BJP की 3 बूस्टर डोज, ममता के गढ़ में BJP की ऐसी सेंधमारी, 75 में से झपट लीं 65 सीटें
जंगलमहल, हुगली और नादिया में TMC के गढ़ में BJP ने कैसे सेंध लगाई, कौन किस सीट से जीता और किन कारणों से बदला चुनावी समीकरण, जानिए पूरा विश्लेषण.
पश्चिम बंगाल की राजनीति में जंगमहल, हुगली और नादिया लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अभेद्य किले माने जाते रहे हैं. आदिवासी बहुल जंगलमहल, औद्योगिक-ग्रामीण मिश्रण वाला हुगली और मुस्लिम बहुल नादिया में ममता बनर्जी की पकड़ मजबूत थी. लेकिन हाल के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन इलाकों में अप्रत्याशित तरीके से सेंध लगाई है. इस बार कई सीटों पर TMC को कड़ी चुनौती मिली है. जबकि कुछ जगहों पर सत्ता संतुलन बदलता दिखा. यह बदलाव सिर्फ चुनावी आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों में भी परिवर्तन लेकर आया. आखिर किन सीटों पर कौन जीता, TMC का गढ़ क्यों कमजोर पड़ा और BJP ने किस रणनीति से यह संभव किया. इसे समझना जरूरी है. बीजेपी जंगलमहल, हुगली और नादिया की 75 में से 66 सीटों पर जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया है.
1. जंगलमहल में कौन-कौन सी सीटों पर क्या हुआ?
Jangalmahal क्षेत्र, जिसमें पुरुलिया, बांकुरा, विष्णुपुर और झाड़ग्राम की सीटें शामिल हैं, लंबे समय तक वामपंथ और बाद में तृणमूल कांग्रेस का मजबूत आधार रहा. यहां पुरुलिया, बाघमुंडी, काशीपुर, रानीबांध, झाड़ग्राम और गोपीबल्लवपुर जैसी सीटों पर पहले TMC का दबदबा था. लेकिन हाल के चुनावों में बीजेपी ने या तो जीत दर्ज की या बेहद करीबी मुकाबला दिया. आदिवासी इलाकों में स्थानीय असंतोष, विकास की कमी और नेतृत्व से दूरी जैसे मुद्दों ने TMC की पकड़ को कमजोर किया, जिसका सीधा फायदा BJP को मिला. जंगलमहल की 40 विधानसभा सीटों में से बीजेपी 36 पर कब्जा करने में सफल हुई. जबकि टीएमसी के खाते में सिर्फ चार सीटें आईं.
2. हुगली की सीटों पर किसका पलड़ा भारी रहा?
हुगली जिले की चंदननगर, श्रीरामपुर, चूचुड़ा, धनियाखाली, तारकेश्वर और पांडुआ जैसी सीटों पर चुनावी मुकाबला दिलचस्प रहा. शहरी इलाकों में तृणमूल कांग्रेस ने अपनी पकड़ बनाए रखी, लेकिन ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बीजेपी ने वोट शेयर में चौंकानेवालाी बढ़ोतरी की. उद्योग, रोजगार और स्थानीय विकास के मुद्दों ने यहां चुनावी रुख बदला, जिससे कई सीटों पर कांटे की टक्कर देखने को मिली. हुगली की 18 सीटों में बीजेपी ने 16 पर तो टीएमसी प्रत्याशी केवल दो सीटों पर जीत दर्ज करा पाए.
3. नादिया में मुस्लिम बहुल इलाकों का क्या रुझान रहा?
नादिया जिला पारंपरिक रूप से टीएमसी का गढ़ रहा है. खासकर कृष्णानगर, रनाघाट, चकदह, शांतिपुर और करिमपुर जैसी सीटों पर. यहां मुस्लिम वोट बैंक TMC के साथ मजबूती से जुड़ा रहा. इसके बावजूद बीजेपी ने हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण और सीमावर्ती मुद्दों को उठाकर अपनी पकड़ मजबूत की. नतीजतन, 17 में से 14 सीटें बीजेपी के खाते में तो तीन सीटों पर टीएमसी प्रत्याशियों के जीत मिली.
4. TMC का गढ़ क्यों कमजोर पड़ा?
टीएमसी की पकड़ कमजोर होने के पीछे कई कारण रहे. स्थानीय स्तर पर नेताओं के खिलाफ नाराजगी, संगठन में गुटबाजी और लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण एंटी-इंकंबेंसी फैक्टर उभरकर सामने आया. इसके अलावा, कुछ क्षेत्रों में विकास कार्यों की असमानता और जमीनी कार्यकर्ताओं से दूरी ने भी TMC के पारंपरिक वोट बैंक में दरार पैदा की.
5. BJP ने सेंध कैसे लगाई?
बीजेपी ने इन गढ़ों में सेंध लगाने के लिए बहुस्तरीय रणनीति अपनाई. इसमें TMC के असंतुष्ट नेताओं को अपने साथ लाना, बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करना, आदिवासी और हिंदू वोट बैंक को साधना और केंद्र सरकार की योजनाओं का प्रचार शामिल था. इसके साथ ही पहचान और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता दी गई, जिससे पार्टी को व्यापक समर्थन मिला.
6. क्या 2021 से 2024 तक बदल गया जंगलमहल, नादिया और हुगली का चुनावी गणित?
Jangalmahal, Nadia और Hooghly जैसे इलाके कभी TMC के मजबूत गढ़ माने जाते थे, लेकिन 2021 से 2024 के बीच के चुनावी आंकड़े बताते हैं कि इन क्षेत्रों में राजनीतिक जमीन तेजी से खिसकी है और BJP ने मजबूत चुनौती खड़ी कर दी है. जंगलमहल की बात करें तो 2021 के विधानसभा चुनाव में TMC का दबदबा साफ नजर आया था. झाड़ग्राम जिले की चारों सीटें - नयाग्राम, गोपीबल्लभपुर, झाड़ग्राम और बिनपुर, TMC के खाते में गई थीं. कुल मिलाकर जंगलमहल की 40 सीटों में से 24 सीटें TMC ने जीती थीं.
अगर 2024 के लोकसभा चुनावों पर नजर डालें तो तस्वीर कुछ बदली हुई दिखाई देती है. TMC ने पांच में से तीन सीटें जीत लीं, जो 2019 के नतीजों से बिल्कुल अलग था. 2019 में BJP ने पुरुलिया, झाड़ग्राम, बांकुड़ा, बिष्णुपुर और मेदिनीपुर की सभी पांच लोकसभा सीटों पर कब्जा जमाया था.
वोट प्रतिशत के आंकड़े इस मुकाबले को और दिलचस्प बनाते हैं. 2021 में पश्चिम मेदिनीपुर में TMC को 48.87 प्रतिशत वोट मिले, जबकि BJP को 42.67 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए. झाड़ग्राम में TMC ने 53.04 प्रतिशत वोट हासिल किए, जबकि BJP को 37.15 प्रतिशत वोट मिले. वहीं पुरुलिया में मुकाबला बेहद करीबी रहा, जहां TMC को 38.65 प्रतिशत और BJP को 38.03 प्रतिशत वोट मिले. बांकुड़ा में भी अंतर ज्यादा नहीं था—TMC को 44.97 प्रतिशत और BJP को 43.27 प्रतिशत वोट मिले.
Nadia की बात करें तो 2021 के विधानसभा चुनाव में यहां की तस्वीर पूरी तरह बंटी हुई नजर आई. जिले में कुल सीटों का बंटवारा लगभग बराबरी पर रहा. BJP ने 9 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि TMC को 8 सीटें मिलीं. यानी नादिया पूरी तरह “फिफ्टी-फिफ्टी” हो गया था, जहां कोई भी पार्टी स्पष्ट बढ़त नहीं बना सकी.
वहीं Hooghly में 2021 का परिणाम TMC के पक्ष में एकतरफा रहा था. 18 विधानसभा सीटों में से 16 सीटों पर TMC ने कब्जा जमाया, जबकि BJP सिर्फ 2 सीटों तक सीमित रही. खास बात यह रही कि खानाकुल सीट पर हार-जीत का अंतर महज चार वोट का था, जो इस क्षेत्र में कड़े मुकाबले को दर्शाता है. लेकिन बाद के चुनावी रुझानों में हुगली की तस्वीर पूरी तरह उलटती नजर आई. इस बार 18 में से 16 सीटें BJP के खाते में चली गईं, जबकि TMC पीछे रह गई.
जंगलमहल, हुगली और नादिया में BJP की बढ़ती मौजूदगी यह संकेत देती है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति तेजी से बदल रही है. All India Trinamool Congress का पारंपरिक वर्चस्व अब चुनौती में है, जबकि Bharatiya Janata Party एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर रही है. आने वाले चुनावों में इन क्षेत्रों का रुझान राज्य की सत्ता की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा.
पीएम ने झालग्राम में खाई थी झामुड़ी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिन्होंने चुनावों से पहले राज्य में 14 चुनावी कार्यक्रम किए थे. जंगलमहल इलाके की आदिवासी बेल्ट में मतदाताओं को लुभाने के लिए एक ही दिन में चार रैलियां की थीं। प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें वह चुनावों से पहले अपने प्रचार के दौरान झाड़ग्राम की एक छोटी दुकान से 'झालमुड़ी' खरीदते हुए दिख रहे थे। झालमुड़ी चावल के मुरमुरे, हरी मिर्च और मसालों से बना एक मशहूर बंगाली स्ट्रीट स्नैक है। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था.




