Begin typing your search...

सिंगर नहीं स्पोर्ट्स कोच बनना चाहते थे Manoj Tiwari, क्यों दिया था गुलशन कुमार ने मृदुल नाम? उठाते थे पड़ोसियों का सामान

भोजपुरी सुपरस्टार और बीजेपी सांसद मनोज तिवारी हाल ही में स्टेट मिरर पॉडकास्ट में नजर आए. बिहार के कैमूर जिले के अतरवलिया गांव में गरीबी और लालटेन की रोशनी में पले-बढ़े मनोज ने 26 साल की उम्र में अपने गांव में बिजली पहुंचाई. ‘बगल वाली जान मारे ली’ और ‘रिंकिया के पापा’ जैसे हिट गानों से पहचान बनाने वाले मनोज तिवारी ने स्पोर्ट्स कोच बनने से लेकर सिंगर, एक्टर और सांसद बनने तक का सफर बताया.

सिंगर नहीं स्पोर्ट्स कोच बनना चाहते थे Manoj Tiwari, क्यों दिया था गुलशन कुमार ने मृदुल नाम? उठाते थे पड़ोसियों का सामान
X
जीतेंद्र चौहान
By: जीतेंद्र चौहान

Updated on: 24 Jan 2026 6:57 PM IST

मनोज तिवारी एक प्रसिद्ध भोजपुरी सिंगर, एक्टर और राजनेता हैं. वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े हुए हैं और वर्तमान में दिल्ली की उत्तर-पूर्व दिल्ली लोकसभा सीट से सांसद हैं. हाल ही में वह स्टेट मिरर हिंदी के पॉडकास्ट में शामिल हुए जहां उन्होंने अपनी जिंदगी से जुड़े किस्से सुनाएं कि आखिर एक सुपरस्टार बनने से पहले उन्होंने क्या-क्या संघर्ष किया. मनोज तिवारी जिन्होंने एक्टिंग से पहले कई हिट एल्बम गाए. उनका साल 2000 में 'बगल वाली जान मारे ली' बेहद हिट रहा. यह गाना मनोज तिवारी के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ और उन्होंने इसी गाने से भोजपुरी इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई. इसके बाद साल 2002 में आया 'रिंकिया के पापा' जो होता जबरदस्त रहा कि आज भी यह गाना लोगों को जुबां पर है.

मनोज आज जिनका मुंबई, दिल्ली में शानदार करोड़ों की प्रॉपर्टी है. वहीं कभी उनका बचपन बिहार के कैमूर जिले का अतरवलिया में बीता जब उन दिनों उन्होंने गरीबी भी देखी. पॉडकास्ट में उन्होंने बताया कि अतरवलिया के पैतृक गांव में भले ही उन्होंने गरीबी देखी लेकिन आज भी वह देश के किसी भी खेत में चले जाते है तो उन्हें अपना बचपन का गांव याद आता है. मनोज ने बताया कि अतरवलिया से उनका भावनात्मक जुड़ाव है. अगर वह कहीं भी गाड़ी से जा रहे होते है और अगर उनके पास समय होता है तो वह खेत देखते ही रुक जाते है. मनोज ने कहा, 'गांववाले को देखकर भी कभी-कभी खेत भी बातें करते है. गांव में रहना और वहां पलना-बढ़ना सौभाग्य की बात है. शहरों में एक घंटा बिजली कट जाएं तो गालियां देना शुरू कर देते है और एक हम लोग थे जिन्होंने बिजली तो क्या गांव में खंबा भी नहीं देखा था.'

Instagram: manojtiwari.mp

26 साल की उम्र में देखी बिजली

मनोज ने कहा, 'अपने गांव में उन्होंने बिजली लाने का प्रयास किया. उन्होंने कहा कि 26 साल की उम्र में उन्होंने अपने गांव में बिजली देखी. उन्होंने बताया कि समाज उन्हें एक सिंगर के तौर पर पहचान मिलने लगी थी. जिसकी वजह से वह अपने गांव में बिजली का खंबा लाने में सफल रहे.' इस दौरान उन्होंने बताया कि कैसे उनका बचपन लालटेन में गुजरा उसका शीशा साफ करना उसमे तेल भरना यह सब एक अच्छी यादें है. आज मनोज तिवारी इसलिए बड़े स्टार है क्योंकि उन्होंने छोटे-बड़े काम में कोई फर्क नहीं किया. उन्होंने याद किया कि जब वह बनारस में इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रहे थे. तब लोगों का सामान उठाते थे. मनोज ने कहा, 'मैंने तो वो दिन देखा है जब मैं इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रहा था मेरे घर के बगल में एक अच्छा मध्यम वर्गीय परिवार था. जब वह लोग कहीं जाते थे तो मैं उनका सामान उठाकर स्टेशन पहुंचा देता था. इसके लिए मुझे कोई पैसे नहीं मिलते थे बस दो टाइम खाना मिल जाता था.' यह बताते हुए मनोज काफी इमोशनल भी हुए.

Instagram: manojtiwari.mp

स्पोर्ट्स कोच बनना चाहते थे मनोज

मनोज तिवारी जिन्होंने BHU काशी हिंदू विश्विद्यालय से फिजिकल एजुकेशन में मास्टर डिग्री हासिल की. उन्होंने बताया कि 7 क्लास तक उनका मन क्रिकेट और सिनेमा की तरफ लगने लगा था. इसकी वजह से उनकी पढ़ाई कुछ हद तक डिस्टर्ब रही. लेकिन किसी तरह उन्होंने दसवीं सेकंड डिवीजन पास की बिना नकल के. उन्हें दसवीं में 56% मिला. मनोज जिनके जहन में ही नहीं था कि वह कभी सिंगर बनेंगे वह हमेशा से एक स्पोर्ट्स टीचर या क्रिकेट कोच बनना चाहते थे. लेकिन आगे जाकर उनका झुकाव संगीत की तरफ हुआ. इससे पहले उन्होंने UPSC में हाथ आजमाया फिर पुलिस विभाग में रिटन एग्जाम भी पास किया. लेकिन आगे की परीक्षाओं में उन्हें असफलता मिली. उन्होंने बताया कि वह हमेशा से मल्टिपल ऑप्शन साथ रखते थे और हर क्षेत्र में हाथ आजमाते थे. उनके मन यह भी चलता था कि आखिर कुछ न बन पाएं तो क्या हुआ गांव में जाकर खेती तो कर ही ही लेंगे. उन्होंने इस पॉडकास्ट के जरिए लोगों को मैसेज भी दिया कि लोग अपने जीवन में ज्यादा से ज्यादा ऑप्शन रखें क्योंकि दो ऑप्शन रखा और दोनों ही नहीं बन पाए तो डिप्रेशन में चले जाओगे. हमेशा अपनी स्किल पर काम करते रहे.

Instagram: manojtiwari.mp

ये भी पढ़ें :हरियाणा इवेंट में Mouni Roy के साथ हुई छेड़छाड़, गलत तरह से छुआ, दी गंदी गालियां; एक्ट्रेस ने बयां किया दर्द

कैसे मिला मृदुल नाम

वहीं मनोज तिवारी से यह भी खुलासा किया कि उन्होंने अपनी मां से सीखा देवी गीत 'निमिया के डार' से करियर शुरू किया जो लोगों को बहुत पसंद आया. जिसमें एक थे दिवगंत सिंगर गुलशन कुमार जिन्होंने मनोज का यह देवी गीत सुनते ही उन्हें मृदुल नाम दिया. मनोज ने बताया कि गुलशन कुमार ने उनसे कहा कि मनोज कुमार तिवारी बहुत लंबा नाम है. तुम कुमार की जगह मृदुल कर दो. जिसके बाद मनोज ने थोड़ा सोचा और उन्हें अपने बिहार की जातीय संघर्ष का ख्याल आया और उन्होंने गुलशन कुमार से कहा, 'तिवारी रहने देते है कुमार की जगह मृदुल कर देते है और ऐसे नाम हुआ मनोज मृदुल तिवारी.'

रवि किशन से राइवलरी

इस दौरान जब मनोज से पूछा गया कि वह रवि किशन को शुरूआती दिनों में अपना कॉम्पिटिशन मानते थे क्योंकि हमेशा कई बार उनके बीच एक राइवलरी देखी गई है चाहे पार्लियामेंट हो या इंडस्ट्री. जवाब में मनोज ने कहा, 'रवि से कभी मेरा कोई कॉम्पिटिशन ही नहीं था. वह मेरे इंडस्ट्री में आने से पहले फ़िल्में कर रहे थे जिनका कोई फायदा नहीं था. मैं उनके बाद इंडस्ट्री में आया और उनसे ज्यादा फीस लेता था.' मनोज ने खुलासा किया कि खुद रवि ही बताते है थे 16 से 17 लाख में फ़िल्में बन जाती थी और वह सिर्फ 25000 लेते थे. वहीं मैं उनकी जगह अपनी शुरुआत में डेढ़ से दो लाख लेता था फिल्म करने का.

फिल्म से राजनीति तक

बता दें कि मनोज से अपना डब्यू 'ससुरा बड़ा पैसे वाला' से किया. जो साल 2003 की सबसे ज्यादा हाईएस्ट हिट थी. इसके बाद उन्होंने एक से बढ़कर एक फ़िल्में की जिसमें अजय देवगन के साथ थी 'धरती कहे पुकार के', 'बंधन टूटे ना', 'दरोगा बाबू आई लव यू' जैसी फिल्में शामिल है. फिल्मों और संगीत के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा. 2009 में समाजवादी पार्टी से गोरखपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़े योगी आदित्यनाथ से हारे. बाद में बीजेपी जॉइन की और 2014 से उत्तर-पूर्व दिल्ली से सांसद हैं. अन्ना हजारे आंदोलन में भी सक्रिय रहे.

bollywood
अगला लेख