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रे कबीरा… अरिजीत 'यूं ना जा' कहकर क्यों तन्हा छोड़ गए तुम?

प्रिय अरिजीत सिंह, आपकी आवाज़ टूटते दिल को धीरे से संभालती थी. मैंने आपके गाने अकेले सुने, रात के सन्नाटे में, जब आंखें खुद से भी कुछ छुपा रही थीं.

रे कबीरा… अरिजीत यूं ना जा कहकर क्यों तन्हा छोड़ गए तुम?
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हेमा पंत
By: हेमा पंत

Updated on: 28 Jan 2026 2:45 PM IST

दिल संभल जा जरा, फिर मोहब्बत... ये वो पहली लाइन थी, जिसके जादू से मेरे दिल में एक मीठी सी बेचैनी जग गई. वो दिन याद हैं जब हम सब पहली बार आपकी आवाज़ सुनकर ठिठक गए थे -इतनी सादगी, इतना दर्द, इतना प्यार. आज ये लिखते हुए कोई शोर नहीं है. कोई बैकग्राउंड म्यूजिक नहीं. बस एक खालीपन है वही खालीपन जो तब आता है जब कोई अपना बिना शोर किए थोड़ा पीछे हट जाता है. अरिजीत आपके रिटायरमेंट की खबर कोई ब्रेकिंग न्यूज नहीं लगी.

वो ऐसी लगी जैसे किसी पुराने घर की बत्ती धीरे से बंद हो गई हो बिना आवाज़ किए, लेकिन अंधेरा साफ़ महसूस हुआ. आप कभी सिर्फ़ सिंगर नहीं रहे. आप वो आवाज़ थे जो हम तब सुनते थे जब हम खुद को सुनने से डरते थे. जब दिल में बहुत कुछ होता था, लेकिन बोलने लायक कुछ नहीं बचता था. आपके गाने कभी “सुनने” के लिए नहीं थे. वो सहने के लिए थे. टूटने के लिए. खुद को जोड़ने के लिए. आपकी आवाज़ में एक अजीब सी सच्चाई थी कोई दिखावा नहीं,कोई कोशिश नहीं, बस जैसा दिल है वैसा ही बाहर.

“तुम ही हो” एक सुपरहिट गाना नहीं था. वो एक कंफेशन था. ऐसा कंफेशन जो बहुत से लोग ज़िंदगी भर नहीं कर पाते उस गाने ने लाखों लोगों को ये कहने की हिम्मत दी कि हाँ, कोई है जिसके बिना कुछ नहीं बचता. बच्चों ने उसे मासूमियत से गाया, जवानों ने उसे इश्क़ समझा, और जो उम्र से आगे निकल चुके थे उन्होंने उसमें अपनी अधूरी मोहब्बतें ढूंढ लीं. जनम जनम” सुनते हुए लोगों को पहली बार लगा कि प्यार वक्त से नहीं हारता. वो बस एक आवाज़ में टिक जाता है. आपकी आवाज़ में.

और फिर आया “चन्ना मेरेया”. ये गाना नहीं था. ये वो अलविदा था जो हम में से बहुतों ने कभी कहा ही नहीं. हँसते हुए किसी को जाने देना आपने उस दर्द को संगीत बना दिया. कितने ही लोग इस गाने को सुनकर मजबूत बने और कितने ही लोग पहली बार

खुद को टूटने की इजाज़त दे पाए. आपके गानों की सबसे बड़ी ताक़त ये थी कि वो ज़ोर से नहीं रोते थे. वो चुपचाप दिल के किसी कोने में बैठ जाते थे. और वहीं से सब कुछ बदल देते थे. “सोच ना सके” इस गाने में जो पछतावा है, वो हर उस इंसान का है जो आज भी सोचता है काश उस दिन थोड़ा और रुक गया होता. थोड़ा और कह दिया होता. आपने रिग्रेट को आवाज़ दे दी. और सबसे हैरानी वाली बात जिन लोगों ने कभी कहा,“मुझे गानों से क्या लेना”, वो भी आपको सुनकर रुक जाते थे. जैसे दिल खुद पहचान ले कि ये आवाज़ हमारी है. आप कभी फ्लैशी नहीं रहे. आप कभी लाउड नहीं रहे.

आपने कभी ये साबित करने की कोशिश नहीं की कि आप सबसे बड़े सिंगर हैं. आप बस गाते रहे और हम सब अपने-आप जुड़ते चले गए. आपकी आवाज़ में दर्द था, लेकिन शिकायत नहीं. प्यार था, लेकिन शोर नहीं. और यही वजह है कि आपकी आवाज़ हर उम्र की हो गई. बच्चों ने उसमें मस्ती ढूंढी,नौजवानों ने रास्ता,और बुज़ुर्गों ने अपनी बीती शामें. आज अगर आप पीछे हट रहे हैं, तो ये किसी करियर का अंत नहीं है. ये उस आवाज़ का थोड़ा आराम लेना है जो बरसों से हम सबको संभाल रही थी. शायद अब प्ले लिस्ट बदल जाएं, शायद नए नाम आएं, नई आवाज़ें आएं. लेकिन कुछ खाली जगहें भरती नहीं हैं. वो बस याद बन जाती हैं. आप भी अब

याद नहीं बनेंगे. आप प्रजेंस बनकर रहेंगे- हर उस रात में जब कोई अकेला इयरफोन्स लगाकर खुद से लड़ रहा होगा. या खुद को बचा रहा होगा. अगर सच में ये रिटायरमेंट है, तो बस इतना जान लीजिए आपने जो दिया है वो कभी रिटायर नहीं होगा. आपकी आवाज़ हर उस इंसान के साथ रहेगी जो प्यार में पड़ा,टूटा, संभला और फिर भी ज़िंदा रहा. शुक्रिया अरिजीत इतना कुछ कह देने के लिए बिना कभी ज़्यादा बोले. कुछ आवाज़ें खामोशी में भी गूंजती रहती हैं. आप उन्हीं में से एक हैं.

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