भारत से पंगा पड़ा महंगा! डूबने की कगार पर बांग्‍लादेश की टॉप इंडस्‍ट्री, 10 लाख कामगारों पर बेरोजगारी का साया

बांग्लादेश की स्पिनिंग मिल्स अब गंभीर संकट में हैं. भारत से सस्ते यार्न की बाढ़, बढ़ती इन्वेंट्री और ऊर्जा संकट ने उद्योग को अस्थिर बना दिया है. 50 से अधिक मिल्स पहले ही बंद हो चुकी हैं और 1 फरवरी से पूरी इंडस्ट्री बंद होने की संभावना है. इससे लगभग 10 लाख कर्मचारियों की रोज़गार सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है.;

( Image Source:  X/@AskAnshul )
Edited By :  प्रवीण सिंह
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बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्‍तापलट के बाद से भारत के साथ उसके रिश्‍ते लगातार निचले स्‍तर पर जाते जा रहे हैं. दोनों के देशों के खराब होते रिश्‍तों का असर अब वहां की अर्थवयवस्‍था पर भी दिखने लगा है. शेख हसीना के कार्यकाल में जिस इंडस्‍ट्री ने देश में न केवल बड़ी संख्‍या में रोजगार पैदा किया बल्कि जीडीपी को बढ़ाने में भी महत्‍वपूर्ण योगदान दिया, वह आज खतरे में दिख रही है. जी हां, बात हो रही है बांग्‍लादेश की टेक्‍सटाइल इंडस्‍ट्री की जो अब संकट के दौर से गुजर रही है. विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत के साथ खराब रिश्‍ते भी इसकी एक बड़ी वजह हैं. इंडस्ट्री प्रतिनिधियों का कहना है कि अगर तत्काल कदम नहीं उठाए गए तो बड़ी संख्या में फैक्ट्रियां बंद हो सकती हैं और लाखों लोग बेरोजगार हो सकते हैं.

देश की शीर्ष स्पिनिंग मिल्स अब संकट की कगार पर हैं. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, देश भर में 50 से अधिक मिल्स पहले ही बंद हो चुकी हैं और अगर सरकार फ्री यार्न आयात पर छूट को वापस नहीं लेती है, तो 1 फरवरी से पूरे देश में मिल्स बंद होने की संभावना है. बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (BTMA) ने चेतावनी दी है कि निरंतर घाटा, ऊर्जा संकट और बढ़ती इन्वेंट्री ने उद्योग को अस्थिर बना दिया है.

सस्ते यार्न का दबाव

बांग्लादेश में कई स्पिनिंग मिल्स ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर आयातित यार्न पर छूट (bonded facility) वापस नहीं ली गई, तो उद्योग पूरी तरह बंद हो सकता है. BTMA का कहना है कि घरेलू मिल्स इस समय टिकाऊ तरीके से काम नहीं कर पा रही हैं. मिलर्स के मुताबिक, सस्ते विदेशी यार्न की बाढ़, खासकर भारत से, घरेलू उत्पादन को प्रतिस्पर्धा में पीछे धकेल रही है.

बढ़ता स्टॉक और नुकसान

एसोसिएशन का अनुमान है कि अब तक 50 से अधिक मिल्स बंद हो चुकी हैं और 12,000 करोड़ रुपये से अधिक का इन्वेंट्री स्टॉक बन चुका है. 2025 में लगभग 70 करोड़ किलो यार्न का आयात हुआ, जिसमें 78% भारत से आया. मिलर्स का कहना है कि आयात पर शून्य कस्टम ड्यूटी ने घरेलू उद्योग को बर्बाद कर दिया है.

ऊर्जा संकट का असर

लगातार गैस की कमी, बढ़ती दरें और सब्सिडी की अनुपलब्धता ने उत्पादन को आधे स्तर तक घटा दिया. मिलर्स का अनुमान है कि पिछले तीन-चार महीनों में लगभग 2 बिलियन डॉलर का नुकसान हो चुका है.

निर्यातक और भारतीय सप्लायर की प्रतिक्रिया

गारमेंट निर्यातक निरंतर सस्ते यार्न पर निर्भर हैं. उनका कहना है कि स्थानीय यार्न महंगा और गुणवत्ता में भारतीय यार्न से कमजोर है. भारतीय निर्यातक अमित सोती ने इंडिया टुडे को बताया कि अगर bonded यार्न पर छूट रोकी गई तो यह बांग्लादेश के एक्सपोर्ट उद्योग को नुकसान पहुंचाएगा.

नीतिगत चुनौती

विवाद बांग्लादेश के टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग के दो हिस्सों के बीच गहरी खाई दिखा रहा है. स्पिनिंग मिलर्स आयात संरक्षण चाहते हैं, जबकि गारमेंट निर्यातक सस्ते कच्चे माल के लिए दबाव बना रहे हैं. वाणिज्य मंत्रालय ने आयात सुविधा खत्म करने की सिफारिश की है, और अंतरिम सरकार पर निर्णायक कदम उठाने का दबाव बढ़ रहा है.

बांग्लादेश का टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर देश का सबसे बड़ा रोजगारदाता और निर्यात का मुख्य स्त्रोत है. विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर संतुलित नीतिगत निर्णय नहीं लिया गया, तो यह स्टैंडऑफ आर्थिक संकट और लंबे समय तक उद्योग अस्थिरता को जन्म दे सकता है.

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