पाकिस्तान में रसोई गैस (LPG) की कीमतों में अचानक आई तेजी ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.  ईरान के साथ प्रमुख सीमा क्रॉसिंग बंद होने से गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है. इसका असर खासतौर पर उन परिवारों पर पड़ा है, जो खाना पकाने और रोजी-रोटी के लिए एलपीजी पर निर्भर हैं. हालात ऐसे हैं कि रिक्शा चालकों की कमाई घट गई है और कम आय वाले परिवारों को अपने भोजन में कटौती करनी पड़ रही है.

लाहौर के 33 वर्षीय रिक्शा चालक राशिद अली की कहानी इस संकट की गंभीरता बताती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले उनकी रोजाना कमाई करीब 6.50 डॉलर यानी लगभग 1,800 पाकिस्तानी रुपये थी, जो अब घटकर करीब 3 डॉलर यानी 840 रुपये रह गई है. राशिद पिछले 13 साल से एलपीजी से चलने वाला रिक्शा चला रहे हैं.  गैस महंगी होने और खर्च बढ़ने के कारण अब वह दिनभर सड़क पर रहने के बावजूद परिवार की जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहे हैं. उनके परिवार ने खर्च बचाने के लिए दिन में तीन की जगह केवल दो बार खाना शुरू कर दिया है.

कुछ ही दिनों में सिलेंडर 56 फीसदी हुआ महंगा

गैस कारोबारियों के मुताबिक, ईरान के साथ सीमा बंद होने के कुछ ही दिनों के भीतर 12 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत करीब 56 प्रतिशत बढ़कर 7,000 पाकिस्तानी रुपये पहुंच गई. यानी एक किलो गैस के लिए लोगों को लगभग 583 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं. इससे पहले यही सिलेंडर करीब 4,500 रुपये में मिल रहा था. 

पाकिस्तान एलपीजी एसोसिएशन के अनुसार, सीमा बंद होने से पहले पाकिस्तान ईरान से रोजाना लगभग 7,000 टन एलपीजी आयात कर रहा था. 17 अक्टूबर को गब्द-रिमदान और तफ्तान सीमा क्रॉसिंग बंद होने के बाद यह आपूर्ति रुक गई. कारोबारियों का कहना है कि इससे बाजार में गैस की उपलब्धता प्रभावित हुई और कीमतों में तेजी आई.

सरकारी दर और खुले बाजार की कीमत में बड़ा अंतर

पाकिस्तान में सरकारी और खुले बाजार की कीमतों के बीच भी बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है. ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (OGRA) ने नवंबर के लिए घरेलू स्तर पर उत्पादित एलपीजी की कीमत 294.08 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलो तय की है. इस हिसाब से 11.8 किलो के घरेलू सिलेंडर की कीमत 3,470.09 रुपये बनती है.

अक्टूबर में यही सिलेंडर 3,296.23 रुपये का था. यानी सरकारी अधिसूचित दर में भी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन खुले बाजार में 12 किलो सिलेंडर की कीमत 7,000 रुपये तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है. इसकी वजह आयात में रुकावट और बाजार में सप्लाई की कमी बताई जा रही है. ध्यान देने वाली बात है कि OGRA की दर घरेलू उत्पादन वाली एलपीजी पर लागू होती है, जबकि खुले बाजार की कीमतों पर आयात में आई बाधा का असर भी पड़ रहा है.

आखिर क्यों बंद हुईं ईरान से लगी सीमा चौकियां?

कारोबारियों के मुताबिक, पाकिस्तान और ईरान के बीच गब्द-रिमदान और तफ्तान क्रॉसिंग 17 अक्टूबर से बंद हैं. पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की सरकार ने इसके पीछे सुरक्षा चिंताओं और तस्करी को वजह बताया. वहीं, ईरान ने शुरुआत में तकनीकी समस्याओं का हवाला दिया था. इन रास्तों से एलपीजी की आपूर्ति रुकने के बाद पाकिस्तान की आयात पर निर्भरता सामने आ गई है. सर्दियों के करीब आने के साथ गैस की मांग बढ़ने की आशंका है. ऐसे में सप्लाई बहाल करना और कीमतों को नियंत्रित रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.

सरकार ने क्या कदम उठाए?

  • पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने मंगलवार को बताया कि देश में एलपीजी की सालाना मांग करीब 24 लाख टन है. घरेलू उत्पादन रोजाना लगभग 2,000 से 2,500 टन के बीच है. बाकी जरूरत आयात से पूरी की जाती है. इसमें पश्चिमी सीमा के रास्ते और समुद्री मार्ग से आने वाली गैस भी शामिल है.
  • सरकार ने पाकिस्तान स्टेट ऑयल (PSO), सूई गैस कंपनियों और पाकिस्तान LNG लिमिटेड जैसी सरकारी कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे सरकारी-से-सरकारी और कारोबारी समझौतों के जरिए बड़ी मात्रा में एलपीजी खरीदने की व्यवस्था करें. निजी आयातकों को भी ज्यादा गैस मंगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.
  • सरकार स्थानीय स्तर पर उत्पादित एलपीजी के वितरण का मौजूदा कोटा सिस्टम बदलने की तैयारी में है. इसकी जगह 5 से 10 टन के लॉट में प्रतिस्पर्धी नीलामी कराई जाएगी. नीलामी के नतीजे सार्वजनिक किए जाएंगे, ताकि वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता रहे.
  • इसके अलावा आयात करने वाली कंपनियों को हर महीने अपनी खरीद लागत की जानकारी देनी होगी. इसमें सऊदी अरामको का कॉन्ट्रैक्ट प्राइस, अतिरिक्त प्रीमियम और माल ढुलाई का खर्च भी शामिल होगा.
  • सरकार नई कीमत निर्धारण और नीलामी व्यवस्था से मिलने वाली अतिरिक्त आय को दो फंड में डालने की योजना बना रही है. इनमें प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड और वल्नरेबल प्रोटेक्शन फंड शामिल हैं. इनका इस्तेमाल पात्र और जरूरतमंद उपभोक्ताओं को एलपीजी पर सब्सिडी देने के लिए किया जाएगा.
  • पाकिस्तान के प्रतिस्पर्धा आयोग को बाजार में जमाखोरी, कीमतों में हेरफेर और कार्टेल बनाने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया है.

सरकार के ये कदम सप्लाई और वितरण से जुड़ी समस्याओं को दूर करने की कोशिश हैं, लेकिन आम परिवारों के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती महंगी गैस है. जब तक पर्याप्त आयात बहाल नहीं होता और खुले बाजार में कीमतें नीचे नहीं आतीं, तब तक एलपीजी पर निर्भर गरीब परिवारों और छोटे कारोबारियों की मुश्किलें बनी रह सकती हैं.