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खुद गोवा में तो एक बहू शादी में, 2 गए घूमने, दिल्ली अग्निकांड में कश्यप परिवार में कौन-कौन बचा, 3 बच्चों समेत गई 9 की मौत

दिल्ली के पालम इलाके में पांच मंजिला घर में लगी आग में 9 लोगों की जान चली गई. लेकिन कई लोग किस्मत के चलते बच भी गए, क्योंकि वह घर पर नहीं थे.

खुद गोवा में तो एक बहू शादी में, 2 गए घूमने, दिल्ली अग्निकांड में कश्यप परिवार में कौन-कौन बचा, 3 बच्चों समेत गई 9 की मौत
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हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत5 Mins Read

Updated on: 19 March 2026 10:05 PM IST

दक्षिणी दिल्ली के पालम इलाके में हुई आग की इस भयावह घटना ने एक पूरे परिवार को बिखेर कर रख दिया. यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि किस्मत के ऐसे खेल की कहानी है, जहां कोई घर से दूर होने की वजह से बच गया, तो कोई घर के अंदर ही हमेशा के लिए खत्म हो गया. एक ही छत के नीचे रहने वाला कश्यप परिवार अब दो हिस्सों में बंट चुका है, कुछ जिंदा हैं, लेकिन सब कुछ खो चुके हैं, और कुछ हमेशा के लिए इस दुनिया से जा चुके हैं.

इस त्रासदी में सबसे दर्दनाक बात यह है कि परिवार के कई सदस्य उस वक्त घर पर ही नहीं थे. कोई गोवा में था, कोई शादी में, तो कोई पहाड़ों पर घूमने गया हुआ था. अगर वो उस दिन घर पर होते, तो शायद आज कहानी कुछ और होती या शायद और भी ज्यादा दर्दनाक. चलिए जानते हैं इस हादसे में कौन बचा और कैसे?

एक घर, पांच भाई और बिखर गई पूरी दुनिया

राजेंद्र कश्यप का परिवार एक बड़ा और खुशहाल परिवार था. पांचों बेटे एक साथ रहते थे, और घर में तीन पीढ़ियां एक साथ रहती थीं. लेकिन बुधवार सुबह लगी आग ने इस खुशहाल घर को चंद मिनटों में उजाड़ दिया. इस हादसे में परिवार के 9 लोगों की जान चली गई, जिनमें राजेंद्र कश्यप की पत्नी, उनके दो बेटे, एक बेटी, दो बहुएं और तीन मासूम पोतियां शामिल थीं. घर के हर कोने में अब सिर्फ खामोशी और यादें बची हैं.

कौन-कौन बचा?

इस दर्दनाक हादसे में कुछ लोग सिर्फ इसलिए बच गए क्योंकि वो उस वक्त घर पर नहीं थे. इस आग में राजेंद्र कश्यप की पत्नी लाडो, उनके बेटे कमल , कमल की पत्नी आशु, उनकी तीन बेटियां निहारिका , इवानी और जैसिका, कमल के भाई प्रवेश , बहन हिमांशी और कमल की भाभी दीपिका की मौत हो गई.

कैसे बची हादसे में लोगों की जान?

राजेंद्र कश्यप के बेटे अनिल अपनी एक साल की बेटी मिताली को गोद में लेकर उसे बचाने की हर संभव कोशिश कर रहे थे. लेकिन जैसे-जैसे धुआं बढ़ता गया, हालात काबू से बाहर होते चले गए. इसी अफरा-तफरी में उनकी पकड़ ढीली पड़ गई और मासूम मिताली तीसरी मंजिल से नीचे गिर गई. नीचे खड़े लोग और दमकलकर्मी यह मंजर देख सन्न रह गए. हालांकि, ऊपर फैले बिजली के तार उसकी किस्मत बनकर सामने आए. इन तारों ने उसकी गिरने की रफ्तार को कुछ हद तक कम कर दिया. एक दमकलकर्मी ने उसे पकड़ने की कोशिश भी की, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया और बच्ची जमीन पर जा गिरी. इस हादसे में उसके पैरों में फ्रैक्चर हो गया, लेकिन वह जिंदा बच गई. अपनी बेटी को नीचे गिरते देख अनिल पूरी तरह घबरा गए और उसे बचाने की कोशिश में खुद भी नीचे कूद पड़े. गिरते वक्त उनका सिर फायर ब्रिगेड की गाड़ी से टकरा गया, जिससे उन्हें गंभीर चोट आई और फिलहाल उनका इलाज चल रहा है. वहीं, परिवार का सबसे छोटा बेटा सचिन अपनी जान बचाने के लिए पास की दूसरी इमारत में कूद गया. इस दौरान वह बुरी तरह झुलस गया और उसके शरीर का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा जल गया. अभी वह अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है.

कहां थे राजेंद्र कश्यप?

राजेंद्र कश्यप खुद काम के सिलसिले में गोवा गए हुए थे. वहीं उनका एक बेटा सुनील अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ हिमाचल प्रदेश के सोलन में छुट्टियां मना रहा था. इसी तरह परिवार की एक बहू कविता अपने मायके भागलपुर में थी, जिससे उसकी और उसके छोटे बच्चे की जान बच गई. इसके अलावा, उनके दो बेटे अस्पताल में भर्ती हैं और अनिल की बेटी को फ्रैकचर आया है.

पीछे छूट गए सिर्फ सवाल और दर्द

इस हादसे ने न सिर्फ एक परिवार को खत्म कर दिया, बल्कि कई सवाल भी छोड़ दिए हैं कि सुरक्षा व्यवस्था, आग से बचाव के इंतजाम और समय पर मदद पहुंचने को लेकर. लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि कश्यप परिवार के लिए अब जिंदगी कभी पहले जैसी नहीं होगी. जो लोग बच गए हैं, उन्हें अब अपनी टूटी हुई दुनिया को फिर से जोड़ना होगा. उन यादों के साथ, जो हर पल उन्हें इस दर्दनाक हादसे की याद दिलाती रहेंगी.

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