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Sidharth Bhardwaj ने कर दी थी डॉग चेन से बाप की पिटाई; रोज-रोज की हिंसा करती थी परेशान

Sidharth Bhardwaj ने कर दी थी डॉग चेन से बाप की पिटाई; रोज-रोज की हिंसा करती थी परेशान
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( Image Source:  Instagram: theaslisidharth )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय6 Mins Read

Updated on: 29 April 2026 7:40 AM IST

एमटीवी स्प्लिट्सविला के दूसरे सीजन को जीतने के बाद काफी मशहूर हुए सिद्धार्थ भारद्वाज (Sidharth Bhardwaj) बाद में 'बिग बॉस' सीजन 5 में दूसरे स्थान पर रहे थे. वे एक सफल मॉडल और एक्टर हैं. हाल ही में उन्होंने अपने बचपन के बहुत ही दर्दनाक और मुश्किल दिनों के बारे में खुलकर बात की है. उनका बचपन हिंसा, डर और भावनात्मक तकलीफों से भरा हुआ था. 2019 में लॉस एंजिल्स चले जाने के बाद, इस साल सिद्धार्थ रियलिटी शो 'द 50' के जरिए भारतीय टेलीविजन पर वापसी किया. हाल ही में सिद्धार्थ कनन्न के साथ एक इंटरव्यू में सिद्धार्थ ने अपने बचपन की वो दर्दनाक यादें शेयर कीं, जिन्हें सुनकर किसी का भी दिल पसीज जाए.

बचपन की शुरुआत एक खतरनाक गांव में

सिद्धार्थ ने बताया, 'मेरा जन्म दिल्ली के चंदेरवाल गांव में हुआ था. 80 के दशक में यह गांव बेहद कुख्यात था. दिल्ली के चार बड़े-बड़े गैंगस्टर इसी गांव से थे. मेरे पिता उस समय उन गैंगस्टरों के लिए हिटमैन का काम करते थे. वे एक अच्छे बॉक्सर थे, इसलिए लोग उन्हें 'बिल्लू बॉक्सर' के नाम से जानते थे. वे दिल्ली के माफिया जगत से जुड़े हुए थे.' जब सिद्धार्थ का जन्म हुआ, तो उनकी मां ने पिता से साफ-साफ कहा, 'बिल्लू, हम इस बच्चे को यहां नहीं पाल सकते. यह माहौल इसके लिए ठीक नहीं है.' मां की इस बात को मानते हुए पिता ने सब कुछ छोड़ दिया. वे गांव, अपनी पुरानी दुनिया और गैंगस्टर जीवन सब पीछे छोड़कर परिवार को उस खतरनाक माहौल से बाहर ले आए. लेकिन पूरी तरह बदलना इतना आसान नहीं था.

पिता का मानसिक संघर्ष

सिद्धार्थ कहते हैं, 'शारीरिक रूप से तो हम गांव से बाहर चले गए, लेकिन मेरे पिता मानसिक और भावनात्मक रूप से वहां से बाहर नहीं निकल पाए. उनकी पूरी पहचान उस पुराने गैंगस्टर जीवन से जुड़ी हुई थी. वे हर दिन पुराने गांव वापस जाते, अपने पुराने दोस्तों के साथ बैठते और घंटों बातें करते. अचानक सब कुछ छोड़ना उनके लिए बहुत मुश्किल था.'

पिता का भयानक एक्सीडेंट

जब सिद्धार्थ महज 9 साल के थे, तब उनके पिता के साथ एक बहुत डरावनी घटना घटी. किसी ने उन्हें दिल्ली के रोहिणी इलाके में एक छठी मंजिल की इमारत से नीचे धक्का दे दिया. इस दुर्घटना में उनके पिता बुरी तरह घायल हो गए. उनके पूरे शरीर में छड़ें लग गईं और वे लगभग पांच साल तक बिस्तर पर ही पड़े रहे. इस पूरे समय परिवार पर बहुत भारी बोझ आ गया.

मां की मेहनत और बलिदान

सिद्धार्थ इमोशनल होकर बताते हैं कि इस मुश्किल समय में उनकी मां ने परिवार को संभाला. मेरी मां सुबह 5-6 बजे उठ जातीं. पहले पिता को बाथरूम ले जातीं, उन्हें नहलाती-धुलातीं, साफ करतीं, फिर वापस बिस्तर पर लिटातीं. उसके बाद हमारे लिए खाना बनातीं, हमें स्कूल भेजतीं और फिर खुद 9 किलोमीटर दूर अपनी नौकरी पर पैदल जातीं. वे रिक्शा नहीं लेती थीं क्योंकि पैसे बचाकर पिता के लिए मटन बोन सूप बनाना चाहती थी.' एक बार सिद्धार्थ ने अपनी मां से 7 रुपये का गुलेल मांगा, तो मां ने कहा, 'आज नहीं बेटा, मेरे पास पैसे नहीं हैं.' इसी संघर्ष भरे माहौल में सिद्धार्थ बड़े हुए.

मां की सफलता और पिता का गुस्सा

धीरे-धीरे उनकी मां ने बहुत मेहनत से अपनी स्थिति सुधारी. उन्होंने 900 रुपये महीने की नौकरी से शुरुआत की, जिसमें उन्हें विज्ञापन के पर्चे बांटने पड़ते थे. मात्र 5-6 साल में उनकी मां एक विज्ञापन एजेंसी की मालिक बन गईं. लेकिन पिता इस बदलाव को स्वीकार नहीं कर पाए. वे पहले गैंगस्टर थे, फिर लंबे समय तक बीमार रहे और जब ठीक हुए तो देखा कि उनकी पत्नी उनसे ज्यादा कमा रही है, बच्चे बड़े हो रहे हैं और उनकी अपनी कोई पहचान नहीं बची. इस वजह से वे बहुत हिंसक हो गए.

घरेलू हिंसा का डरावना माहौल

सिद्धार्थ ने दर्द के साथ बताया, 'मेरे पिता मेरी मां को बुरी तरह पीटते थे. एक बार उन्होंने मेरी मां के मुंह पर इतने जोर से मुक्का मारा कि उनके सारे दांत टूट गए. मेरी आंखों के सामने यह सब होता था.' वे आगे कहते हैं, 'रात में हम सो रहे होते, और पिता बूट पहनकर सोती हुई मां के पेट में लात मार देते. हम दरवाजा बंद करके सोते थे, फिर भी वे बार-बार अंदर घुसकर मारते. हम इस बात को किसी को नहीं बताते थे. स्कूल में हम मुस्कुराते रहते और दिखाते कि घर पर सब ठीक है. लेकिन अंदर से हम टूट चुके थे. हम जैसे मर चुके थे, कुछ भी महसूस नहीं होता था.'

सिद्धार्थ ने पिता को मारा

जब सिद्धार्थ 16 साल के हुए, तो स्थिति बर्दाश्त के बाहर हो गई. एक दिन जब पिता फिर से मां को मार रहे थे, तो सिद्धार्थ का सब्र टूट गया. मुझे लगा कि अगर मैंने आज कुछ नहीं किया तो यह सिलसिला कभी नहीं रुकेगा. मैंने अपने कुत्ते की चेन उठाई और पिता को मारा. मैं अपनी मां को और मार खाते नहीं देख सकता था.'

पिता के प्रति जटिल भावनाएं

इस सबके बावजूद सिद्धार्थ कहते हैं कि उन्होंने अपने पिता से कभी नफरत नहीं की. मैंने हमेशा उन्हें हीरो माना. चाहे उन्होंने मुझे या मेरी मां को कितना भी दर्द दिया हो, लेकिन उन्होंने मुझे बहुत प्यार भी किया. मैं उनके अंतिम दिनों तक भी उनसे प्यार करता था. जब वे मां को मारते थे, तब भी मुझे गुस्सा तो आता था, लेकिन नफरत कभी नहीं हुई.' सिद्धार्थ के पिता बाद में दिल का दौरा पड़ने से चल बसे. उनकी बड़ी बहन जया भारद्वाज की शादी अब भारतीय क्रिकेटर दीपक चाहर से हो चुकी है.

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