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SIR को लेकर भारी बवाल के बीच चुनाव आयोग की बैठक, लिए 9 बड़े फैसले...ECINet से वोटर लिस्ट तक क्या-क्या बदला?

SIR को लेकर विवाद के बीच चुनाव आयोग की बैठक में 9 बड़े फैसले लिए गए. जानिए ECINet, वोटर लिस्ट, IT सिस्टम और चुनावी प्रक्रिया को लेकर क्या बदला.

SIR को लेकर भारी बवाल के बीच चुनाव आयोग की बैठक, लिए 9 बड़े फैसले...ECINet से वोटर लिस्ट तक क्या-क्या बदला?
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समी सिद्दीकी
Edited By:समी सिद्दीकी7 Mins Read

Updated on: 27 Sept 2026 7:34 AM IST

इलेक्शन कमीशन (ECI) के कामकाज को लेकर उठे सवालों के बीच आयोग ने शनिवार को कई अहम फैसले लिए हैं. ये फैसले उन आपत्तियों से काफी हद तक जुड़े हुए हैं, जिन्हें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में अलग-अलग मौकों पर दर्ज कराया था.

तीन दिन पहले ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक जांच रिपोर्ट सामने आई थी, जिसके जवाब में चुनाव आयोग ने कहा था कि आयोग के दो सदस्यों ने कम से कम 14 बार ऐसे मामलों में आपत्तियां दर्ज की थीं, जो आयोग के कामकाज के मुख्य हिस्से से जुड़े थे. इनमें मतदाता के रूप में नाम दर्ज करना, नाम हटाना और फिर बहाल करना, बहाली के खिलाफ अपील और मतदाता सूची को बनाए रखने वाली तकनीकी व्यवस्था पर नियंत्रण जैसे मुद्दे शामिल थे.

हालांकि, चुनाव आयोग ने इन टिप्पणियों को ‘सुझाव’ और ‘इनपुट’ बताते हुए कहा था कि किसी भी संस्था में फैसले लेने से पहले इस तरह की चर्चा सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होती है. आयोग ने यह भी कहा था कि पिछले एक साल में लिए गए महत्वपूर्ण फैसलों को पूरे आयोग की ‘सर्वसम्मति’ से मंजूरी मिली थी. लेकिन शनिवार को आयोग की बैठक के बाद जारी चार पन्नों के नोट में कई ऐसे फैसले सामने आए, जो संधू और जोशी की दर्ज आपत्तियों में उठाए गए मुद्दों से सीधे जुड़े दिखाई देते हैं.

क्या-क्या फैसले लिए गए?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयोग ने बैठक के बाद नौ फैसलों का ऐलान किया है. इनमें आयोग की बैठकों और तकनीकी व्यवस्था से जुड़े कई बदलाव शामिल हैं.

1. अब हर आयोग बैठक से पहले एजेंडा सभी सदस्यों को भेजा जाएगा और बैठक के बाद उसका मिनट्स भी जारी किया जाएगा.

2. अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए आयोग की मंजूरी जरूरी होगी.

3. इसके अलावा नए आईटी मॉड्यूल और पोर्टल को सीधे आयोग के सामने रखने के बजाय पहले अधिकारियों की एक समिति के पास भेजा जाएगा. समिति की जांच के बाद ही इन्हें आयोग के सामने रखा जाएगा.

4. ECINet का भी रिव्यू किया जाएगा. इसके लिए एक कमेटी बनाई जाएगी, जिसकी अध्यक्षता सीनियर उप चुनाव आयुक्त करेंगे. इस समिति में IIT या IIIT के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा.

5. अगर चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मैदानी अधिकारियों को सिस्टम में ज्यादा लचीलेपन या अतिरिक्त सुविधा की जरूरत होगी, तो वह उपलब्ध कराई जाएगी.

6. आयोग ने यह भी कहा है कि आयुक्तों की ओर से अधिकारियों को दिए गए निर्देशों का ‘बारीकी से पालन’ किया जाएगा.

7. SIR नोटिस पाने वाले लोगों के घर जाकर BLO दस्तावेज जुटाएंगे और उन्हें ECINet पर अपलोड करेंगे.

8. जिन मतदाताओं के नाम छूट गए हैं, उन्हें जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा.

9. जरूरतमंद मतदाताओं के लिए हेल्प डेस्क और विशेष कैंप लगाए जाएंगे.

दो आयुक्तों ने क्या आपत्तियां दर्ज की थीं?

शनिवार के फैसलों को पिछले करीब 10 महीनों में संधू और जोशी की ओर से दर्ज की गई आपत्तियों के संदर्भ में देखा जा रहा है. दोनों आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी कि आयोग की बैठकों का एजेंडा पहले से उनके बीच साझा नहीं किया जाता था और बैठकों के मिनट्स भी जारी नहीं किए जाते थे. बता दें, मिनट्स जारी करने का मतलब है बैठक में क्या-क्या चर्चा हुई और कौन-कौन से फैसले लिए गए, उसका आधिकारिक लिखित रिकॉर्ड तैयार करके जारी करना

  • इसी तरह, अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए आयोग की मंजूरी से जुड़ा मुद्दा भी उठाया गया था. अब आयोग ने स्पष्ट किया है कि ऐसी यात्राओं के लिए उसकी अनुमति जरूरी होगी.
  • नए आईटी मॉड्यूल तैयार किए जाने को लेकर भी सवाल उठे थे. आरोप यह था कि कुछ नए आईटी मॉड्यूल आयोग की जानकारी के बिना तैयार किए गए. अब आयोग ने फैसला किया है कि नए आईटी मॉड्यूल और पोर्टल पहले अधिकारियों की समिति के सामने रखे जाएंगे.
  • मतदाता सूची के डेटाबेस को इंडीपेंडेंट एक्सपर्ट से ऑडिट कराने की जरूरत भी उठाई गई थी. अब ECINet की समीक्षा करने वाली समिति में IIT या IIIT के स्वतंत्र विशेषज्ञ को शामिल किया जाएगा.
  • मैदानी चुनाव अधिकारियों की सिस्टम तक पहुंच को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई थी. कहा गया था कि फील्ड अधिकारियों को ERONet तक ‘उचित और पूरी पहुंच’ नहीं मिल रही थी. शनिवार के फैसले में आयोग ने कहा कि जरूरत पड़ने पर उन्हें सिस्टम में अधिक लचीलापन दिया जाएगा.
  • इसके अलावा आईटी विभाग में काम के बंटवारे को लेकर जारी एक प्रशासनिक आदेश पर भी सवाल उठाए गए थे.

गोवा का मामला कैसे केंद्र में रहा?

गोवा में वोटर लिस्ट से जुड़ा एक मामला भी इस पूरे विवाद में अहम रहा. ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की जांच में सामने आया था कि स्थानीय अधिकारियों की ओर से मंजूरी दिए जाने के बावजूद 97 मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हुए थे. शनिवार को आयोग ने बताया कि इनमें से 81 लोगों ने अब Form 6 भर दिया है. आयोग ने गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को इन लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया में मदद करने का निर्देश दिया है. हालांकि, Form 6 को लेकर आयोग के फैसले को पूरी तरह समाधान नहीं माना जा सकता.

Form 6 पर क्या है विवाद?

आयोग के नोट में कहा गया है कि Registration of Electors Rules में निर्धारित Form 6 का इस्तेमाल SIR की अवधि के बाहर किया जाएगा. यह बात मूल रूप से विवेक जोशी की मई में दर्ज की गई आपत्ति से जुड़ी थी. लेकिन जोशी की आपत्ति केवल Form 6 के सामान्य प्रावधान को लेकर नहीं थी. उनकी आपत्ति ECINet पर उपलब्ध ऑनलाइन फॉर्म से जुड़ी थी.

इस ऑनलाइन फॉर्म में सेक्शन J और K के बीच आवेदक के माता-पिता से जुड़ा एक सवाल जोड़ा गया था. आवेदक के लिए उस सवाल का जवाब देना जरूरी था और जवाब दिए बिना वह फॉर्म में आगे नहीं बढ़ सकता था. शनिवार को जारी आयोग के नोट में इस ऑनलाइन फॉर्म, उसमें जोड़े गए सवाल या उस सवाल को हटाए जाने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई.

नोट में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस घोषणा को ‘बरकरार रखा’. लेकिन 27 मई को SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी आदेश में ऐसा स्पष्ट रूप से कहा गया हो, ऐसा दिखाई नहीं देता. यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि जुलाई में यह सवाल ऑनलाइन फॉर्म में किसने जोड़ा और इसे क्यों जारी रखा गया, जबकि संधू ने 13 अगस्त को इसे ‘अनधिकृत/अवैध’ बताया था.

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