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टेबलटॉप रनवे या कोहरा, क्‍या बना अजित पवार के प्‍लेन क्रैश की वजह, भारत में और कहां हैं ऐसे खतरनाक एयरपोर्ट?

बारामती एयरपोर्ट पर हुए विमान हादसे ने अजित पवार की आखिरी उड़ान को त्रासदी में बदल दिया. कोहरे, सीमित दृश्यता और कथित टेबलटॉप रनवे ने हादसे की आशंका बढ़ा दी. एटीसी और पायलट की आखिरी बातचीत, चश्मदीदों के बयान और एयरपोर्ट की बनावट इस ओर इशारा करती है कि जोखिम पहले से मौजूद था. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि पायलट की चूक बड़ी वजह थी या बारामती जैसे संवेदनशील एयरपोर्ट पर लैंडिंग खुद जानलेवा साबित हुई.

टेबलटॉप रनवे या कोहरा, क्‍या बना अजित पवार के प्‍लेन क्रैश की वजह, भारत में और कहां हैं ऐसे खतरनाक एयरपोर्ट?
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सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी

Updated on: 28 Jan 2026 5:38 PM IST

“क्या रनवे दिख रहा है?”

कॉकपिट से जवाब मिला- “नहीं.”

ये अजित पवार के विमान के पायलट और एटीसी के बीच हुई बातचीत के अंश हैं.

सुबह करीब 8:30 बजे का वक्त था. महाराष्ट्र के बारामती एयरपोर्ट पर एक चार्टर्ड विमान आसमान में चक्कर काट रहा था. पायलट ने एटीसी से उतरने की अनुमति मांगी. जब पूछा गया कि क्‍या आपको रनवे दिख रहा है तो पायलट ने जवाब दिया नहीं.

कुछ देर बाद विमान ने फिर आसमान में गोता लगाया और दूसरी बार लैंडिंग की इजाजत मांगी. एटीसी ने दोबारा वही सवाल दोहराया -

“अब रनवे दिख रहा है?”

इस बार पायलट कुछ सेकंड रुका… फिर बोला- “हां.”

इजाजत मिल गई. लेकिन यही ‘हां’ इस उड़ान की आखिरी मंजूरी बन गई. लैंडिंग के दौरान विमान संतुलन खो बैठा और एयरपोर्ट के पास ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत कुल 5 लोगों की मौत हो गई. बारामती के ‘दादा’ की आखिरी उड़ान यहीं खत्म हो गई. एटीसी के साथ आखिरी बातचीत में भी विमान के पायलटों में से एक की आवाज में घबराहट साफ झलक रही थी. कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर में दर्ज अंतिम शब्द को-पायलट कैप्टन शांभवी पाठक के थे, जिन्‍हें “ओह शिट, ओह शिट” कहते हुए सुना गया.

अब सबसे बड़ा सवाल यही है - गलती पायलट की थी या खतरा खुद बारामती एयरपोर्ट है?

चश्मदीदों के बयान से गहराया सवाल

हादसे के बाद सामने आए बयानों ने इस सवाल को और गहरा कर दिया है. एक चश्मदीद ने बताया, “हमें पहले लगा कि ये कोई ट्रेनिंग प्लेन गिरा होगा, क्योंकि यहां अक्सर ट्रेनिंग के दौरान प्लेन गिरते रहते हैं. हमने कई बार ऐसे हादसे देखे हैं. हमें अंदाजा भी नहीं था कि ये दादा का विमान होगा.” यानी जिस जगह यह हादसा हुआ, वह पहली बार सुर्खियों में नहीं आई है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह इलाका पहले भी विमान हादसों का गवाह बन चुका है.

बारामती एयरपोर्ट: छोटा, लेकिन संवेदनशील

पुणे जिले के बारामती शहर के पास स्थित यह एयरपोर्ट भले ही बड़ा कमर्शियल एयरपोर्ट न हो, लेकिन राजनीतिक और रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है. इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से पायलट ट्रेनिंग, चार्टर्ड फ्लाइट और वीआईपी और वीवीआईपी मूवमेंट के लिए होता रहा है. इस एयरपोर्ट का निर्माण 1996 में MIDC ने कराया था और बाद में इसका संचालन महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी (MADC) को सौंपा गया. इसे मूल रूप से कम ट्रैफिक और सुरक्षित ट्रेनिंग ज़ोन के तौर पर डिजाइन किया गया था.

जहां उड़ान सीखते हैं पायलट, वहीं गिरते हैं प्लेन?

बारामती एयरपोर्ट पर दो प्रमुख फ्लाइंग ट्रेनिंग संस्थान काम करते हैं. Carver Aviation Pvt Ltd (ACAPL) और Redbird Flight Training Academy. यही वजह है कि यहां अक्सर छोटे विमान उड़ते और उतरते दिखाई देते हैं. लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि इसी ट्रेनिंग जोन में पहले भी कई बार विमान दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं.

एयरपोर्ट की बनावट भी सवालों के घेरे में

तकनीकी तौर पर बारामती एयरपोर्ट समुद्र तल से 604 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और इसके रनवे की लंबाई 1770 मीटर व चौड़ाई 30 मीटर है. इस एयरपोर्ट का कुल एरिया करीब 182 हेक्टेयर है. यह एयरपोर्ट बड़े यात्री विमानों के लिए नहीं, बल्कि हल्के और ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट के लिए तैयार किया गया था. यही वजह है कि खराब दृश्यता, सीमित रनवे और बार-बार की लैंडिंग प्रैक्टिस इसे संवेदनशील बनाती है. बारामती एयरपोर्ट के आसपास वैसे तो ज्‍यादा तर खेती की जमीनें हैं लेकिन कुछ इलाका टीलों जैसी ऊंचाई वाला भी है. न्‍यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार डीजीसीए ने कहा है कि बारामती एयरपोर्ट का रनवे भी कुछ हद तक टेबलटॉप रनवे था और इसे भी हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है. हालांकि असली वजह जांच के बाद ही सामने आएगी.

बता दें कि भारत में कई और टेबलटॉप रनवे हैं जहां पहले भी कई भीषण विमान हादसे होते रहे हैं.

क्‍या होते हैं टेबलटॉप रनवे?

टेबलटॉप रनवे (Tabletop Runway) ऐसे रनवे होते हैं जिन्हें पहाड़ी या ऊंचे पठारी इलाके को समतल कर बनाया जाता है. इनके एक या दोनों सिरों पर गहरी ढलान या खाई होती है, जिससे ये आम हवाई पट्टियों के मुकाबले कहीं ज्यादा खतरनाक माने जाते हैं. इन रनवे पर विमान के लिए रुकने की अतिरिक्त जगह लगभग नहीं होती. यानी अगर लैंडिंग के वक्त जरा-सी भी चूक हुई तो विमान रनवे से आगे निकलकर सीधे नीचे गिर सकता है. इसी वजह से यहां उतरने के लिए पायलट को बेहद सटीक एप्रोच, सही स्पीड और परफेक्ट एंगल की जरूरत होती है. साधारण रनवे जहां पायलट को गलती सुधारने का थोड़ा मौका देते हैं, वहीं टेबलटॉप रनवे गलती की गुंजाइश लगभग खत्म कर देते हैं. यही कारण है कि इन्हें विमानन जगत में सबसे जोखिमभरे रनवे की श्रेणी में रखा जाता है.

ये हैं देश के सबसे खतरनाक टेबलटॉप रनवे

प्रमुख टेबलटॉप एयरपोर्ट इस प्रकार हैं -

कोझिकोड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (केरल) : इसे कारीपुर एयरपोर्ट के नाम से भी जाना जाता है. पहाड़ी पठार पर बने इस रनवे के दोनों सिरों पर गहरी ढलान है, जिससे लैंडिंग बेहद संवेदनशील मानी जाती है.

मंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (कर्नाटक) : बाजपे एयरपोर्ट कहलाने वाला यह हवाई अड्डा भी ऊंचाई पर स्थित है और टेबलटॉप संरचना के कारण पायलटों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है.

लेंगपुई हवाई अड्डा (मिजोरम) : मिजोरम सरकार द्वारा संचालित यह एयरपोर्ट पहाड़ियों के बीच बना है और पूर्वोत्तर भारत के सबसे कठिन रनवे में गिना जाता है.

शिमला हवाई अड्डा (हिमाचल प्रदेश) : जुब्बरहट्टी एयरपोर्ट के नाम से मशहूर यह हवाई अड्डा पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है, जहां सीमित रनवे और ऊंचाई के कारण उड़ान संचालन आसान नहीं होता.

पाकयोंग हवाई अड्डा (सिक्किम) : यह देश के सबसे ऊंचाई पर बने हवाई अड्डों में शामिल है और टेबलटॉप डिजाइन की वजह से इसे इंजीनियरिंग का अनोखा उदाहरण माना जाता है.

भारत में टेबलटॉप रनवे पर हुए बड़े विमान हादसे

1. एयर इंडिया एक्सप्रेस फ्लाइट 1344 (2020) : 7 अगस्त 2020 को, कोविड-19 महामारी के दौरान दुबई से कोझिकोड (कालीकट) आ रही वंदे भारत मिशन की एक विशेष उड़ान लैंडिंग के समय हादसे का शिकार हो गई. भारी बारिश के कारण रनवे गीला था और विमान टेबलटॉप रनवे से फिसलकर नीचे गहरी खाई में जा गिरा, जिससे वह दो टुकड़ों में टूट गया. विमान में कुल 190 लोग सवार थे. इस दुर्घटना में दोनों पायलटों समेत 21 लोगों की मौत हो गई.

2. एयर इंडिया एक्सप्रेस फ्लाइट 812 (2010) : 22 मई 2010 को दुबई से मंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचा बोइंग 737-800 विमान लैंडिंग के दौरान टेबलटॉप रनवे से आगे निकल गया. विमान संतुलन खोकर गहरी घाटी में गिर पड़ा और उसमें आग लग गई. इस दर्दनाक हादसे में विमान में सवार 166 यात्रियों में से 158 की मौत हो गई. इस घटना के बाद भारत में टेबलटॉप रनवे की सुरक्षा व्यवस्था और खराब मौसम में लैंडिंग को लेकर गंभीर सवाल उठे थे.

अजित पवार
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