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बंगाल का 'कुबेर' तुलु मंडल! 242 गाड़ियां, 7 मकान और 2 पेट्रोल पंप, ड्राइवर से ऐसे बना करोड़पति; 28 करोड़ कैश-15 किलो सोना बरामद

बीरभूम में कथित अवैध पत्थर खनन और उससे जुड़े कारोबार की जांच के बीच तुलु मंडल का नाम चर्चा में है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के दावों के मुताबिक, कार्रवाई में करोड़ों की नकदी, सोना, 242 वाहन और कई संपत्तियां जांच के दायरे में आई हैं.

बंगाल का कुबेर तुलु मंडल! 242 गाड़ियां, 7 मकान और 2 पेट्रोल पंप, ड्राइवर से ऐसे बना करोड़पति; 28 करोड़ कैश-15 किलो सोना बरामद
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सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी9 Mins Read

Updated on: 31 July 2026 10:40 PM IST

पश्चिम बंगाल के बीरभूम में कथित अवैध पत्थर खनन और उससे जुड़े कारोबार को लेकर जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद बड़ी मात्रा में नकदी, सोना, वाहन और संपत्तियों की जानकारी सामने आई है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि पत्थर खनन कारोबारी तुलु मंडल से जुड़ी ₹150 करोड़ से अधिक की संपत्तियां जब्त या चिन्हित की गई हैं.

मुख्यमंत्री के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान करोड़ों रुपये की नकदी और सोने के अलावा सैकड़ों वाहन, जमीन और कई व्यावसायिक संपत्तियां जांच के दायरे में आई हैं. अधिकारियों ने कुछ बैंक खातों को भी फ्रीज किया है. तुलु मंडल को बीरभूम के प्रभावशाली टीएमसी नेता अनुब्रत मंडल का करीबी बताया जाता रहा है. हालांकि, अवैध खनन और संपत्ति से जुड़े आरोपों पर अंतिम स्थिति जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी.

कौन है तुलु मंडल?

तुलु मंडल का असली नाम मोहम्मद नजीबुद्दीन बताया जाता है. वह पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में मोहम्मद बाजार थाना क्षेत्र के सोनशाल इलाके के मोरल पारा का रहने वाला बताया जाता है. स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, तुलु मंडल ने अपने करियर की शुरुआत ड्राइवर के तौर पर की थी. करीब एक दशक पहले तक वह लॉरी से पत्थर ढोने का काम करता था. इसके बाद उसने पत्थर ढुलाई के कारोबार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ानी शुरू की और धीरे-धीरे खनन तथा पत्थर व्यापार से जुड़े कारोबार में आगे बढ़ता गया.

लॉरी चलाने से पत्थर कारोबार तक कैसे पहुंचा?

तुलु मंडल की कहानी को लेकर स्थानीय सूत्रों के हवाले से बताया जाता है कि शुरुआत में वह लॉरी चलाकर पत्थर एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाता था. बाद में उसने शेयर पर एक डंपर लिया और पत्थर ढुलाई का काम बढ़ाया. इसके बाद पत्थर और बालू के कारोबार में उसकी गतिविधियां बढ़ती गईं. स्थानीय स्तर पर यह भी दावा किया जाता है कि 2014-15 के बाद उसका राजनीतिक संपर्क बढ़ना शुरू हुआ. हालांकि, उसके कारोबार के विस्तार और राजनीतिक संपर्कों के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध को जांच एजेंसियों की पुष्टि के बिना तथ्य के तौर पर नहीं कहा जा सकता.

तुलु मंडल से जुड़ी कार्रवाई में क्या-क्या मिला? 10 बड़े पॉइंट्स में जानिए

1. ₹150 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति जब्त या चिन्हित

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के मुताबिक, अब तक ₹150 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त की जा चुकी है या कार्रवाई के दायरे में लाई गई है. इसमें नकदी, सोना, वाहन, जमीन और दूसरी संपत्तियां शामिल हैं.

2. ₹28.5 करोड़ की नकदी बरामद

पुलिस की कार्रवाई में करीब ₹28.5 करोड़ कैश बरामद होने का दावा किया गया है. इसके अलावा बड़ी मात्रा में सोना भी मिला है.

3. सोना-चांदी और प्लैटिनम के आभूषण

तुलु मंडल के रिश्तेदार मिनार मंडल के परिसर से भी नकदी और कीमती धातुओं से जुड़े सामान मिलने की जानकारी दी गई है. बताए गए सामान में शामिल हैं-

  • ₹53 लाख नकद
  • 268 ग्राम सोने के आभूषण
  • 400 ग्राम चांदी
  • 23 ग्राम प्लैटिनम के आभूषण

4. ₹93 करोड़ वाले बैंक खाते फ्रीज

मुख्यमंत्री के अनुसार, तुलु मंडल से कथित तौर पर जुड़े बैंक खातों में मौजूद करीब ₹93 करोड़ की रकम फ्रीज की गई है. इस रकम को लेकर जांच जारी है.

5. 242 वाहन जांच के घेरे में

कार्रवाई में कुल 242 वाहनों का भी जिक्र किया गया है. इनमें लग्जरी कारों के साथ बड़ी संख्या में डंपर और ट्रक शामिल हैं. बताए गए आंकड़े के मुताबिक-

  • कुल वाहन: 242
  • डंपर और ट्रक: 83
  • लग्जरी वाहन भी शामिल
  • जांच एजेंसियां इन वाहनों की खरीद, स्वामित्व और कथित कारोबार से इनके संबंध की जांच कर रही हैं.

6. करीब 300 बीघा जमीन पर कार्रवाई की तैयारी

मुख्यमंत्री ने बताया कि करीब 300 बीघा जमीन में फैली 21 संपत्तियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त करने की कार्रवाई चल रही है. इन संपत्तियों में कथित तौर पर शामिल हैं:

  • 3 स्टोन क्वारी
  • 2 स्टोन क्रशर
  • 2 पेट्रोल पंप
  • 1 फार्महाउस
  • 7 मकान

7. करोड़ों के कारोबार से जुड़े दस्तावेज भी मिले

कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसियों को कई दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सामान मिलने की बात कही गई है. इनमें कथित तौर पर डिलीवरी-कम-रसीद (DCR) स्लिप, ट्रांसपोर्ट चालान और चेकबुक शामिल हैं. इसके अलावा-

3 करेंसी काउंटिंग मशीन

1 कंप्यूटर

2 पेन ड्राइव भी बरामद किए जाने का दावा किया गया है.

8. तुलु के रिश्तेदार मिनार मंडल गिरफ्तार

मुख्यमंत्री के मुताबिक, मिनार मंडल को गिरफ्तार किया गया है. इसके अलावा तुलु मंडल से जुड़े बताए जा रहे पांच अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा रही है. इनमें चीफ अकाउंटेंट पिनाकी डे, असिस्टेंट अकाउंटेंट रकीबुल इस्लाम और पेट्रोल पंप मैनेजर कौसर का नाम शामिल है.

9. विदेशों तक पैसे पहुंचने की भी जांच

मामले की जांच सिर्फ बीरभूम तक सीमित नहीं है. मुख्यमंत्री के मुताबिक CID, STF और केंद्रीय एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि कथित अवैध खनन से हासिल रकम को कहीं विदेश में भेजकर मनी लॉन्ड्रिंग तो नहीं की गई. हालांकि, इस संबंध में जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट अभी सामने आना बाकी है.

10. अवैध खनन से ₹15,000 करोड़ के राजस्व नुकसान का दावा

सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि पिछले करीब 15 वर्षों में बीरभूम में कथित अवैध पत्थर खनन और तस्करी के कारण सरकारी राजस्व को करीब ₹15,000 करोड़ का नुकसान हुआ. उन्होंने यह भी दावा किया कि पहले बीरभूम के स्टोन माइनिंग सेक्टर से सालाना करीब ₹60-80 करोड़ राजस्व आता था, जबकि नई सरकार के कार्यकाल में एक महीने में ही करीब ₹83 करोड़ राजस्व संग्रह हुआ और यह आंकड़ा अब करीब ₹100 करोड़ प्रति माह पहुंचने की ओर है.

तुलु मंडल का नाम क्यों चर्चा में है?

तुलु मंडल का नाम बीरभूम के कथित अवैध पत्थर खनन कारोबार के संदर्भ में सामने आया है. उन्हें टीएमसी के प्रभावशाली नेता अनुब्रत मंडल का करीबी बताया जाता रहा है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि इतने बड़े स्तर पर कथित अवैध खनन और संपत्ति का विस्तार संबंधित विभागों की जानकारी के बिना संभव नहीं था. उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. हालांकि, ममता बनर्जी या उनके नेतृत्व वाली पूर्व सरकार के खिलाफ लगाए गए इन राजनीतिक आरोपों को स्वतंत्र रूप से अदालत या किसी जांच एजेंसी द्वारा सिद्ध तथ्य के तौर पर नहीं माना जा सकता.

बीरभूम में पहले कितना राजस्व आता था?

मुख्यमंत्री के अनुसार, बीरभूम के स्टोन माइनिंग सेक्टर से पहले सालाना करीब ₹60 से ₹80 करोड़ का राजस्व आता था. उनका दावा है कि नई सरकार के सत्ता संभालने के बाद सिर्फ एक महीने में ₹83 करोड़ राजस्व प्राप्त हुआ और अब मासिक राजस्व करीब ₹100 करोड़ तक पहुंचने वाला है.

बंगाल सरकार के राजस्व पर भी बड़ा दावा

सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल का राजस्व 10 सप्ताह में 12 फीसदी बढ़ा है. उन्होंने मौजूदा वित्त वर्ष के अंत तक राज्य के कुल राजस्व में कम से कम 20 फीसदी वृद्धि होने का अनुमान भी जताया. यह आंकड़े मुख्यमंत्री की ओर से किए गए दावों पर आधारित हैं और इनके आधिकारिक वित्तीय आंकड़ों से मिलान किया जाना बाकी है. मुख्यमंत्री ने पूर्व बर्दवान में कथित रूप से अवैध तरीके से निकाली गई रेत की हालिया नीलामी का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक, इस नीलामी से राज्य सरकार को ₹13.5 करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ.

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