रेगिस्तान में बसावट, परिंदा भी जहां मार न पाए पर- वहां कैसे चोट कर गया Iran? तिलिस्म Israel के डिमोना का

Iran ने इजराइल की रीढ़ की हड्डी पर वार करते हुए डिमोना न्यूक्लियर फैसिलिटी को निशाना बनाया है. इस हादसे में 180 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर ईरान ने इजराइल के मजबूत डिफेंस सिस्टम को कैसे भेद दिया? आइये जानते हैं पूरी डिटेल

( Image Source:  X-@EliAfriatISR )
Edited By :  समी सिद्दीकी
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How Dimona Attacked: इजराइल के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, ईरान के मिसाइल हमलों में दक्षिणी शहर डिमोना और पास के अराद में कम से कम 180 लोग घायल हुए हैं. डिमोना वही शहर है जहां देश की मुख्य परमाणु सुविधा शिमोन पेरेस नेगेव न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर स्थित है. यह हमला अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रही जंग में अब तक के सबसे बड़े तनावों में से एक माना जा रहा है.

सवाल उठ रहा है कि आखिर कैसे ईरान की मिसाइलों ने इजराइल के आयरन डोम और दूसरे डिफेंस सिस्टम को भेदा और ऐसी सेंसिटिव साइट को हिट किया जहां उसे सबसे ज्यादा सेफ्टी होनी चाहिए थी.

ईरान ने इन हमलों पर क्या कहा?

ईरान के सरकारी टीवी ने शनिवार को हुए इन हमलों को उसी दिन ईरान के नतांज परमाणु संयंत्र पर हुए हमले का जवाब बताया है. यह संघर्ष अब चौथे हफ्ते में पहुंच चुका है और दोनों पक्ष एक-दूसरे को निशाना बना रहे हैं.

इजराइल के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अराद में कम से कम 116 लोग घायल हुए, जिनमें 7 की हालत गंभीर है. शहर के बीचों-बीच भारी नुकसान की खबर है. वहीं डिमोना में 64 लोग घायल हुए हैं, जिनमें एक की हालत गंभीर बताई गई है. कई लोगों को छर्रे लगने से चोटें आई हैं और कई रिहायशी इमारतें भी नष्ट हो गईं. घायलों में एक 10 साल का बच्चा भी शामिल बताया गया है.

इजराइल के प्रधानमंत्री ने क्या कहा?

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे देश के लिए “कठिन शाम” बताया और कहा कि ईरान पर हमले जारी रहेंगे. ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, 28 फरवरी से अब तक अमेरिका-इजराइल के हमलों में ईरान में 1500 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें कम से कम 200 बच्चे शामिल हैं.

ईरान ने कैसे भेदा इजराइल का जाल?

इजराइली सेना के एक प्रवक्ता ने बताया कि हमलों के दौरान एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय किया गया था, लेकिन कुछ मिसाइलों को रोका नहीं जा सका, जबकि वे कोई नई या अलग तरह की मिसाइलें नहीं थीं. फायर ब्रिगेड के अनुसार, डिमोना और अराद दोनों जगह इंटरसेप्टर मिसाइलें दागी गईं, लेकिन वे हमलों को रोकने में विफल रहीं, जिससे बैलिस्टिक मिसाइलों के सीधे हमले हुए.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, डिमोना में तीन अलग-अलग जगहों पर मिसाइल गिरीं, जिनमें एक तीन मंजिला इमारत पूरी तरह गिर गई और कई जगह आग लग गई. एक वीडियो में शहर पर मिसाइल गिरते और उसके बाद बड़ा धमाका होते देखा गया.

क्या न्यूक्लियर प्लांट को हुआ कोई नुकसान?

International Atomic Energy Agency ने कहा है कि उसे डिमोना स्थित परमाणु केंद्र को कोई नुकसान होने की जानकारी नहीं मिली है और इलाके में रेडिएशन का स्तर सामान्य है. एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रोसी ने सभी पक्षों से अपील की है कि खासकर परमाणु स्थलों के आसपास सैन्य संयम बरता जाए. डिमोना लंबे समय से इजराइल के परमाणु कार्यक्रम का केंद्र रहा है. यह रिसर्च सेंटर 1958 में फ्रांस की मदद से गुप्त रूप से बनाया गया था.

इजराइल के लिए कितनी अहम है डिमोना न्यूक्लियर फैसिलिटी?

  • डिमोना न्यूक्लियर रिएक्टर को आधिकारिक तौर पर शिमोन पेरेस नेगेव न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर कहा जाता है
  • यह इजराइल के दक्षिण में नेगेव रेगिस्तान में स्थित है, डिमोना शहर से करीब 13 किमी और यरुशलम से लगभग 90 किमी दूर
  • इसे इजराइल के परमाणु कार्यक्रम की सबसे अहम और संवेदनशील साइट माना जाता है
  • 2018 में इसका नाम पूर्व प्रधानमंत्री शिमोन पेरेस के नाम पर रखा गया
  • यह करीब 36 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है, जिसमें 10 इमारतें, इलेक्ट्रिक फेंसिंग, पेट्रोलिंग रोड और एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम मौजूद हैं
  • यहां 8 भूमिगत लैब्स हैं और करीब 2700 वैज्ञानिक व तकनीशियन काम करते हैं
  • इसकी शुरुआत 1950 के दशक में हुई, 1952 में इजराइल ने एटॉमिक एनर्जी कमीशन बनाया
  • 1957 में फ्रांस की मदद से यहां हेवी-वॉटर रिएक्टर लगाया गया
  • 1963 के आसपास यह रिएक्टर ऑपरेशन में आया, जिसकी क्षमता लगभग 26 मेगावाट बताई जाती है
  • यह साइट न्यूक्लियर फ्यूल को प्रोसेस करती है, जो परमाणु बम बनाने की शुरुआती प्रक्रिया मानी जाती है
  • यहां से निकला प्लूटोनियम हथियार बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है
  • 1967 तक रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि यहां यूरेनियम रीप्रोसेसिंग और हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम बनाया जा रहा था
  • 1986 में तकनीशियन मोरदेचाई वनुनु ने इस साइट से जुड़ी गोपनीय जानकारी, फोटो और दस्तावेज सार्वजनिक किए थे
  • इजराइल ने हमेशा “न्यूक्लियर अस्पष्टता” (nuclear ambiguity) की नीति अपनाई है, यानी उसने खुले तौर पर परमाणु हथियार होने की पुष्टि नहीं की
  • 1960 के दशक में अमेरिका और IAEA ने निरीक्षण किया, लेकिन कथित तौर पर कुछ हिस्से छिपे रहे और बाद में जांच बंद हो गई
  • 2021 की सैटेलाइट रिपोर्ट्स के मुताबिक, साइट अब भी सक्रिय है और वहां निर्माण व खुदाई का काम जारी है
  • यह रिएक्टर हर साल लगभग 9 किलोग्राम प्लूटोनियम बना सकता है, जो एक परमाणु बम के लिए पर्याप्त माना जाता है
  • अनुमान के अनुसार, इजराइल के पास 80 से ज्यादा परमाणु हथियार हो सकते हैं, जिनमें एयर-ड्रॉप बम और लंबी दूरी की मिसाइलें शामिल हैं
  • डिमोना साइट इजराइल की परमाणु ताकत और उसकी सुरक्षा नीति का मुख्य आधार मानी जाती है

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