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ये हैं रिहाई के वे पांच वादे जो जेल से छूटने के लिए दे आए CJP के सौरभ और आशुतोष, कोर्ट के आदेश में क्या-क्या? VIDEO

CJP के सौरभ दास और आशुतोष रंका 7 दिन बाद तिहाड़ जेल से बाहर आए. जानिए जंतर-मंतर प्रदर्शन, 50 हजार रुपये के बॉन्ड और रिहाई की 5 शर्तें.

CJP Leaders Allege Police High-Handedness After 24-Hour Detention, Raise Questions Over Phones and Legal Access
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CJP के नेता सौरभ दास और आशुतोष रंका सात दिन न्यायिक हिरासत में रहने के बाद बुधवार को तिहाड़ जेल से बाहर आ गए. दिल्ली की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत ने दोनों की रिहाई का आदेश दिया. जिसके बाद उन्होंने जरूरी बॉन्ड और जमानती दस्तावेज जमा किए. दोनों नेताओं को शांति बनाए रखने और आगे विरोध-प्रदर्शन से जुड़े नियमों का पालन करने की शर्तों पर राहत मिली है.

जेल से बाहर आने के बाद सौरभ दास ने कहा कि 'सत्य की जीत हुई है', जबकि आशुतोष रंका ने 'इंकलाब जिंदाबाद' का नारा लगाया. अब सवाल है कि दोनों को किन शर्तों पर रिहाई मिली है और आगे उनका क्या रुख रहेगा? क्या 7 दिन जेल में रहने के बाद अब ये जंतर मंतर नहीं जाएगा या फिर कुछ और प्लान होगा?

किन-किन शर्तों पर मिली सौरभ दास और आशुतोष रंका को रिहाई?

1. 50-50 हजार रुपये के बॉन्ड भरने होंगे

सौरभ दास और आशुतोष रंका को 50-50 हजार रुपये के निजी बॉन्ड और इतनी ही राशि के जमानती बॉन्ड जमा करने का निर्देश दिया गया है. ये बॉन्ड मामले की जांच पूरी होने तक लागू रहेंगे.

2. जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बुलाने से रहना होगा दूर

दोनों नेताओं ने लिखित आश्वासन दिया है कि जब तक जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल के रूप में बहाल नहीं किया जाता, तब तक वे वहां किसी प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे.

3. संविधान के दायरे में करना होगा विरोध

दोनों ने भरोसा दिलाया है कि वे भविष्य में जो भी प्रदर्शन आयोजित करेंगे, वह संविधान के दायरे में होगा. यानी विरोध के दौरान लागू कानूनी प्रतिबंधों और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करना होगा.

4. अदालत में हर सुनवाई पर होना होगा पेश

दोनों नेताओं को मामले की हर सुनवाई पर अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है. उन्हें अपने बॉन्ड और लिखित आश्वासनों की शर्तों का पालन भी करना होगा.

5. शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखनी होगी

अदालत ने शांति बनाए रखने और सार्वजनिक व्यवस्था भंग नहीं करने की शर्त पर राहत दी है. दोनों नेताओं को ऐसे किसी भी कदम से बचना होगा जो उनके बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करे.

सौरभ दास और आशुतोष रंका को क्यों हिरासत में लिया गया था?

CJP के नेताओं को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था. प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे. उनका आरोप था कि मतदाता सूची के SIR के दौरान अनियमितताएं हुईं और मतदाताओं के नाम हटाए गए. पुलिस के आरोपों के मुताबिक, सौरभ दास, आशुतोष रंका और पार्टी के अन्य सदस्यों ने जंतर-मंतर में प्रवेश संबंधी प्रतिबंधों का उल्लंघन किया और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डाली. इसके बाद दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था, जो आगे बढ़ाई गई.

हाईकोर्ट से राहत क्यों नहीं मिली?

रिहाई से पहले दोनों नेताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट में हिरासत बढ़ाने के फैसले को चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जब उनके पास कानूनी राहत पाने का दूसरा रास्ता उपलब्ध है, तो वे सीधे रिट याचिका लेकर क्यों आए हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि निषेधाज्ञा के दौरान बैरिकेड तोड़ने से दूसरे लोगों को भी नियमों का उल्लंघन करने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है. इसके बाद दोनों नेताओं ने अपनी याचिका वापस ले ली. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है. बाद में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने दोनों नेताओं के लिखित आश्वासनों और पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बॉन्ड के जरिए शांति बनाए रखने की शर्तें लागू कीं और उनकी रिहाई का आदेश दिया.

अब क्या करेंगे सौरभ दास और आशुतोष रंका?

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी दोनों की रिहाई पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने शाहरुख खान की फिल्म चक दे! इंडिया के क्लाइमैक्स का वीडियो साझा करते हुए लिखा कि सौरभ और आशुतोष उनसे भी बड़े नेता हैं और वे उनके निर्देशों का पालन करने को तैयार हैं. आगे की स्थिति: दोनों नेताओं का राजनीतिक विरोध जारी रह सकता है, लेकिन उन्हें जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बुलाने से जुड़े अपने लिखित आश्वासन और अन्य कानूनी शर्तों का ध्यान रखना होगा.

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