14 सालों में कामसूत्र से ज्यादा पोजिशन... ब्रिटेन PM के ऐसा कहते ही सदन में मच गया हंगामा, विपक्ष क्यों तिलमिलाया?

ब्रिटेन की संसद में उस वक्त हंगामा मच गया जब प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कंजरवेटिव पार्टी पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि पिछले 14 सालों में उनके पास “कामसूत्र से भी ज्यादा पोजिशन” रहीं. यह टिप्पणी डिजिटल वर्क आईडी योजना पर बहस के दौरान आई, जिसमें स्टारमर ने विपक्ष की नीतिगत अस्थिरता और बार-बार बदले गए नेतृत्व को निशाना बनाया. पीएम के इस बयान पर विपक्ष भड़क उठा और सदन में तीखी नोकझोंक देखने को मिली. स्टारमर के इस व्यंग्य ने ब्रिटिश राजनीति में नई बहस छेड़ दी है.;

Edited By :  सागर द्विवेदी
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ब्रिटेन की राजनीति में बुधवार को उस वक्त तीखी जुबानी जंग देखने को मिली, जब प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने संसद के भीतर विपक्षी कंजरवेटिव पार्टी पर तीखा और व्यंग्यात्मक हमला बोला. डिजिटल आईडी नीति पर हो रही बहस के दौरान स्टारमर ने कंजरवेटिव्स की 14 साल की सरकार को निशाने पर लेते हुए ऐसा तंज कसा, जो अब सुर्खियों में है.

डिजिटल वर्क आईडी योजना को लेकर अपनी सरकार का बचाव करते हुए पीएम स्टारमर ने न सिर्फ लेबर सरकार की मंशा साफ की, बल्कि पिछली सरकार की नीतिगत अस्थिरता और बार-बार बदले गए पदों को लेकर विपक्ष पर करारा प्रहार किया.

संसद में गरमाया डिजिटल आईडी पर विवाद

ब्रिटेन सरकार द्वारा कर्मचारियों के लिए अनिवार्य डिजिटल आईडी कार्ड की योजना को वापस लेने के फैसले पर संसद में जोरदार बहस हुई. इस दौरान प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा कि उनकी सरकार अवैध रोजगार पर सख्ती से लगाम लगाने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन डिजिटल आईडी का स्वरूप लचीला रखा जाएगा. स्टारमर ने सांसदों से कहा कि 'मैं इस देश में अवैध रूप से काम करने वालों के लिए हालात और सख्त बनाना चाहता हूं, इसलिए जांच होगी. ये जांच डिजिटल होंगी और अनिवार्य होंगी.'

कंजरवेटिव्स पर तंज: 'कामसूत्र से ज्यादा पोजिशन'

बहस के दौरान स्टारमर ने पूर्व कंजरवेटिव सरकार पर तीखा व्यंग्य करते हुए कहा कि पिछले 14 वर्षों में उनके पास पांच प्रधानमंत्री, छह चांसलर, आठ गृह मंत्री और 16 आवास मंत्री रहे हैं.' इसके बाद उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि 14 साल में उनके पास कामसूत्र से भी ज़्यादा पोज़िशन रहीं. इसमें हैरानी नहीं कि वे पूरी तरह थक चुके हैं और देश को भी बिगड़ी हालत में छोड़ गए.' इस टिप्पणी के बाद संसद में हलचल मच गई और विपक्षी बेंचों पर नाराजगी साफ दिखी.

क्यों वापस ली गई डिजिटल आईडी योजना?

डिजिटल आईडी योजना सितंबर में प्रस्तावित की गई थी, जिसका मकसद ब्रिटेन में काम करने के अधिकार की डिजिटल पुष्टि करना था. शुरुआत में इसे अनिवार्य बनाने की बात कही गई थी, लेकिन विपक्ष और नागरिक समूहों ने निजता को लेकर सवाल उठाए. आलोचकों ने दावा किया कि यह योजना लोगों की वैक्सीनेशन स्थिति, कार्बन फुटप्रिंट और यात्रा पर निगरानी का जरिया बन सकती है, हालांकि इन दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया.

विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया

कंजरवेटिव पार्टी की नेता केमी बैडनॉक ने योजना को 'बेकार नीति' बताते हुए इसके वापस लिए जाने का स्वागत किया. वहीं रिफॉर्म यूके पार्टी के नेता नाइजल फैराज ने इसे 'व्यक्तिगत स्वतंत्रता की जीत' करार दिया और कहा कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आई, तो डिजिटल आईडी को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा. विपक्षी दलों ने लेबर सरकार पर सत्ता में आने के बाद कई नीतियों से पीछे हटने का आरोप भी लगाया. उनका कहना है कि जुलाई 2024 में सत्ता संभालने के बाद लेबर ने एक के बाद एक फैसले बदले हैं, जिससे सरकार की नीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

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