इंस्टाग्राम से संसद तक पहुंची Gen Z की भाषा, MPs बोलने लगे MIA- Delulu और Kuchu Puchu जैसे शब्द; क्या हैं इनके मतलब?
संसद के मानसून सत्र में इस बार सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि Gen Z की भाषा भी चर्चा का विषय बन गई है. सांसदों ने FOMO, MIA, Delulu, Clock It, Kuchu Puchu और Vasteguna Huiya जैसे इंटरनेट स्लैंग का इस्तेमाल कर विपक्ष और सरकार पर तंज कसा.
संसद में गूंजी Gen Z की भाषा
Gen Z Slang in Indian Parliament: भारतीय संसद हमेशा से गंभीर बहस, संवैधानिक शब्दावली और राजनीतिक भाषणों के लिए जानी जाती रही है... लेकिन मानसून सत्र में कुछ ऐसा देखने को मिला जिसने सभी का ध्यान खींच लिया. इस बार सांसदों के भाषणों में FOMO, MIA, Delulu, Clock It, Kuchu Puchu और Vasteguna Huiya जैसे इंटरनेट और सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले शब्द सुनाई दिए.
जो शब्द अब तक इंस्टाग्राम रील्स, मीम पेज, K-pop फैन कम्युनिटी और व्हाट्सएप चैट तक सीमित थे, वे अब संसद की कार्यवाही का हिस्सा बन चुके हैं. यह सिर्फ मजाकिया अंदाज नहीं था, बल्कि बदलते दौर में राजनीति और युवाओं के बीच संवाद के नए तरीके की झलक भी थी.
जितेंद्र सिंह बोले- MIA और FOMO
लोकसभा में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि शुरुआत में विपक्ष इस आंदोलन से दूरी बनाए हुए था क्योंकि उसे यह एक दूसरे राजनीतिक दल का आंदोलन लग रहा था... लेकिन जैसे ही आंदोलन को समर्थन मिलने लगा, विपक्ष भी उसमें शामिल हो गया. इसी दौरान उन्होंने Gen Z के दो चर्चित शब्दों का इस्तेमाल किया.
जितेंद्र सिंह ने कहा कि विपक्ष के नेता पहले MIA (Missing in Action) यानी मैदान से गायब थे और बाद में FOMO (Fear of Missing Out) यानी मौका छूट जाने के डर की वजह से आंदोलन में शामिल हुए. उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए मिर्जा गालिब का मशहूर शेर 'बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले, बहुत निकले मेरे अरमान, लेकिन फिर भी कम निकले' भी सुनाया, जिससे उनका भाषण सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो गया.
बांसुरी स्वराज बोलीं- Clock It
बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने केंद्र सरकार की नीतियों का बचाव करते हुए विपक्ष पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि जहां कांग्रेस ने नीतिगत खालीपन छोड़ा, वहीं मोदी सरकार ने समाधान तैयार किया. अपनी बात को युवाओं की भाषा में रखते हुए उन्होंने कहा- Clock It. यानी इस बात को पहचानिए और स्वीकार कीजिए कि सरकार ने समस्या का समाधान निकाला.
तेजस्वी सूर्या ने कहा- विपक्ष 'Delulu' है
बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने विपक्ष की आलोचना करते हुए उसे 'Delulu' बताया. Delulu इंटरनेट की भाषा में 'Delusional' यानी हकीकत से दूर या भ्रम में रहने वाले व्यक्ति के लिए इस्तेमाल किया जाता है. सूर्या ने कहा कि विपक्ष सरकार की नीतियों को लेकर वास्तविकता से कटकर राजनीति कर रहा है.
दीपेंद्र हुड्डा ने कहा- 'Kuchu Puchu' और 'Vasteguna Huiya'
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी युवाओं की भाषा अपनाते हुए सरकार पर तंज कसा. उन्होंने अपने जन्मदिन का जिक्र करते हुए कहा, "आज मेरा बर्थडे है... प्लीज Kuchu Puchu इस्तीफा दे दो ना..." इसके अलावा, उन्होंने हाल के छात्र आंदोलनों में वायरल हुए 'Vasteguna Huiya' का भी जिक्र किया और कहा कि आज की युवा पीढ़ी आंदोलन में इसी तरह के नारे इस्तेमाल कर रही है.
श्रीकांत शिंदे ने भी FOMO और MIA का इस्तेमाल किया
शिवसेना सांसद श्रिकांत एकनाथ शिंदे ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष FOMO और MIA का शिकार हो गया है. उन्होंने कहा कि विपक्ष कई अहम राजनीतिक मौकों पर सक्रिय नहीं रहा और बाद में खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए आंदोलन में शामिल हुआ.
आखिर इन वायरल शब्दों का मतलब क्या है?
- Clock It: यह शब्द अमेरिका की अफ्रीकी-अमेरिकी और LGBTQ+ Ballroom Culture से निकला है. बाद में Drag Culture और सोशल मीडिया के जरिए लोकप्रिय हुआ. इसका मतलब होता है किसी बात को पहचान लेना, सच्चाई समझ लेना या किसी गलती की ओर ध्यान दिलाना.
- Vasteguna Huiya: इसका कोई वास्तविक शब्दार्थ नहीं है. इसकी शुरुआत वायरल इंटरनेट मीम 'Can I Get A Hoya?' से हुई थी. भारतीय कंटेंट क्रिएटर्स ने इसे मजाकिया अंदाज में बदलकर 'Vasteguna Huiya' बना दिया. धीरे-धीरे यह इंस्टाग्राम रील्स, मीम पेज और छात्र आंदोलनों का हिस्सा बन गया.
- Kuchu Puchu: यह शब्द किसी एक जगह से नहीं आया. यह बच्चों से प्यार जताने वाली बोलचाल की भाषा से निकला है. पहले इसका इस्तेमाल बच्चों और करीबी लोगों के लिए किया जाता था, लेकिन सोशल मीडिया पर यह व्यंग्यात्मक अंदाज में इस्तेमाल होने लगा. अब किसी को जरूरत से ज्यादा लाड़-प्यार मिलने या मासूम दिखाने के लिए भी यह शब्द बोला जाता है.
- FOMO: FOMO का पूरा मतलब है Fear of Missing Out. यानी ऐसा डर कि कहीं कोई मौका, ट्रेंड या घटना छूट न जाए. पहले यह सोशल मीडिया और लाइफस्टाइल तक सीमित था, लेकिन अब राजनीति, निवेश और चुनावी रणनीति में भी इसका इस्तेमाल होने लगा है.
- MIA: MIA का मतलब है Missing In Action. यह शब्द पहले सेना में उन सैनिकों के लिए इस्तेमाल होता था जिनका कोई पता नहीं चलता था. अब सोशल मीडिया पर इसका अर्थ है- कोई व्यक्ति अचानक गायब हो जाना या लंबे समय तक नजर न आना.
- Delulu: Delulu, Delusional शब्द का छोटा रूप है. इसकी शुरुआत K-pop फैन कम्युनिटी से हुई थी, जहां फैंस मजाक में खुद को Delulu कहते थे. आज इसका इस्तेमाल ऐसे व्यक्ति के लिए होता है जो वास्तविकता से दूर होकर सोचता है या अव्यावहारिक उम्मीदें रखता है.
युवा भाषा संसद तक क्यों पहुंची?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह हाल के छात्र आंदोलन और सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव है. NEET पेपर लीक जैसे मुद्दों पर हुए आंदोलनों में Instagram Reels, X, YouTube Shorts, मीम्स और वायरल हैशटैग ने बड़ी भूमिका निभाई. आज की युवा पीढ़ी लंबी राजनीतिक बहसों की बजाय छोटे वीडियो, मीम्स और इंटरनेट भाषा के जरिए राजनीति को समझती और उस पर प्रतिक्रिया देती है. यही कारण है कि अब राजनीतिक दल और सांसद भी उसी भाषा में संवाद करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे युवा सबसे ज्यादा समझते हैं.
प्रधानमंत्री मोदी ने भी युवाओं से जुड़ने की दी थी सलाह
हाल के महीनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने मंत्रियों को सलाह दी थी कि वे युवाओं तक पहुंचने के लिए Instagram Reels, छोटे वीडियो और इंटरैक्टिव कंटेंट का ज्यादा इस्तेमाल करें. इसका उद्देश्य देश के करोड़ों युवा मतदाताओं तक सीधे पहुंच बनाना है, जो अब सोशल मीडिया को सूचना का सबसे बड़ा माध्यम मानते हैं.
पहले भी बदलती रही है संसद की भाषा
संसद में लोकप्रिय भाषा का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है. आजादी के बाद के दशकों में सांसद गीता, रामचरितमानस, मिर्जा गालिब, अल्लामा इकबाल और अन्य कवियों के शेर सुनाया करते थे. इसके बाद फिल्मों के डायलॉग भी संसद में पहुंचे. राहुल गांधी ने GST को 'Gabbar Singh Tax' कहा था। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'शोले' फिल्म के संवाद का इस्तेमाल कर विपक्ष पर तंज कसा था. कई बार क्रिकेट की भाषा भी संसद में सुनाई देती रही है, जैसे सिक्स मारना, क्लीन बोल्ड होना, बैकफुट पर आना आदि. अब उसी परंपरा में Gen Z स्लैंग भी जुड़ गई है.
क्या यह सिर्फ ट्रेंड है या राजनीति का नया तरीका?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल इंटरनेट ट्रेंड नहीं, बल्कि राजनीति की बदलती शैली है. भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है. हर चुनाव में लाखों नए मतदाता जुड़ते हैं। ऐसे में राजनीतिक दल उसी भाषा में संवाद करना चाहते हैं जिसे युवा रोज सोशल मीडिया पर इस्तेमाल करते हैं.
हालांकि यह बहस जारी है कि इससे संसद अधिक सहज और युवाओं के करीब बनेगी या फिर गंभीर बहसों की जगह प्रदर्शनकारी राजनीति बढ़ेगी... लेकिन इतना तय है कि डिजिटल दौर में राजनीति की भाषा तेजी से बदल रही है और संसद भी उसी बदलाव के साथ कदम मिला रही है.




