ईद पर 'जंग का तोहफा'! इजरायल का बड़ा आरोप, Mojtaba Khamenei ने किया दुश्मन देश पर जीत का दावा- पढ़ें Updates

ईरान-इजरायल जंग में ‘होली साइट्स’ पर हमले के आरोप ने तनाव और बढ़ा दिया है. अमेरिका की सैन्य तैनाती और ईरान की चेतावनी ने इस संघर्ष को वैश्विक संकट बना दिया है.

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By :  सागर द्विवेदी
Updated On : 20 March 2026 11:22 PM IST

मिडिल ईस्ट में चल रही जंग अब सिर्फ मिसाइल और बम तक सीमित नहीं रही, बल्कि बयानबाज़ी की जंग भी उतनी ही खतरनाक हो गई है. Iran, Israel और United States के बीच टकराव अब नए मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां हर दिन नए आरोप, नए हमले और नई रणनीतियां सामने आ रही हैं.

ईद के मौके पर भी हालात शांत होने के बजाय और ज्यादा भड़क गए हैं. एक तरफ इजरायल ने यरुशलम के पवित्र स्थलों पर हमले का आरोप लगाया, तो दूसरी तरफ ईरान के नए सुप्रीम लीडर ने इसे 'ज़ायोनिस्ट साजिश' बताया. इस बीच अमेरिका की सैन्य तैनाती, भारत की कूटनीतिक पहल और चीन की चेतावनी ने इस युद्ध को वैश्विक संकट बना दिया है.

क्या ईरान ने सच में 'होली साइट्स' पर हमला किया?

इजरायल के विदेश मंत्रालय ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि ईरान ने यरुशलम के उन पवित्र स्थलों को निशाना बनाया, जो तीनों धर्मों के लिए अहम हैं. इजरायल ने इसे 'ईद का ईरानी गिफ्ट' बताते हुए कहा कि 'तीनों धर्मों के पवित्र स्थलों पर ईरान का हमला, उसके शासन की पागलपन भरी मानसिकता को उजागर करता है.' यह बयान साफ दिखाता है कि इजरायल इस हमले को सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि धार्मिक टकराव के रूप में भी पेश कर रहा है.

क्या ‘ज़ायोनिस्ट दुश्मन’ फैला रहा है साजिश?

ईरान के नए सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei ने इन हमलों को इजरायल की साजिश करार दिया. उन्होंने कहा कि 'तुर्की और ओमान में हुए हमले ज़ायोनिस्ट दुश्मन की एक साजिश हैं, जिसका मकसद हमारे देशों के बीच फूट डालना है.' खामेनेई ने यह भी दावा किया कि दुश्मन देशों के बीच फूट डालने की कोशिश कर रहा है, लेकिन क्षेत्रीय एकता के कारण उसकी रणनीति नाकाम हो रही है.

क्या ईरान वाकई कमजोर पड़ रहा है?

खामेनेई ने साफ शब्दों में इस धारणा को खारिज किया कि ईरान दबाव में है. उन्होंने कहा कि दुश्मन को लगा था कि वह ईरान पर कब्जा कर उसे टुकड़ों में बांट सकता है. लेकिन हमारे लोगों ने एक अभेद किला खड़ा कर दिया.'

क्या तुर्की और ओमान पर हमले ईरान ने किए?

ईरान ने तुर्की पर हमले की बात से साफ इनकार कर दिया है. ईरानी दूतावास ने कहा कि 'ईरान की ओर से तुर्की की तरफ कोई भी प्रक्षेपास्त्र (मिसाइल) नहीं दागा गया है.' साथ ही ईरान ने इन हमलों को 'false flag operation' बताते हुए इजरायल पर शक जताया है, हालांकि इसके ठोस सबूत अभी सामने नहीं आए हैं.

क्या अमेरिका अब जंग में और गहराई से उतर रहा है?

सूत्रों के मुताबिक, United States मिडिल ईस्ट में हजारों अतिरिक्त सैनिक भेज रहा है. USS Boxer और मरीन यूनिट को तय समय से पहले रवाना किया जा रहा है, जिससे साफ है कि अमेरिका इस संघर्ष में अपनी मौजूदगी और मजबूत कर रहा है.

क्या दुनिया भर में खतरा बढ़ने वाला है?

ईरान के सैन्य प्रवक्ता ने एक बेहद खतरनाक चेतावनी दी है कि 'दुनिया में कहीं भी पार्क, मनोरंजन स्थल और पर्यटन स्थल अब तुम्हारे लिए सुरक्षित नहीं रहेंगे.' इस बयान ने साफ कर दिया है कि अगर जंग लंबी चली, तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा.

भारत ने क्या भूमिका निभाई इस संकट में?

प्रधानमंत्री मोदी ने बहरीन के किंग Hamad Bin Isa Al Khalifa से बात कर हालात पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि ऊर्जा और नागरिक ढांचे पर हमले वैश्विक खाद्य, ईंधन और उर्वरक सुरक्षा को प्रभावित कर रहे हैं और समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 913 भारतीय नागरिक ईरान से आर्मेनिया और अज़रबैजान के रास्ते बाहर निकल चुके हैं और कई लोग सुरक्षित भारत लौट चुके हैं.

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