स्टेट मिरर के पत्रकार जीतेंद्र चौहान दिल्ली के यमुना किनारे बेला घाट इलाके में रहने वाले लोगों से बातचीत के जरिए एसआईआर के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटने का मुद्दा उठाया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, इलाके में पहले 729 वोट दर्ज थे, जिनमें से 728 नाम हट गए और सिर्फ एक वोट बचा. स्थानीय लोगों का कहना है कि वे कई वर्षों से यहां रह रहे हैं और पहले भी लगातार मतदान करते आए हैं. कुछ लोगों ने यह भी दावा किया कि एसआईआर के दौरान अधिकारियों ने उनके फॉर्म भरवाए और दस्तावेज देखे, इसके बावजूद वोटर लिस्ट से नाम हटा दिए गए. वहीं रिपोर्ट में चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की ओर से बताया गया कि जिन पते पर जांच के दौरान मतदाता नहीं मिले, उनके नाम हटाने की प्रक्रिया अपनाई गई और पात्र लोग दोबारा फॉर्म भरकर अपना नाम जुड़वा सकते हैं. स्थानीय निवासियों की चिंता सिर्फ वोट कटने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका कहना है कि पुराने दस्तावेज और पहचान से जुड़े रिकॉर्ड प्रभावित होने पर उन्हें भविष्य में सरकारी सुविधाओं और पुनर्वास से जुड़े अधिकारों को लेकर परेशानी हो सकती है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि एसआईआर को लेकर दिल्ली में राजनीतिक बहस तेज है और प्रभावित लोगों की शिकायतें सामने आ रही हैं.