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जब पेपर लीक के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे धर्मेंद्र प्रधान, बुरी तरह हुई थी पिटाई; कितना जानते हैं आप 1997 की कहानी?

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ आज लाखों बच्चे सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं और उनका इस्तीफा मांग रहे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं साल 1997 में खुद धर्मेद्र प्रधान पेपर लीक को लेकर सड़कों पर उतरे थे.

Dharmendra Pradhan.
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Dharmendra Pradhan.

( Image Source:  ANI )

नीट पेपर लीक मामले को लेकर पिछले काफी दिनों से दिल्ली में छात्र प्रोटेस्ट कर रहे हैं. कॉकरोच जनता पार्टी के साथ मिलकर छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े हैं. लेकिन बहुत कम लोग या प्रोटेस्ट में शामिल बच्चे नहीं जानते होंगे कि जिस धर्मेंद्र प्रधान का आज वे इस्तीफा मांग रहे हैं वे करीब 3 दशक पहले पेपर लीक मामले को लेकर सड़कों पर उतरे थे. जब धर्मेंद्र प्रधान छात्र नेता थे तो उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था.

लेकिन आज केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में उन्हीं पर परीक्षा प्रणाली को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है. दिलचस्प बात यह है कि जिस मुद्दे ने कभी धर्मेंद्र प्रधान को छात्र राजनीति में पहचान दिलाई थी, वही विषय अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में है. विपक्ष उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि वह संसद में इस पूरे मामले पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है.

प्रधान ने कब किया था आंदोलन?

साल 1997 में जब जानकी बल्लभ पटनायक कांग्रेस शासित ओडिशा के मुख्यमंत्री थे, तब भुवनेश्वर स्थित राज्य सचिवालय के बाहर लगभग 1,500 छात्रों ने पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन किया था. यह प्रदर्शन मुख्यमंत्री के निजी आवास से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर आयोजित किया गया था. उस समय धर्मेंद्र प्रधान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के राष्ट्रीय सचिव थे और छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे. बाद में यही आंदोलन उनके राजनीतिक सफर का एक महत्वपूर्ण अध्याय माना गया.

कैसा रहा छात्र जीवन से राजनीति तक का सफर?

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की 2021 की एक रिपोर्ट के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान ने मात्र 18 साल की उम्र में छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी थी. वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध छात्र संगठन एबीवीपी के सक्रिय आयोजक के रूप में उभरे. उन्होंने उत्कल विश्वविद्यालय से मानवविज्ञान (एंथ्रोपोलॉजी) की पढ़ाई की और नवंबर 1994 से 1997 के बीच दो बार एबीवीपी के राष्ट्रीय सचिव का दायित्व निभाया. इसी दौरान वे औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़ने की तैयारी भी कर रहे थे.

जब बुरी तरह पिटे थे प्रधान

रिपोर्ट के अनुसार, 1997 में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान करीब 1,500 छात्र सचिवालय के सामने एकत्र हुए थे. धर्मेंद्र प्रधान के करीबी सहयोगी और वर्तमान में भुवनेश्वर के आरएमडी डिग्री कॉलेज के प्रिंसिपल प्रशांत राउत ने उस घटना को याद करते हुए बताया कि शुरुआत में प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था. राउत ने कहा "हमने सचिवालय के सामने ओडिशा सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. लगभग 1,500 छात्र वहां हमारे साथ शामिल हुए."

उन्होंने बताया कि बाद में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की. प्रशांत राउत के अनुसार, पुलिस कार्रवाई के दौरान धर्मेंद्र प्रधान गंभीर रूप से घायल हो गए थे. उन्होंने कहा "हम काफी डरे हुए थे. उस समय प्रधान की बुरी तरह पिटाई हुई थी. उसे कुछ फ्रैक्चर भी हुए थे."

क्यों चर्चा में आया 1997 का आंदोलन?

साल 1997 का यह छात्र आंदोलन एक बार फिर चर्चा में है क्योंकि वर्तमान में NEET-UG परीक्षा के पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर देशभर में विवाद जारी है. जगह-जगह इसको लेकर प्रदर्शन होते दिख रहे हैं. 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज भी किया था. रिपोर्टों के अनुसार, इस कार्रवाई में कम से कम 100 प्रदर्शनकारियों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.

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