ऑफिस में काम का बोझ लोगों को बना रहा 'Gay' मंत्री के बयान से मचा बवाल, सोशल पर लोगों ने बनाया मजाक

मलेशिया के एक मंत्री के बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि दफ्तर का कामकाजी दबाव लोगों को LGBT समुदाय की ओर प्रभावित कर सकता है. बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं और लोग इसे लेकर मजाक से लेकर गंभीर बहस तक करने लगे.;

( Image Source:  x-@MothershipSG )
Edited By :  हेमा पंत
Updated On : 29 Jan 2026 3:35 PM IST

अब लोग काम के प्रेशर से बर्नआउट या मेंटल टेंशन में नहीं आ रहे बल्कि Gay बन रहें हैं. ऐसा हम नहीं कह रहे, बल्कि मलेशिया के एक मंत्री का बयान है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर मानवाधिकार संगठनों तक हलचल मचा दी है. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि यह कमेंट संसद में लिखित जवाब में दिया गया है. 

इस दावे के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर तरह-तरह के मीम्स भी बन गए हैं. लोग हैरान है कि इतने ऊंचे पद पर बैठे लोग ऐसी बातें कैसे कह सकते हैं. 

मंत्री ने क्या कहा?

मलेशिया के मंत्री डॉ. ज़ुल्किफ़ली हसन के बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है. वह मलेशिया में प्रधानमंत्री विभाग (धार्मिक मामलों) के मंत्री हैं. मंत्री ने संसद में कहा कि 'दफ्तर का दबाव, सामाजिक माहौल और कुछ निजी कारण लोगों को LGBT समुदाय की ओर प्रभावित कर सकते हैं. यह बात उन्होंने संसद में एक लिखित जवाब के दौरान कही.'

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पेश किए आंकड़े

ये बयान उस समय सामने आए जब संसद में LGBT से जुड़े रुझानों पर सवाल उठाए जा रहे थे, जिनमें उम्र, समुदाय और संभावित कारणों जैसे पहलुओं पर चर्चा हो रही थी. जवाब देते हुए मंत्री ने बताया कि 2022 से 2025 के बीच ऐसे मामलों में 135 बार गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई दर्ज की गई. साथ ही यह भी बताया कि मलेशिया में समान लिंग के रिश्ते कानून के दायरे में अपराध माने जाते हैं.

सोशल मीडिया पर बना मजाक

बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने तरह-तरह के रिएक्शन दिए. जहां एक यूजर ने कहा 'बॉस आज मुझे गे जैसा महसूस हो रहा है क्या मैं हाफ डे ले सकता हूं.' वहीं, दूसरे यूजर ने कमेंट करते हुए कहा 'इस लॉजिक से तो अब तक आधे देश को LGBT हो जाना चाहिए था.' वहीं, एक ने कहा 'वाह, धर्म मंत्री की तरफ से यह कितनी शानदार खोज है.'

मानवाधिकार संगठनों की आपत्ति

LGBTQ समुदाय के अधिकारों के लिए सक्रिय संगठनों ने मंत्री की बात को गलत और गुमराह करने वाली बताया. उनका कहना है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत कई वैश्विक संस्थाएं साफ कर चुकी हैं कि किसी व्यक्ति की सेक्सुअल पहचान उसके नेचर का हिस्सा होती है. इसे बाहरी दबाव से जोड़ना ठीक नहीं है. इन समूहों ने मांग की है कि मंत्री अपना बयान वापस लें और सही जानकारी दें.

विवाद क्यों बढ़ा?

विरोध करने वालों का कहना है कि इस तरह की बातें लोगों में यह सोच पैदा करती हैं कि किसी की यौन पहचान को बदला जा सकता है, जबकि डॉक्टर और वैज्ञानिक इसे पूरी तरह गलत मानते हैं. इसी कारण यह मुद्दा अब सिर्फ एक टिप्पणी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अधिकारों और विज्ञान से जुड़ी बड़ी चर्चा का विषय बन गया है.

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