खाड़ी देशों से ही नहीं अब रूस से भी आएगी BAD NEWS? यूक्रेन के हमलों ने इस तरह बढ़ा दी टेंशन- देखिए VIDEO

यूक्रेन ने रूस के तेल स्थलों पर ड्रोन हमले किए हैं, जिससे बाल्टिक बंदरगाहों पर क्रूड ऑयल एक्सपोर्ट रुका और वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ी. रूस ने जवाबी हमला किया, जबकि फिनलैंड और यूरोप ने चिंताएं जताईं. भारत सहित दुनिया के कई देशों में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है.

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By :  सागर द्विवेदी
Updated On : 25 March 2026 9:30 PM IST

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर पूरी दुनिया के आर्थिक बाजारों पर देखने को मिल रहा है और अब रूस से भी भारत सहित कई देशों में तेल की कीमतों में उछाल आने की संभावना जताई जा रही है. यूक्रेन की सेना ने हाल ही में रूस के प्रमुख तेल स्थलों और रिफाइनरियों पर ड्रोन हमला किया और ये अब तक का सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है. जिससे बाल्टिक सागर के प्रमुख बंदरगाहों पर क्रूड ऑयल एक्सपोर्ट अस्थायी रूप से बंद हो गया. इस हमले से वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है.

इस हमले को लेकर एक्सपर्ट का कहना है कि रूस के तेल निर्यात स्थलों पर हुए ये हमले चार साल से चल रहे युद्ध में सबसे बड़े स्ट्राइक में से एक हैं. इससे न केवल तेल की आपूर्ति पर असर पड़ेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और महंगाई के दबाव भी बढ़ सकते हैं.

यूक्रेन ने रूस के तेल स्थलों पर हमला क्यों किया?

यूक्रेन की सेनाओं ने बाल्टिक सागर के प्रिमोर्स्क और उस्त-लुगा तेल टर्मिनलों को निशाना बनाया. यूक्रेन का दावा है कि इसका उद्देश्य रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को कमजोर करना और शांति वार्ता को दबाव में लाना है. यूक्रेन की SBU सुरक्षा एजेंसी ने कहा कि ड्रोन हमले 'सफलतापूर्वक अपने लक्ष्य पर लगे.'

रूस ने कैसे जवाब दिया?

रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने यूक्रेन के नागरिक स्थलों पर हमले के जवाब में 'एक व्यापक हमला' किया है, जिसमें यूक्रेन की रक्षा उद्योग से जुड़े लक्ष्य निशाने पर थे. रूस ने बाल्टिक बंदरगाहों में आग लगने की पुष्टि की, जबकि किसी के घायल होने की सूचना नहीं है.

वैश्विक तेल बाजार पर क्या असर पड़ेगा?

रूस के तेल टर्मिनल पर ड्रोन हमले के बाद प्रिमोर्स्क और उस्त-लुगा बंदरगाहों पर क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम उत्पादों का लोडिंग अस्थायी रूप से रुका. फिनलैंड से आए वीडियो में काले धुएं के विशाल कॉलम की तस्वीर सामने आई. इससे तेल की कीमतों में अनिश्चितता बढ़ गई है और वैश्विक बाजार में तनाव की संभावना जताई जा रही है.

अमेरिका और यूरोप की प्रतिक्रिया क्या रही?

यूक्रेन ने अमेरिकी सरकार से सुरक्षा गारंटी की मांग की है ताकि संघर्ष को समाप्त किया जा सके. फिनलैंड के सांसद Heikki Autto ने कहा कि यह 'नाटकीय' है कि संघर्ष इतने करीब तक आ गया है. उन्होंने यूरोपीय संघ से कड़े प्रतिबंध लगाने की अपील की ताकि यूक्रेन को ड्रोन हमलों पर निर्भर न रहना पड़े.

भारत सहित वैश्विक उपभोक्ताओं के लिए क्या मतलब है?

तेल निर्यात स्थलों पर हमले और मध्य-पूर्व में तनाव के बीच, भारत समेत कई देश महंगाई और ऊर्जा संकट की चपेट में हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि तेल कीमतों में अस्थिरता, गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की महंगाई बढ़ा सकती है.

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