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जनगणना 2027: ऑनलाइन फॉर्म, 33 सवाल और 2 फेज- आसान भाषा में जानें जनगणना से जुड़ी पूरी डिटेल

Census 2027 में सरकार ने Self-Enumeration की सुविधा शुरू की है, जिससे लोग घर बैठे ऑनलाइन अपनी जानकारी भर सकेंगे. यह डिजिटल बदलाव जनगणना को तेज, पारदर्शी और ज्यादा सटीक बनाने वाला है.

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( Image Source:  AI Sora )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय9 Mins Read

Published on: 23 March 2026 12:58 PM

जनगणना 2027: भारत की जनगणना का इतिहास बहुत पुराना है लेकिन इस बार 2027 में होने वाली जनगणना में काफी बड़ा बदलाव आ रहा है. पहली बार ऐसा होगा कि लोग घर पर बैठे-बैठे, बिना किसी अधिकारी के आने का इंतजार किए खुद अपने परिवार की जानकारी ऑनलाइन भर सकेंगे. इसे स्व-गणना (Self-Enumeration) कहते हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में नई दिल्ली में इस जनगणना के लिए चार नए डिजिटल टूल्स का सॉफ्ट लॉन्च किया है. यह दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना होगी, और यह पूरी तरह डिजिटल तरीके से होगी. सरकार का कहना है कि इससे डेटा ज्यादा सही, ज्यादा पारदर्शी और धोखाधड़ी से मुक्त होगा.

जनगणना आखिर होती क्या है?

बहुत आसान शब्दों में कहें तो जनगणना मतलब पूरे देश की जनसंख्या की गिनती करना. सरकार हर 10 साल में यह काम करती है. इसमें पता लगाया जाता है कि देश में कुल कितने लोग हैं, वे कहां-कहां रहते हैं, उनका घर कैसा है, उन्हें कौन-कौन सी सुविधाएं मिल रही हैं, उनकी उम्र, शिक्षा, काम-धंधा आदि की जानकारी इकट्ठा की जाती है. भारत में पहली जनगणना 1872 में हुई थी. आजादी के बाद से यह 8वीं जनगणना होगी (कुल 16वीं). पहले की जनगणनाएं ज्यादातर कागजी होती थीं, लेकिन 2027 वाली पूरी तरह डिजिटल होगी.

पुराना तरीका कैसा था और नया तरीका क्या है?

पुराना तरीका: सरकार एक व्यक्ति को नियुक्त करती थी, जिसे जनगणना अधिकारी या एन्यूमरेटर कहते हैं. वह आपके घर आता था, आपसे सारे सवाल पूछता था और फॉर्म भरता था. नया तरीका स्व-गणना: (self calculation) अब आपको इंतजार नहीं करना पड़ेगा. आप खुद सरकारी वेबसाइट पर जाकर फॉर्म भर सकते हैं. मोबाइल नंबर से लॉगिन करेंगे, सारे सवालों के जवाब देंगे, सबमिट करेंगे. इसके बाद आपको एक खास SE ID (Self-Enumeration ID) मिलेगा, जो आपके मोबाइल पर SMS से आएगा. जब बाद में अधिकारी आपके घर आएगा, तो आप बस यही ID उसे दे देंगे. वह आपकी दी हुई जानकारी को चेक करेगा (जैसे घर में कौन-कौन है, यह देखेगा), सही पाया तो उसे आधिकारिक रूप से दर्ज कर लेगा. इससे समय बचता है, गलतियां कम होती हैं और प्रक्रिया तेज होती है.

यह स्व-गणना पोर्टल कैसे काम करता है?

यह एक वेबसाइट है, जिसे आप कंप्यूटर या मोबाइल ब्राउजर से खोल सकते हैं

लॉगिन करने के लिए अपना मोबाइल नंबर इस्तेमाल करना जरूरी है

सारे सवाल भरने के बाद सबमिट करें, तो एक यूनिक SE ID जनरेट होता है

डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहता है- एन्क्रिप्टेड तरीके से भेजा और स्टोर होता है

यह पोर्टल 16 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है: हिंदी, अंग्रेजी, बंगाली, तमिल, तेलुगु, मराठी, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, पंजाबी, ओडिया, असमिया, नेपाली, उर्दू, कोंकणी और मणिपुरी

इस पोर्टल को C-DAC (सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग) ने बनाया है

चार डिजिटल टूल्स कौन-कौन से हैं?

अमित शाह ने चार टूल्स लॉन्च किए हैं:

स्व-गणना पोर्टल : ऊपर बताया गया, जहां आम लोग खुद डेटा भरेंगे

हाउसलिस्टिंग ब्लॉक क्रिएटर : यह एक वेब मैप टूल है. इसमें उपग्रह की तस्वीरों से देखकर अधिकारी गिनती के इलाके (ब्लॉक) बनाते हैं.

HLO मोबाइल ऐप (Houselisting Operations App): जनगणना कर्मचारियों के लिए मोबाइल ऐप. यह ऑफलाइन भी काम करता है, डेटा इकट्ठा करके अपलोड कर सकते हैं. Android और iOS दोनों पर चलेगा, 16 भाषाओं में उपलब्ध.

जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (CMMS - Census Management and Monitoring System): एक बड़ा डैशबोर्ड, जहां से जिला, राज्य और केंद्र स्तर के अधिकारी रीयल-टाइम में देख सकते हैं कि जनगणना कितनी आगे बढ़ी है

इन ऐप्स को इस्तेमाल करने के लिए कर्मचारियों को पहले CMMS पर रजिस्टर होना पड़ता है.

दो प्यारे मैस्कॉट भी लॉन्च हुए

सरकार ने दो मैस्कॉट बनाए हैं- प्रगति (एक महिला जनगणना अधिकारी) और विकास (एक पुरुष जनगणना अधिकारी). इनका मकसद है कि इस थोड़ी बोरिंग लगने वाली प्रक्रिया को मजेदार और इंसानी बनाया जाए. साथ ही दिखाना कि जनगणना में महिलाएं और पुरुष दोनों बराबर भूमिका निभाते हैं.

दो चरणों में जनगणना और 33 सवाल

जनगणना 2027 के पहले चरण में (जिसे घर सूचीकरण और आवास जनगणना कहते हैं) अधिकारी आपके घर आकर कुछ बुनियादी लेकिन महत्वपूर्ण जानकारी मांगेंगे. कुल 33 सवाल पूछे जाते हैं, लेकिन इन्हें आसान ग्रुप में समझते हैं. यह चरण अप्रैल 2026 से सितंबर 2026 तक चलेगा. हर राज्य अपने हिसाब से 30 दिनों का समय लेगा और अच्छी बात: घर-घर सर्वे शुरू होने से ठीक 15 दिन पहले आप खुद ऑनलाइन स्व-गणना (self-enumeration) कर सकते हैं. मतलब आप मोबाइल या कंप्यूटर पर जाकर ये सारी जानकारी खुद भर देंगे, फिर जब अधिकारी आएगा तो बस वेरिफाई कर लेगा.

अधिकारी मुख्य रूप से क्या-क्या पूछेंगे?

  • घर की बेसिक जानकारी घर का नंबर (म्युनिसिपल या जनगणना वाला)
  • घर किस चीज से बना है? जैसे: फर्श (टाइल्स, सीमेंट, मिट्टी, कंक्रीट आदि)
  • दीवार (ईंट, पत्थर, मिट्टी, लकड़ी आदि)
  • छत (कंक्रीट, टिन, खपरैल, टाइल्स आदि)
  • घर में इस्तेमाल क्या हो रहा है? (रहने के लिए, दुकान, गोदाम आदि)
  • घर की हालत कैसी है? (पक्का, अच्छी, खराब, टूट-फूट वाली आदि)
  • परिवार की जानकारी घर में कुल कितने लोग सामान्य रूप से रहते हैं?
  • परिवार के मुखिया (हेड) का नाम
  • मुखिया का लिंग (पुरुष, महिला, या ट्रांसजेंडर – अब तीन ऑप्शन हैं)
  • क्या मुखिया SC/ST/अन्य कैटेगरी से है?
  • घर कितने कमरों वाला है? (केवल रहने वाले कमरे)
  • घर में कितने वैवाहिक जोड़े (पति-पत्नी) रहते हैं?
  • घर का मालिकाना हक घर आपका खुद का है, किराए का है, या सरकार/किसी और का?
  • बुनियादी सुविधाएं (Amenities) पीने का पानी मुख्य रूप से कहां से आता है? (नल, हैंडपंप, टैंकर, कुआं आदि)
  • पानी हमेशा उपलब्ध रहता है या नहीं?
  • रोशनी का मुख्य स्रोत क्या है? (बिजली, केरोसिन, सोलर, मोमबत्ती आदि)
  • शौचालय है या नहीं? अगर है तो किस तरह का? (फ्लश, पिट, खुले में आदि)
  • गंदा पानी कहां जाता है? (नाली, सीवर, खेत में आदि)
  • नहाने की जगह है?
  • रसोईघर है? LPG/PNG कनेक्शन है?
  • खाना पकाने के लिए मुख्य ईंधन क्या है? (LPG, लकड़ी, गोबर के उपले, बिजली आदि)
  • घर में क्या-क्या सामान/गैजेट हैं?
  • रेडियो/ट्रांजिस्टर
  • टीवी
  • इंटरनेट कनेक्शन
  • लैपटॉप/कंप्यूटर
  • टेलीफोन/मोबाइल/स्मार्टफोन
  • साइकिल, स्कूटर/मोटरसाइकिल, कार/जीप/वान आदि वाहन
  • अन्य जानकारी घर में मुख्य रूप से कौन सा अनाज खाया जाता है? (चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा आदि)
  • जनगणना से जुड़ी बात के लिए आपका मोबाइल नंबर (सिर्फ इसी काम के लिए इस्तेमाल होगा)

ये सारे सवाल इसलिए पूछे जाते हैं ताकि सरकार को पता चले कि देश में घरों की हालत कैसी है, लोगों को कितनी सुविधाएं मिल रही हैं, गरीबी-समृद्धि का स्तर क्या है, और प्लानिंग (जैसे पानी, बिजली, शौचालय, इंटरनेट आदि) कैसे बेहतर की जाए.

दूसरा चरण: जनसंख्या गणना- फरवरी 2027 में. यहां हर व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी ली जाएगी- उम्र, शिक्षा, काम, जाति (पहली बार जाति की जानकारी भी) आदि.

नाम छूट जाने पर क्या करें?

जनगणना में नाम छूट जाने पर घबराएं नहीं. अपने क्षेत्र के सुपरवाइजर (Supervisor), चार्ज ऑफिसर (Tehsildar/Ward Officer), या जिला मजिस्ट्रेट/कलेक्टर के कार्यालय में संपर्क कर अपना नाम और घर का विवरण दर्ज करवाएं. आप rgoffice.rgi@nic.in पर ईमेल भेजकर या जनगणना हेल्पलाइन के माध्यम से भी सूचित कर सकते हैं

बजट और कब तक पूरी जनगणना

कुछ बर्फीले इलाकों (जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड) में सितंबर 2026 में ही काम पूरा हो जाएगा. पूरे देश की संदर्भ तिथि: 1 मार्च 2027 की आधी रात. बर्फीले इलाकों के लिए: 1 अक्टूबर 2026. कुल 30 लाख से ज्यादा लोग इस काम में लगेंगे. सरकार ने इसके लिए लगभग 11,718 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है. यह बदलाव बहुत बड़ा है. पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था कि लोग खुद ऑनलाइन डेटा भर सकें. इससे जनगणना तेज, सस्ती, सटीक और ज्यादा लोगों तक पहुंचने वाली बनेगी.

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