Stock Market Crash Today: Sensex 1100 अंक से ज्यादा टूटा, Nifty 22200 के नीचे; जानें बाजार में गिरावट की 5 बड़ी वजहें
भारतीय शेयर बाजार में 8 अक्टूबर को जोरदार गिरावट आई. दोपहर तक Sensex 1,178 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि Nifty 22,200 के करीब पहुंच गया. इस गिरावट से BSE-listed कंपनियों के कुल मार्केट कैप में करीब 11 लाख करोड़ रुपये की कमी आई, जबकि IT शेयरों ने कुछ राहत दी.
प्रतीकात्मक तस्वीर
Share Market Crash Reasons: भारतीय शेयर बाजार में 8 अक्टूबर को जोरदार बिकवाली देखने को मिली. शुरुआती कारोबार में गिरावट के बाद दोपहर तक सेंसेक्स और निफ्टी की कमजोरी और बढ़ गई. दोपहर 2:58 बजे BSE Sensex 1,178.73 अंक यानी 1.62 फीसदी टूटकर 71,459.98 पर पहुंच गया, जबकि NSE Nifty50 399.60 अंक यानी 1.51 फीसदी गिरकर 22,203.45 पर कारोबार कर रहा था. इस गिरावट के साथ BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 11 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा घट गया.
बाजार में दबाव की शुरुआत RBI की मौद्रिक नीति के बाद बनी चिंता से हुई. RBI ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 फीसदी कर दिया. यह फरवरी 2023 के बाद पहली दर बढ़ोतरी है. इसके साथ केंद्रीय बैंक ने अपनी नीति का रुख ‘Neutral’ से बदलकर ‘Calibrated Tightening’ कर दिया, जिससे निवेशकों को संकेत मिला कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश कम है और जरूरत पड़ने पर आगे भी दरें बढ़ सकती हैं.
1. RBI का सख्त रुख बाजार पर पड़ा भारी
RBI के फैसले ने निवेशकों की चिंता इसलिए बढ़ाई क्योंकि बाजार पहले अपेक्षाकृत नरम मौद्रिक नीति की उम्मीद कर रहा था. रेपो रेट बढ़ने से अर्थव्यवस्था में कर्ज की लागत बढ़ सकती है और कंपनियों के लिए फाइनेंसिंग महंगी हो सकती है. इसका असर खासकर उन सेक्टर्स पर पड़ सकता है जो ब्याज दरों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हैं.
निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेत सिर्फ 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी नहीं, बल्कि RBI का बदला हुआ पॉलिसी स्टांस रहा. बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक ‘Calibrated Tightening’ से यह संदेश गया है कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक आगे भी सख्त कदम उठाने का विकल्प खुला रख रहा है.
2. क्या आगे भी बढ़ सकती हैं ब्याज दरें?
बाजार में अब यह चर्चा भी तेज है कि मौजूदा साइकिल में RBI की ओर से और दर बढ़ोतरी हो सकती है. कुछ विश्लेषकों ने मौजूदा टाइटनिंग साइकिल में आगे की बढ़ोतरी की संभावना जताई है. ऊंची ब्याज दरों का असर शेयरों के वैल्यूएशन पर भी पड़ सकता है. जब फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स पर रिटर्न बेहतर होने लगता है, तो कुछ निवेशक जोखिम वाले इक्विटी निवेश की तुलना में बॉन्ड और अन्य निश्चित आय वाले विकल्पों को प्राथमिकता दे सकते हैं.
3. US Bond Yields में तेजी ने बढ़ाई चिंता
भारतीय बाजार पर सिर्फ घरेलू कारणों का दबाव नहीं है. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल भी उभरते बाजारों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है. अमेरिकी 10-वर्षीय Treasury yield 5.3 फीसदी के ऊपर और 30-वर्षीय yield 5.7 फीसदी से ऊपर पहुंचने से ग्लोबल निवेशकों के लिए अमेरिकी फिक्स्ड इनकम एसेट्स ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं.
आमतौर पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी निकलने का दबाव बढ़ सकता है. यही वजह है कि US yields में तेजी को भारतीय इक्विटी बाजार के लिए नकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
4. कच्चा तेल 102 डॉलर के पार
बाजार की चिंता को कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने और बढ़ा दिया है. Brent crude 102 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और Strait of Hormuz के आसपास तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ते जोखिमों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है. Reuters के मुताबिक गुरुवार को Brent करीब 102.5 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था.
भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए लंबे समय तक तेल की ऊंची कीमतें देश के आयात बिल, महंगाई और चालू खाते पर दबाव डाल सकती हैं. बाजार इस बात को लेकर भी चिंतित है कि महंगा तेल RBI के लिए महंगाई प्रबंधन को मुश्किल बना सकता है.
5. FII की लगातार बिकवाली ने दबाव बढ़ाया
विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs की लगातार बिकवाली भी बाजार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. बुधवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 6,121 करोड़ रुपये से ज्यादा की शुद्ध बिकवाली की थी. सितंबर की शुरुआत से भी विदेशी निवेशकों का रुख लगातार कमजोर रहा है. जब विदेशी निवेशक बड़े पैमाने पर लार्ज-कैप शेयर बेचते हैं तो सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख इंडेक्स पर सीधा दबाव आता है. मौजूदा समय में बढ़ती US bond yields, महंगा crude और RBI की सख्ती जैसे कारण FII selling को और बढ़ा सकते हैं.
किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट?
गुरुवार के कारोबार में कई बड़े शेयरों पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला. ITC, Adani Ports, IndiGo और Power Grid जैसे शेयरों में कमजोरी रही, जबकि Reliance Industries में भी दबाव देखा गया. दूसरी तरफ कुछ शेयरों ने बाजार को संभालने की कोशिश की. Titan के साथ Tech Mahindra, HCL Technologies, TCS और Infosys जैसे प्रमुख IT शेयरों में मजबूती देखने को मिली. IT सेक्टर को अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करने वाले हिस्सों में देखा गया.
RBI के फैसले के साथ महंगाई का दबाव भी बड़ी वजह
RBI ने रेपो रेट बढ़ाने के साथ FY27 की CPI inflation forecast को 5 फीसदी से बढ़ाकर 5.2 फीसदी किया है. वहीं, केंद्रीय बैंक ने FY27 GDP growth forecast को 6.7 फीसदी से बढ़ाकर 7.1 फीसदी किया. यानी RBI को विकास की तस्वीर मजबूत दिख रही है, लेकिन महंगाई और बाहरी जोखिमों को लेकर सतर्कता बढ़ी है. यही मिश्रित तस्वीर शेयर बाजार के लिए चुनौती बन रही है. एक तरफ आर्थिक वृद्धि मजबूत रहने की उम्मीद है, लेकिन दूसरी तरफ महंगा crude, कमजोर रुपये का दबाव, ऊंची वैश्विक bond yields और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार की धारणा को कमजोर कर रहे हैं.
आगे बाजार की दिशा किन चीजों पर निर्भर करेगी?
अब निवेशकों की नजर RBI के अगले कदम, US Federal Reserve के रुख, कच्चे तेल की कीमत, पश्चिम एशिया की स्थिति और FII flows पर रहेगी. इसके अलावा कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे. बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक जब तक विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमती नहीं है और वैश्विक बॉन्ड यील्ड तथा crude में राहत नहीं मिलती, तब तक लार्ज-कैप शेयरों पर दबाव बना रह सकता है. हालांकि, मजबूत कंपनियों के शेयरों में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अलग तस्वीर हो सकती है.
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब?
गुरुवार की गिरावट को सिर्फ एक कारण से जोड़कर नहीं देखा जा सकता. RBI की सख्त नीति, ऊंची US bond yields, महंगा crude, भू-राजनीतिक तनाव और लगातार FII selling ने मिलकर बाजार पर दबाव बनाया है. ऐसे माहौल में बाजार में तेज उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. इसलिए किसी एक दिन की गिरावट को देखकर जल्दबाजी में निवेश या निकासी करने के बजाय निवेशकों के लिए अपनी जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और पोर्टफोलियो की गुणवत्ता को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होगा।.




