दिल्ली के पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा से जुड़े थप्पड़ कांड और आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक जरनैल सिंह के खिलाफ दर्ज मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील एपी सिंह ने स्टेट मिरर के वरिष्ठ क्राइम इन्वेस्टिगेशन पत्रकार संजीव चौहान से कानूनी पहलुओं पर बात की. उन्होंने कहा कि थप्पड़ मारने की घटना में पीड़ित की शिकायत पर एनसीआर दर्ज होना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, क्योंकि ऐसे मामले गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं, जबकि जरनैल सिंह के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोपों पर मामला दर्ज किया गया है. एपी सिंह ने यह भी कहा कि यदि पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की ओर से पैसे मांगने या वसूली के आरोप लगाए गए हैं तो उनके सामने आने के समय और परिस्थितियों पर सवाल उठना स्वाभाविक है. उनके मुताबिक, दोनों मामलों की जांच अपने-अपने तथ्यों और सबूतों के आधार पर होनी चाहिए और वायरल वीडियो के साथ अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया जाना जरूरी है. उन्होंने कहा कि जांच के दौरान सामने आने वाले सबूतों के आधार पर एनसीआर में दर्ज मामले की धाराओं में बदलाव भी संभव है. वकील ने यह भी कहा कि अदालत के सामने मंत्री या आम व्यक्ति के लिए अलग-अलग न्याय नहीं होता और दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए. इंटरव्यू में उन्होंने यह राय भी रखी कि अगर किसी आम व्यक्ति ने मंत्री को थप्पड़ मारा होता तो उस पर अधिक गंभीर धाराएं लगने और गिरफ्तारी की संभावना हो सकती थी.