शूटिंग में खून की उल्टी, हर दिन चार-पांच घंटे ऑक्सीजन सपोर्ट.. ऐसे पता चली थी Madhubala की बीमारी, बहन ने खोला था राज
मधुबाला की जिंदगी खूबसूरती, प्यार और दर्द की कहानी है. जानिए उनके आखिरी शब्द, दिलीप कुमार संग रिश्ता और सुपरहिट फिल्में।
मधुबाला (Madhubala) भारतीय सिनेमा की एक ऐसी महान एक्ट्रेस थीं. जिनकी खूबसूरती और एक्टिंग आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं. दशकों बीत जाने के बाद भी जब 'प्यार किया तो डरना क्या' गाना बजता है, तो उनकी अनारकली वाली छवि बार-बार दिखाई जाती है और लोग उन्हें ट्रिब्यूट देते हैं. उनकी जिंदगी फिल्मों जितनी ही रोमांचक और दुखभरी रही. मधुबाला का असली नाम मुमताज जहां बेगम देहलवी था. उनका जन्म 14 फरवरी 1933 को दिल्ली में एक मुस्लिम परिवार में हुआ था. वे 11 भाई-बहनों में से पांचवीं थीं. परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, इसलिए वे छोटी उम्र में ही मुंबई आ गए. महज 9 साल की उम्र में उन्होंने 1942 में फिल्म 'बसंत' से बाल कलाकार के रूप में काम शुरू किया. बाद में देविका रानी ने उनका नाम बदलकर मधुबाला रखा, जिसका मतलब है 'मधुर सुंदरता'.
फिल्मों में उन्होंने बहुत कम उम्र में ही लीड किरार निभाने शुरू कर दिए. 1947 में 'नील कमल' फिल्म से उन्हें अच्छी पहचान मिली. जिसमें राज कपूर के साथ काम किया था. 1950 के दशक में वे बॉलीवुड की सबसे बड़ी और सबसे ज्यादा कमाई करने वाली एक्ट्रेस में शुमार हो गईं. उनकी खूबसूरती इतनी जबरदस्त थी कि 1950 में एक अमेरिकी मैगजीन ने उन्हें 'दुनिया की सबसे बड़ी स्टार' कहा था. आज भी फैशन डिजाइनर उनकी अनारकली स्टाइल की साड़ियों और आउटफिट से इंस्पिरेशन लेते हैं.
मधुबाला की शानदार एक्टिंग और उनका अंदाज
फोटोग्राफर उनके नरम फोकस वाले इमेज को याद करते हैं, और फिल्ममेकर उनकी शानदार एक्टिंग को सबसे अच्छा उदाहरण मानते हैं. उनकी निजी जिंदगी भी काफी ड्रामाई रही. दिलीप कुमार के साथ उनका प्रेम संबंध बॉलीवुड की सबसे मशहूर लव स्टोरी में से एक है. दोनों ने 'मुगल-ए-आजम' और 'तराना' जैसी फिल्मों में साथ काम किया, लेकिन उनके रिश्ते में कई मुश्किलें आईं और आखिरकार ब्रेकअप हो गया. बाद में स्वास्थ्य खराब होने के दौरान उन्होंने प्लेबैक सिंगर और एक्टर किशोर कुमार से 1960 में शादी की. लेकिन दुर्भाग्य से उनका स्वास्थ्य और बिगड़ता गया. वे वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (दिल में छेद) से पीड़ित थीं. महज 36 साल की उम्र में 23 फरवरी 1969 को उनका निधन हो गया. पूरा फिल्म जगत और उनके लाखों फैन सदमे में डूब गए. फिर भी उनकी यादें आज भी जिंदा हैं. सोशल मीडिया पर लोग उनकी पुरानी ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें, गाने और डायलॉग शेयर करते रहते हैं. उनकी विरासत सिनेमा में एक्सेलेंस, हमेशा आकर्षक बने रहने और मजबूत इरादों की मिसाल है. कुछ सितारे समय के साथ फीके पड़ जाते हैं, लेकिन मधुबाला जैसी महान हस्तियां समय बीतने के साथ और भी ज्यादा चमकती हैं.
क्या थे मधुबाला के आखिरी शब्द?
फिल्मफेयर को दिए इंटरव्यू में मधुबाला की बहन शाहिदा ने कहा था कि आपा जीना चाहती थी. उन्होंने बताया था, 'आपा के आखिरी शब्द याद है उन्हें जब उन्होंने कहा- मुझे ज़िंदा रहना है मुझे मरना नहीं है. डॉक्टर कब इलाज निकालेंगे. यह बताते हुए शाहिदा के आंखें नम पड़ गई. शाहिदा कहती हैं, 'उनके दिल में छेद का पता तब चला जब वह 1954 में मद्रास में एस.एस. वासन की 'चलाक' की शूटिंग कर रही थीं. उन्हें खून की उल्टी हुई थी. उन्हें तीन महीने तक बेड-रेस्ट की सलाह दी गई थी. लेकिन उन्होंने काम करना जारी रखा क्योंकि वह नहीं चाहती थीं कि उनकी फिल्म को नुकसान हो. उनकी बीमारी की वजह से, उनके शरीर में ज़्यादा खून बनता था. इसलिए यह नाक और मुंह से बाहर निकल जाता था. डॉक्टर घर आकर खून की बोतलें निकालते थे. उन्हें फेफड़ों में पल्मोनरी प्रेशर की भी परेशानी थी. उन्हें हर समय खांसी रहती थी. हर चार से पांच घंटे में उन्हें ऑक्सीजन देनी पड़ती थी, नहीं तो उनकी सांस फूल जाती थी. वह नौ साल तक बिस्तर पर रहीं और सिर्फ हड्डियों और स्किन तक ही रह गईं। वह रोती रहती थीं.
आइए उनकी कुछ सबसे यादगार फिल्मों पर नजर डालते हैं:
मुगल-ए-आजम (1960)
यह उनकी सबसे प्रसिद्ध फिल्म है. इसमें उन्होंने अनारकली का किरदार निभाया, जो दिलीप कुमार के साथ बेहद दुखद प्रेम कहानी वाली थी.'प्यार किया तो डरना क्या' गाना आज भी उतना ही लोकप्रिय है. यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी क्लासिक मानी जाती है.
चलती का नाम गाड़ी (1958)
किशोर कुमार और उनके भाइयों के साथ बनी यह मजेदार रोमांटिक कॉमेडी है. यहां मधुबाला की हंसी-मजाक वाली अदाकारी और खूबसूरती कमाल की दिखती है. फिल्म के गाने आज भी सदाबहार हैं.
मिस्टर एंड मिसेज 55 (1955)
गुरु दत्त ने निर्देशित इस फिल्म में मधुबाला ने मॉडर्न और ग्लैमरस लड़की का रोल किया. यह कॉमेडी फिल्म है, जो समाज के कुछ मुद्दों पर व्यंग्य करती है और हंसी-रोमांस से भरी हुई है.
हावड़ा ब्रिज (1958)
यह एक स्टाइलिश क्राइम थ्रिलर फिल्म है. मधुबाला ने इसमें रहस्यमयी नाइटक्लब सिंगर का रोल निभाया. गाना "आइए मेहरबान" बहुत मशहूर हुआ और इस फिल्म ने उन्हें ग्लैमर आइकन बना दिया.
बरसात की रात (1960)
यह रोमांटिक म्यूजिकल ड्रामा है, जिसमें उनकी सेंटिमेंटलिटी और कव्वाली सीन बहुत याद किए जाते हैं. उनकी स्क्रीन पर मौजूदगी और भावनाओं की गहराई कमाल की थी.




