UGC-शंकराचार्य विवाद को लेकर इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री कौन? बोले- DM आवास पर मुझे बंधक बनाया, अभद्र भाषा बोली गई
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने हाल ही में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ हुई घटना तथा यूजीसी के नए नियमों (2026) के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया. आइए, उनके बारे में विस्तार से जानते हैं...;
UGC कानून के विरोध में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा
(Image Source: X@VoiceOfBrahmins )Who is Alankar Agnihotri: उत्तर प्रदेश प्रशासनिक महकमे में सोमवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. वे 27 मई 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट बने थे. उनका कहना है कि वह शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ हुई कथित घटना से आहत हैं और यूजीसी के नए कानून का विरोध करते हैं.
इस्तीफे के साथ ही अलंकार अग्निहोत्री की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसमें वह पोस्टर लेकर खड़े नजर आ रहे हैं. पोस्टर पर लिखा है- “#UGC Rollback… काला कानून वापस लो, शंकराचार्य और संतों को यह अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान” इस तस्वीर के सामने आते ही प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई.
डीएम आवास में दो घंटे तक बंधक बनाए रखा गया:अलंकार अग्निहोत्री
अलंकार अग्निहोत्री ने एक गंभीर आरोप लगाया है. उनका कहना है कि उन्हें डीएमआवास में 2 घंटे बंधक रखा गया, उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया और 2 घंटे में आवास खाली कराने का निर्देश दिया गया.
कौन हैं अलंकार अग्निहोत्री?
- अलंकार अग्निहोत्री उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट और 2019 बैच के पीसीएस (Uttar Pradesh Provincial Civil Service) अधिकारी हैं. उन्होंने सीधे पहली बार प्रयास में यूपीपीसीएस परीक्षा पास कर सिविल सेवा में प्रवेश किया था, जो उनकी मेहनत और लगन का संकेत है.
- कानपुर नगर के मूल निवासी अलंकार का चयन 2019 में डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ था. उन्होंने इससे पहले उन्नाव, बलरामपुर, एटा और लखनऊ में अपनी सेवाएं दी हैं.
- अलंकार जब 10 साल के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया. इससे बड़ा बेटा होने के नाते परिवार चलाने का बोझ उन पर आ गया, लेकिन उनकी मां गीता अग्निहोत्री ने कड़ी मेहनत करते हुए उनकी परवरिश की और उन्हें अच्छी शिक्षा दी.
- कानपुर में 12वीं तक की पढ़ाई करने के बाद अलंकार ने IIT BHU से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में B.Tech की डिग्री हासिल की, जिसके बाद उन्होंने एलएलबी (कानून) की पढ़ाई भी की.
- अलंकार ने आईटी सेक्टर में लगभग 10 साल तक एक कंसल्टेंट के रूप में नौकरी की. जब उन्हें लगा कि पारिवारिक जिम्मेदारियों को संभाल लिया है, तो उन्होंने प्राइवेट नौकरी छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी शुरू की.
- अलंकार अग्निहोत्री ने पहले ही प्रयास में UP PCS परीक्षा उत्तीर्ण की. इसके बाद उन्होंने लखनऊ, उन्नाव, बलरामपुर, एटा जैसे जिलों में डिप्टी कलेक्टर/एसडीएम के रूप में काम किया. मई 2025 में उन्हें बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात किया गया.
‘पुनरुत्थान बरेली परिवार’ नाम से बनाया था सोशल मीडिया ग्रुप
बरेली में तैनाती के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने ‘पुनरुत्थान बरेली परिवार’ नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था, जिसमें इस समय 529 सदस्य जुड़े हुए हैं. सोमवार को उनके इस्तीफे की खबर सबसे पहले इसी ग्रुप पर वायरल हुई. ग्रुप में लोगों की प्रतिक्रियाएं बंटी हुई दिखीं. कुछ लोगों ने हिंदुत्व के लिए इस्तीफे को सही कदम बताया. कुछ ने कहा कि संवैधानिक पद पर रहकर लड़ाई लड़ना ज्यादा जरूरी था.
यूजीसी के नए नियम छात्रों के लिए खतरनाक: अलंकार अग्निहोत्री
अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि यूजीसी के नए नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए खतरनाक हैं. उनका आरोप है, सामान्य वर्ग के छात्रों को स्वघोषित अपराधी मान लिया गया है. यह नियम करियर और निजी जीवन को जोखिम में डाल सकते हैं. इससे शोषण और विषमता बढ़ेगी. उन्होंने ब्राह्मण समाज के सांसदों और विधायकों पर भी निशाना साधते हुए कहा, “वे कॉरपोरेट कंपनी के कर्मचारियों की तरह काम कर रहे हैं. जब तक सीईओ नहीं बोलेगा, उनके हाथ नहीं हिलेंगे.” उन्होंने ब्राह्मण सांसदों और विधायकों से इस्तीफा देकर समाज के साथ खड़े होने की अपील की.
इस्तीफे में क्या लिखा अलंकार अग्निहोत्री ने?
अपने इस्तीफे में अलंकार अग्निहोत्री ने लिखा, “प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या स्नान के समय ज्योतिष पीठ ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद एवं उनके शिष्यों, बटुक ब्राह्मणों के साथ स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा मारपीट की गई.”उन्होंने आरोप लगाया कि बटुक ब्राह्मण को जमीन पर गिराकर पीटा गया और उनकी शिखा पकड़कर घसीटा गया, जो धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक है.
पत्र में अलंकार अग्निहोत्री ने लिखा, “मैं स्वयं ब्राह्मण वर्ण से हूं. इस घटना से स्पष्ट है कि स्थानीय प्रशासन द्वारा ब्राह्मणों का अपमान किया गया है.” उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी घटनाएं सरकार के दौर में होना एक साधारण ब्राह्मण की आत्मा को कंपा देता है, और इससे यह प्रतीत होता है कि राज्य सरकार ब्राह्मण विरोधी विचारधारा के साथ काम कर रही है.
क्या चुनाव लड़ेंगे अलंकार अग्निहोत्री?
इस्तीफे के बाद उनके सरकारी आवास पर बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के लोग पहुंचने लगे. इस दौरान न्यूज़18 से बातचीत में उन्होंने कहा, “प्रशासनिक सेवा में बड़ी मेहनत से लोग चयनित होते हैं, लेकिन जब कोई पीड़ित होकर बाहर निकलता है, तो बहुत पीड़ा होती है.” चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा, “यह फैसला समाज करेगा. सभी लोग बैठकर आगे की रणनीति तय करेंगे.” इस दौरान एक ब्राह्मण संगठन के कार्यकर्ता ने विरोध स्वरूप कपड़े उतारकर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की.