क्रिकेट मैदान पर बल्ला उठाने वाला यह खिलाड़ी सिर्फ रन नहीं बनाता, बल्कि अपनी किस्मत भी खुद गढ़ता है. ईशान किशन की पहचान अब सिर्फ भारतीय टीम के ओपनर के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे लड़के के रूप में है जिसने हालातों से लड़कर नाम बनाया. पटना की गलियों में शुरू हुई यह कहानी रांची के मैदानों से होते हुए अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम तक पहुंची. कभी सीमित साधनों में ट्रेनिंग, कभी गुजारे के लिए छोटे-मोटे काम - और आज करोड़ों की ब्रांड वैल्यू. इस सफर में खेल के साथ-साथ विवादों की आंधी, निजी रिश्तों की चर्चा और शोहरत का दबाव भी जुड़ा. ईशान किशन की जिंदगी सिर्फ क्रिकेट स्कोरकार्ड नहीं, बल्कि जुनून, जोखिम और जज्बातों से लिखी गई स्क्रिप्ट है - जो बताती है कि मैदान सिर्फ बल्ले का नहीं होता, बल्कि जिंदगी की सबसे बड़ी परीक्षा भी वहीं से शुरू होती है.