249 किमी प्रति घंटा रफ्तार-कोच-सीट से लेकर कितने यात्रियों तक, कैसी होगी भारत की पहली बुलेट ट्रेन, क्या-क्या होगा? FAQ
भारत की पहली बुलेट ट्रेन में 557 यात्रियों के बैठने की जगह होगी और यह 249 KM प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी. इसमें वाई-फाई, मनोरंजन, आरामदायक सीटों के साथ दिव्यांग यात्रियों के लिए खास सीटें, आसान चढ़ने-उतरने की सुविधा और सुलभ टॉयलेट भी होंगे.
भारत में जल्द ही सफर का एक नया दौर शुरू होने जा रहा है. अब तक बुलेट ट्रेन की चर्चा सुनने वाले लोगों को जल्द ही इसमें बैठकर तेज रफ्तार से यात्रा करने का मौका मिल सकता है. मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए देश की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन तैयार की जा रही है. इसमें 8 कोच, 557 यात्रियों के बैठने की क्षमता, एग्जीक्यूटिव और स्टैंडर्ड क्लास के ऑप्शन मिलेंगे. ट्रेन में बड़ी खिड़कियां, सामान रखने की खास जगह, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट भी होंगे.
इस ट्रेन को जांच के दौरान 280 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक चलाने के लिए बनाया जा रहा है. हालांकि, यात्रियों को लेकर यह 249 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति से दौड़ेगी. ट्रेन की लंबाई लगभग 202 मीटर होगी. इसकी तेज रफ्तार के चलते यात्रियों का सफर आम ट्रेनों के मुकाबले काफी कम समय में पूरा हो सकेगा.
इस ट्रेन में कुल 8 कोच होंगे और इनमें 557 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होगी. इसमें चार मोटर कार और चार ट्रेलर कार शामिल होंगी. ट्रेन में दिव्यांग यात्रियों और कम चलने-फिरने की क्षमता वाले लोगों के लिए भी दो सीटें तय की गई हैं.
यात्रियों की सुविधा के लिए ट्रेन में दो तरह की क्लास होंगी. इसमें 7 कोच सामान्य श्रेणी के होंगे, जहां एक कतार में तीन और दूसरी में दो सीटों की व्यवस्था यानी 3×2 बैठने का तरीका होगा. वहीं, एक कोच एग्जीक्यूटिव क्लास का होगा, जिसमें 2×2 सीटें लगाई जाएंगी. इसमें यात्रियों को ज्यादा आरामदायक जगह मिलेगी.
लंबे सफर के दौरान मोबाइल या लैपटॉप की बैटरी खत्म होने की चिंता नहीं रहेगी. ट्रेन में यात्रियों के लिए अलग-अलग पावर सॉकेट दिए जाएंगे.
इसके अलावा वाई-फाई आधारित मनोरंजन सुविधा भी होगी. इसकी मदद से यात्री पहले से मौजूद मनोरंजन सामग्री देख और सुन सकेंगे.
ट्रेन में यात्रियों को सफर से जुड़ी जानकारी देने के लिए LCD स्क्रीन लगाई जाएंगी. इन पर हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में जरूरी सूचनाएं दिखाई देंगी. इसके अलावा ऑटोमैटिक अनाउंसमेंट की सुविधा भी होगी. किसी परेशानी या आपात स्थिति में यात्री ट्रेन के कर्मचारियों से बात करने के लिए इमरजेंसी टॉक-बैक सिस्टम का इस्तेमाल कर सकेंगे.
इस ट्रेन में दिव्यांग यात्रियों की सुविधा का भी ध्यान रखा गया है. इसका फर्श प्लेटफॉर्म की ऊंचाई के बराबर रखने की योजना है, जिससे चढ़ने-उतरने में आसानी होगी. दरवाजों पर अपने आप बाहर आने वाली सीढ़ियां होंगी, ताकि ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच की दूरी कम हो सके. दिव्यांगों के अनुकूल दरवाजे और शौचालय के साथ ब्रेल लिपि वाले संकेत भी लगाए जाएंगे.




