रोक सको तो रोक लो 'शहबाज'! 'खुद कराउंगा 10-12 साल की बच्चियों की शादी', पाकिस्तान के मौलाना ने संसद में ही कानून को कर दिया चैलेंज
पाकिस्तान में बाल विवाह और घरेलू हिंसा रोकने वाले नए कानूनों को मौलाना फजलुर रहमान ने संसद में ही चुनौती दे दी. उन्होंने कहा कि वह खुद नाबालिगों की शादी करवाएंगे.;
पाकिस्तान की संसद में उस वक्त सन्नाटा छा गया, जब एक मौलवी ने कानून के खिलाफ नहीं, बल्कि सीधे कानून तोड़ने का ऐलान कर दिया. देश के सबसे ताकतवर धार्मिक नेता मौलाना फजलुर रहमान ने बाल विवाह और घरेलू हिंसा रोकने वाले नए कानूनों को खुलेआम खारिज करते हुए कहा कि वह इन्हें नहीं मानेंगे - बल्कि जानबूझकर तोड़ेंगे.
न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, मौलाना ने नाबालिग बच्चों की शादियों में खुद शामिल होने और उन्हें बढ़ावा देने की बात कहकर ऐसा बयान दे दिया, जिसने पाकिस्तान की राजनीति, अदालतों और समाज - तीनों को हिला कर रख दिया.
किन कानूनों पर भड़के मौलाना?
मौलाना फजलुर रहमान ने दो अहम कानूनों पर आपत्ति जताई है. पहला है चाइल्ड मैरिज रेस्ट्रेंट बिल 2025 और दूसरा डोमेस्टिक वायलेंस (प्रिवेंशन एंड प्रोटेक्शन) एक्ट 2026. इन दोनों कानूनों का उद्देश्य पाकिस्तान में नाबालिगों की शादी पर रोक लगाना और महिलाओं और बच्चों को घरेलू हिंसा से सुरक्षा देना है. लेकिन मौलाना फजलुर रहमान ने संसद में साफ कहा कि वह इन संशोधनों को स्वीकार नहीं करते और इन्हें “गैर-इस्लामी” बताते हैं.
संसद में भड़काऊ बयान
नेशनल असेंबली को संबोधित करते हुए मौलाना फजलुर रहमान ने कहा, “मैं इन कानूनों को नहीं मानता. अगर यह लागू होते हैं तो मैं खुद इनका उल्लंघन करूंगा.” उन्होंने आगे कहा कि वह 10, 12, 15 और 16 साल के बच्चों की शादियों में न केवल शामिल होंगे बल्कि उन्हें बढ़ावा भी देंगे, ताकि सरकार को दिखा सकें कि वह इन कानूनों को नहीं मानते. उनका यह बयान सुनते ही संसद में हंगामा मच गया और विपक्षी दलों के कई सांसदों ने जोरदार विरोध किया.
संसद में कैसे पास हुआ घरेलू हिंसा कानून?
यह विवाद उस समय और गहराया जब संसद ने डोमेस्टिक वायलेंस (प्रिवेंशन एंड प्रोटेक्शन) एक्ट 2026 को पारित कर दिया. यह बिल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) की सांसद शर्मिला फारूकी ने पेश किया था. हालांकि, जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फज़ल) के सांसदों ने इसका तीखा विरोध किया और सदन में नारेबाजी की. नया कानून शारीरिक हिंसा, मानसिक प्रताड़ना और भावनात्मक शोषण को अपराध की श्रेणी में लाता है.
घरेलू हिंसा की परिभाषा क्या होगी?
इस कानून के तहत अब निम्नलिखित कृत्य अपराध माने जाएंगे:
- पत्नी को तलाक या दूसरी शादी की धमकी देना
- बिना सहमति किसी और के साथ रहने को मजबूर करना
- पत्नी, बच्चों या परिवार के सदस्य को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना
- डराना, धमकाना या भावनात्मक यातना देना
इस कानून में “बच्चे” की परिभाषा भी तय कर दी गई है - 18 साल से कम उम्र का हर व्यक्ति बच्चा माना जाएगा, चाहे वह लड़का हो या लड़की. यानी इस कानून के जरिए शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल तय कर दी गई है.
मौलाना का तर्क क्या है?
मौलाना फजलुर रहमान का कहना है कि ये दोनों कानून संविधान के खिलाफ हैं और इस्लामी सिद्धांतों से टकराते हैं. संसद को ऐसे मामलों में कानून बनाने का अधिकार नहीं है. उन्होंने मांग की कि इन कानूनों को काउंसिल ऑफ इस्लामिक आइडियोलॉजी (CII) के पास भेजा जाए ताकि धार्मिक दृष्टि से उनकी समीक्षा की जा सके. उनका दावा है कि संसद को धार्मिक मामलों में दखल नहीं देना चाहिए.
सरकार पर भी उठे सवाल
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, मौलाना के बयान ने राज्य की कमजोरी को उजागर कर दिया है. वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस तरह खुलेआम कानून तोड़ने की धमकी देना, बाल सुरक्षा कानूनों को चुनौती देना और उस पर सरकार की चुप्पी देश में कानून के राज को कमजोर करता है. इस बात पर भी चिंता जताई गई कि अगर प्रभावशाली मौलवी कानूनों को मानने से इनकार करेंगे तो आम नागरिकों के लिए कानून का पालन कराना और मुश्किल हो जाएगा.
महिला अधिकार बनाम धार्मिक राजनीति
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सरकार का यह नरम रवैया दिखाता है कि पाकिस्तान में अब भी महिलाओं के अधिकार, बच्चों की सुरक्षा और संवैधानिक कानून से ज्यादा महत्व धार्मिक राजनीति को दिया जा रहा है. आलोचकों के अनुसार, यह रवैया समाज को और ज्यादा बांटने वाला है और इससे कट्टरपंथी ताकतों को ताकत मिलती है.
बहस फिर से तेज
मौलाना फजलुर रहमान के बयान के बाद पाकिस्तान में एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि क्या धार्मिक नेता कानून से ऊपर हैं? क्या संसद को सामाजिक सुधार के कानून बनाने का अधिकार नहीं? क्या महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर समझौता किया जा सकता है? यह विवाद केवल कानून का नहीं, बल्कि सत्ता, धर्म और अधिकारों के टकराव का प्रतीक बन गया है.
बाल विवाह और घरेलू हिंसा के खिलाफ बने कानून पाकिस्तान को आधुनिक कानूनी व्यवस्था की ओर ले जाने की कोशिश हैं, लेकिन मौलाना फजलुर रहमान जैसे नेताओं का खुला विरोध दिखाता है कि यह रास्ता आसान नहीं होगा. यह विवाद आने वाले समय में पाकिस्तान की राजनीति और सामाजिक दिशा तय कर सकता है.