ट्रंप की ईरान पर ‘अदृश्य युद्ध’ की तैयारी! ‘सिग्नल’ मिला तो फिर टूटेगा बंकर बस्टर का कहर, Midnight Hammer 2.0 से कितना हिलेगा तेहरान?

अमेरिका और ईरान के खराब रिश्ते फिर से चरम तनाव तक पहुंच चुके हैं. साल 2025 में Operation Midnight Hammer नामक अमेरिकी एयर स्ट्राइक में ईरान के तीन प्रमुख परमाणु स्थलों को निशाना बनाया था. पिछले कुछ दिनों से ईरान में लोगों के प्रोटेस्ट को कुचलने का अयातुल्ला खामनेई भरपूर प्रयास कर रहे हैं. इस मसले पर हाल ही में ट्रंप ने ईरान पर हमले की चेतावनी दी थी. तो क्या ट्रंप अमेरिका Midnight Hammer का सेकंड वर्जन पर अमल करेंगे?;

( Image Source:  Sora AI )
By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 16 Jan 2026 2:45 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा विवाद के दौरान इजरायल का साथ देते हुए 2025 में Operation Midnight Hammer चलाया था. इस हमले में अमेरिका ने 125 से ज्यादा युद्धक विमान, B-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर और भारी GBU-57 बंकर बस्टर बॉम्ब का उपयोग करते हुए ईरान के परमाणु ठिकानों पर प्रहार किया था. ईरान पर अमेरिका का अब तक का यह सबसे बड़ा हमला था. ऐतिहासिक सैन्य अभियान ने तेहरान की मजबूती को ध्वस्त कर रख दिया था. पिछले कुछ दिनों से ईरान में प्रोटेस्ट चरम पर है. इस प्रोटेस्ट को रोकने के लिए अयातुल्ला खामनेई ने सेना को फायरिंग तक की इजाजत दे रखी है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हजारों लोगों को वहां की सेना मौत के घाट उतार चुकी है. ईरान के इस एक्शन के खिलाफ क्या ट्रंप खुद की चेतावनी पर अमल करते हुए  Operation Midnight Hammer का वर्जन टॅ लॉन्च करेंगे. अगर ऐसा हुआ तो ईरान का क्या होगा, इस बात को सुनकर ही आपका दिल दहल उठेगा.

दरअसल, 2026 आते-आते ईरान में भीषण विरोध प्रदर्शनों और कड़े सरकारी दमन के बीच अमेरिकी प्रशासन फिर से सैन्य विकल्पों का विचार कर रहा है. सवाल यह है कि ट्रंप Operation Midnight Hammer 2.0 को हरी झंडी देंगे और इस बार  अमेरिकी सेना किन तकनीकों और हथियारों को इस्तेमाल करने पर जोर देगी, क्या होगा उसका परिणाम?

Operation Midnight Hammer 1.0 में अमेरिका ने ईरान के Fordow, Natanz और Isfahan नामक तीन प्रमुख परमाणु स्थलों को ध्वस्त कर दिया था. इस ऑपरेशन में अमेरिका ने 7 B-2 Spirit स्टील्थ बॉम्बर, 14 GBU-57 Massive Ordnance Penetrators (MOPs), टॉमहॉक क्रूज जैसी  मिसाइलों का इस्तेमाल किया था. ये हथियार सामान्य बमों से कहीं ज्यादा खतरनाक और शक्तिशाली थीं.

हालांकि, अमेरिकी पक्ष कहता है कि यह नुकसान गंभीर और व्यापक था. कुछ रिपोर्टों के अनुसार केवल एक साइट पर ही पूरी तरह असर हुआ और अन्य दो के गहन नुकसान का आकलन कठिन है. मीडिया रिपोर्ट कुछ भी क्यों न हो, इसका नतीजा यह है हुआ कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम अब काफी पीछे चला गया है.

ट्रंप  Midnight Hammer 2.0 लॉन्च करेंगे या नहीं?

साल 2026 की शुरुआत में ट्रंप प्रशासन ने ईरान की आलोचना तेज कर दी है. उन्होंने ट्रंप को आगाह किया है कि वहां पर चल रहे जन आंदोलन का दमन किया गया है और नरसंहार हुआ तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा. वह ईरान पर हमला बोलेगा और खामनेई की सत्ता को बदलकर रख देगा. कार्रवाई ऐसी होगी, जिसे ईरान के इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा.

अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि  Midnight Hammer 2.0 पर अमल हुआ तो अमेरिका साइबर-अटैक, अर्थव्यवस्था  पर दबाव और अतिरिक्त प्रतिबंध, बंकर-बस्टर और स्टील्थ हथियार, ड्रोन और उन्नत मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर जैसे हथियारों का इस्तेमाल करेगा.

अमेरिकी संघीय सलाहकार और रक्षा अधिकारियों का साफतौर पर कहना है कि संपूर्ण युद्ध कोई पहला विकल्प नहीं है, लेकिन सीमित हवाई हमले या साइबर ऑपरेशन ज्यादा कारगर साबित होगा. विशेषकर जब ईरान ने अपने एयरस्पेस को संभावित जवाबी कारवाई के डर से बंद भी किया है.

ये हथियार हो सकते हैं 2.0 में इस्तेमाल

अगर डोनाल्ड ट्रंप 'Midnight Hammer 2.0?' को हरी झंडी मिलती है, तो घातक हथियारों का इस्तेमाल हो सकता है. इनमें पहले से ज्यादा एडवांस बंकर-बस्टर और स्टील्थ हथियार जैसे GBU-57 के दूसरी पीढ़ी के संस्करण,

ड्रोन और उन्नत मिसाइल, कम जोखिम के साथ ईरान के सभी नेटवर्क पर  निशाना साधने वाले साइबर डोमेन हमले,  टॉमहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल,  इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर हथियार का इस्तेमाल होगा. ताकि ईरान के रडार और रक्षा प्रणाली को बेअसर कर खामनेई सत्ता परिवर्तन को अंजाम तक पहुंचना संभव हो सके.

कितना गहरा होगा वैश्विक प्रभाव?

अगर ट्रंप 2.0 ऑपरेशन मंजूर करते हैं, तो इससे  मध्य पूर्व में तनाव बढ़ सकता है. रूस, चीन और यूरोपीय देशों के साथ रिश्तों पर असर पड़ सकता है. ईरान भी इसके जवाब में खतरनाक तरीके से बदला ले सकता है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लक्ष्य केवल परमाणु कार्यक्रम को धीमा करना हो, तो सीमित हमले और कूटनीतिक दबाव मिलाकर अधिक सुरक्षित विकल्प बन सकता है.

ऑपरेशन 2.0 का मतलब पहले से ज्यादा सटीक, ज्यादा अदृश्य और ज्यादा तकनीक  पर आधारित ऑपरेशन. खुला युद्ध नहीं, हाई-प्रिसिजन स्ट्राइक, सीमित समय, अधिकतम प्रभाव, सैन्य ठिकानों के साथ कम्युनिकेशन और कमांड सिस्टम पर वार होगा.

स्टील्थ बॉम्बर से देखे बिना वार

स्टील्थ बॉम्बर स्टील्थ प्लेटफॉर्म रडार से बचते हुए ईरान में गहराई तक घुस सकते हैं. इसका मतलब एयर डिफेंस को चकमा, बिना चेतावनी के लक्ष्य पर हमला, जवाबी कार्रवाई का समय बेहद कम में.  

ईरान जमीन के नीचे भी सुरक्षित नहीं

बंकर बस्टर बॉम्ब से हमला होने पर ईरान के कई संवेदनशील ठिकाने जो भूमिगत हैं वे भी नहीं बचेंगे. बंकर बस्टर का मकसद ही यही होता है कि मोटी कंक्रीट और पहाड़ के नीचे बने ठिकाने, कमांड, स्टोरेज और परमाणु इन्फ्रास्ट्रक्चर को सीधा नुकसान पहुंचाना.

मनोवैज्ञानिक बढ़त

इस बार अमेरिका इलेक्ट्रॉनिक हथियार, बिना गोली, सिस्टम ठप किए सबसे खतरनाक पहलू—इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर को अंजाम दे सकता है. यानी ईरान के रडार अंधे हो जाएंगे. उसका पूरा कम्युनिकेशन सिस्टम बर्बाद हो जाएगा. ड्रोन, मिसाइल और एयर डिफेंस निष्क्रिय कर दिए जाएंगे. यह एक ऐसा  युद्ध होगा, जिसमें बम से पहले सिग्नल गिरते हैं.

ईरान के लिए कितना विनाशकारी?

अगर 2.0 होता है, तो असर सिर्फ सैन्य नहीं होगा बल्कि राजनीतिक ठिकानों को झटका दिया जा सकता है. सुरक्षा प्रतिष्ठान की साख पर सवाल उठेंगे, आंतरिक अस्थिरता को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्रीय सहयोगियों पर दबाव बढ़ेगा.

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