'लंबी जुदाई' गाने में दिखीं एक्ट्रेस Madhu Malhotra का निधन, 100 से ज्यादा फिल्मों में किया था काम
1970-80 के दशक की अभिनेत्री मधु मल्होत्रा का 13 मार्च 2026 को मुंबई में निधन हो गया. ‘हीरो’ के ‘लंबी जुदाई’ गाने से मिली पहचान, 100 से ज्यादा फिल्मों में किया काम.
मधु मल्होत्रा (Madhu Malhotra), जो 1970 और 1980 के दशक की हिंदी फिल्मों में एक जाना-माना चेहरा थीं, का हाल ही में मुंबई में निधन हो गया. वे 71-72 साल की उम्र में थीं और उनका देहांत 13 मार्च 2026 को हुआ. यह दुखद खबर 'फिल्म इंफॉर्मेशन' जैसी फिल्म ट्रेड मैगज़ीन और कई अन्य मीडिया सोर्स ने दी है. उनके निधन से बॉलीवुड के पुराने दौर के फैंस बहुत दुखी हैं, क्योंकि वे उन छोटी-छोटी लेकिन यादगार भूमिकाओं के लिए हमेशा याद की जाती रहेंगी.
मधु मल्होत्रा ने अपने करियर में 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. ज्यादातर वे सपोर्टिंग रोल्स या छोटे-छोटे कैमियो में नजर आईं, लेकिन उनकी मौजूदगी से फिल्मों में एक अलग ही जान आ जाती थी. वे खास तौर पर सुभाष घई की फिल्मों में अक्सर दिखती थीं. उनकी सबसे ज्यादा याद की जाने वाली भूमिका सुभाष घई की सुपरहिट फिल्म 'हीरो' (1983) में है. इस फिल्म में उन्होंने 'लंबी जुदाई' गाने में लिप-सिंक किया था. यह गाना पाकिस्तानी लोक सिंगर रेशमा की भावुक आवाज़ में था और आज भी बहुत लोकप्रिय है.
मधु ने बहुरंगी जिप्सी स्टाइल की पोशाक पहनकर, दर्द भरी आंखों से इस उदास गीत को परफॉर्म किया था, जो दर्शकों के दिल को छू गया. फिल्म 'हीरो' में ही 'तू मेरा जानू है', 'प्यार करने वाले कभी डरते नहीं' और 'डिंग डोंग बेबी सिंग अ सॉन्ग' जैसे मजेदार गाने भी थे, लेकिन समय के साथ 'लंबी जुदाई' सबसे ज्यादा हिट और क्लासिक बन गया.
इसके अलावा, वे 'सत्ते पे सत्ता' (1982) में भी याद की जाती हैं. यह अमिताभ बच्चन की ब्लॉकबस्टर फिल्म थी, जिसमें मधु ने कॉमेडी एक्टर पेंटल के साथ एक मजेदार जोड़ी बनाई थी. पुराने दर्शक उन्हें 'मौसम मस्ताना' गाने में बीच हैट पहने, खुशमिजाज लड़की के रूप में भी अच्छे से याद करते हैं. मधु मल्होत्रा ने कई बड़ी फिल्मों में छोटी भूमिकाएं कीं, जैसे:
- विश्वनाथ (1978)
- कर्ज़ (1980)
- विधाता (1982)
- रिश्ता कागज़ का
- कयामत
- घुलाम (1998)
वे मोहन भाकरी की हॉरर फिल्मों जैसे 'खूनी मुर्दा' (1989) और 'रूहानी ताकत' (1991) में भी नजर आईं. निर्देशक अनिल शर्मा ने उनके बारे में कहा था कि उनकी फिल्म 'श्रद्धांजलि' (1981) में मधु ने एक छोटी भूमिका की थी और वे पूरी तरह प्रोफेशनल थीं. मधु मल्होत्रा का फिल्मी सफर लंबा और मेहनती रहा. वे लीड हीरोइन नहीं बनीं, लेकिन अपनी मेहनत और एक्सप्रेशंस से उन्होंने दर्शकों के दिलों में जगह बनाई. उनके जाने से 70-80 के दशक के उस दौर की एक और यादगार शख्सियत हमसे दूर हो गई. उन्हें याद करते हुए हम कह सकते हैं कि उनकी छोटी-छोटी भूमिकाएं आज भी फिल्मों को देखते वक्त मुस्कान और भावुकता देती हैं.




