हिसाब से कारें ट्यून करें. अगर यह नियम लागू होता है, तो यह भारतीय ऑटो सेक्टर में उतना ही बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, जितना 6 एयरबैग्स को अनिवार्य करना. अब सवाल सिर्फ यही है - क्या कंपनियां इस पारदर्शिता के लिए तैयार हैं?

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