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मुझे इंडस्ट्री में धकेला गया.....नॉर्मल नहीं दर्दनाक बचपन जिया Jaya Bhattacharya ने, मां हंटर-बेलन-चिमटे से पीटती थी

जया बताती है कि उन्हें बचपन से डांस और म्यूजिक का बहुत शौक था. वो क्लासिकल डांस और म्यूज़िक सीख रही थी. एक्टिंग में आने का बिल्कुल इरादा नहीं था. लेकिन घर की आर्थिक हालत इतनी खराब थी कि पापा ने उन्हें जबरदस्ती काम पर लगवा दिया.

मुझे इंडस्ट्री में धकेला गया.....नॉर्मल नहीं दर्दनाक बचपन जिया Jaya Bhattacharya ने, मां हंटर-बेलन-चिमटे से पीटती थी
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( Image Source:  Instagram : jaya.bhattacharya )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय

Published on: 29 Nov 2025 3:17 PM

'क्योंकि सास भी कभार बहू थी' में पायल का रोल करके घर-घर में मशहूर हुईं जया भट्टाचार्य (Jaya Bhattacharya) आज भले ही टीवी की जानी-मानी एक्ट्रेस हों, लेकिन उनका बचपन बेहद दर्दनाक और तकलीफों से भरा रहा. हाल ही में सिद्धार्थ कन्नन के पॉडकास्ट में उन्होंने पहली बार अपने दिल की सारी बातें खुलकर बताईं. ये सुनकर हर कोई हैरान रह गया कि जो जया स्क्रीन पर इतना कॉन्फिडेंट और खुश दिखती हैं, उन्होंने ज़िंदगी में इतना कुछ झेला है.

जया ने बताया कि उनके माता-पिता की शादी दोनों की मर्ज़ी के खिलाफ हुई थी. दोनों एक-दूसरे से बिल्कुल भी खुश नहीं थे. घर में हर समय झगड़ा और तनाव रहता था. मां अपने टूटे हुए सपनों का गुस्सा जया पर निकालती थी. जया ने रोते हुए कहा, 'मेरे लिए सबसे बड़ा दुर्भाग्य यही था कि मैं एक लड़की के रूप में पैदा हुई. मां को जो कुछ भी मिला, वो सब अधूरा था उनकी शादी, उसके सपने, उसकी खुशी… और जो कुछ भी वो मुझे दे सकती थीं, वो भी अधूरा था.'

मां के हाथों मार खाना रोज़ की बात थी

जया ने खुलासा किया कि बचपन में उनकी मां उन्हें बहुत मारती-पीटती थी. हंटर, बेलन, चिमटा, जूते, जो भी हाथ में आया, उसी से पीटा जाता था मुझे बहुत मारा गया है. कभी-कभी तो इतना मारती थीं कि शरीर पर निशान पड़ जाते थे. उस मार की वजह से मैं बहुत ज़िद्दी और गुस्सैल बन गई. मैंने खुद को भी बहुत नुकसान पहुंचाया गुस्से में खुद को चोट पहुंचाना, दीवार पर सिर मारना… ऐसा बहुत कुछ किया. पापा से बहुत प्यार था, लेकिन मां से आज भी नाराज़गी है.' जया को अपने पिता से बहुत लगाव था. वो उनके बहुत करीब थीं, लेकिन मां के व्यवहार की वजह से आज भी उनके मन में एक गांठ है. उन्होंने कहा, 'मैंने वो सारी चीज़ें सीख लीं जो मुझे नहीं सीखनी चाहिए थी लोगों को जज करना, उनका सम्मान न करना, और सबसे बड़ी बात अपने बच्चे का दूसरों के सामने साथ न देना.'

एक्टिंग करना कभी सपना नहीं था, मजबूरी बन गया

जया बताती है कि उन्हें बचपन से डांस और म्यूजिक का बहुत शौक था. वो क्लासिकल डांस और म्यूज़िक सीख रही थी. एक्टिंग में आने का बिल्कुल इरादा नहीं था. लेकिन घर की आर्थिक हालत इतनी खराब थी कि पापा ने उन्हें जबरदस्ती काम पर लगवा दिया. एक टेलीफिल्म का ऑफर आया. डायरेक्टर ने पापा से बात की पहले मुझे औरत का रोल करना था, फिर अचानक कहा गया कि लड़के का रोल भी करो. शूटिंग तीन दिन बाद थी, लेकिन पापा मुझे अगले दिन सुबह 5 बजे उठाकर ले गए. उन्होंने कहा, 'मैं बिल्कुल तैयार नहीं थी, रो रही थी, मना कर रही थी, लेकिन मुझे जाना पड़ा. बस इसी तरह मेरी एक्टिंग की शुरुआत हुई. मुझे इस इंडस्ट्री में धकेला गया.'

17-18 साल की उम्र में माफिया का डर

जया ने इंडस्ट्री के काले सच को भी बेपर्दा किया. उस टेलीफिल्म के बाद डायरेक्टर अपने एक दोस्त के साथ आया और जया को घुमाने की ज़िद करने लगा. मां पहले टालती रहीं, लेकिन बाद में मान गईं. उन्होंने बताया, 'मुझे रेस्टोरेंट ले गए उस समय मैं सिर्फ 17-18 साल की थी. बाद में पता चला कि वो शख्स माफिया से जुड़ा हुआ था. वो रोज़ घर आने लगा, मुझे गाड़ी चलाना सिखाने लगा. एक दिन उसने बोला, 'मुंबई चलो, बड़ा काम दिलवाऊंगा. मैं डर गई और साफ मना कर दिया.

आज भी वो दर्द साथ है, लेकिन जया मज़बूत हैं

इतना सब झेलने के बाद भी जया भट्टाचार्य ने हार नहीं मानी. आज वो टीवी की सुपरहिट एक्ट्रेस हैं 'क्योंकि सास भी कभार बहू थी', 'कसम से', 'सासुराल सिमर का', 'थपकी प्यार की' जैसे दर्जनों शोज़ में यादगार रोल कर चुकी हैं. लेकिन जब वो अपने बचपन की बातें करती हैं तो उनकी आंखों में आज भी दर्द साफ दिखता है. जया की ये कहानी बताती है कि चमकदार दुनिया के पीछे कितने अनकहे दर्द छुपे होते हैं.

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