Silent Cancer Alert: सिर्फ सूजन समझकर टाल दिया… निकला खतरनाक और रेयर कैंसर! 3 साल के बच्चे का मामला चौंकाने वाला
यूपी के बुलंदशहर जिले के एक तीन वर्षीय बच्चे में कोहनी की सूजन बाद में एपिथेलियोइड सारकोमा निकली, जो बेहद दुर्लभ और आक्रामक सॉफ्ट टिशू कैंसर साबित हुआ. नोएडा के डॉक्टरों के अनुसार समय पर पहचान और कीमोथेरेपी से स्थिति नियंत्रित की जा सकी.;
कभी-कभी बच्चों के शरीर पर दिखने वाली एक छोटी-सी सूजन या गांठ को माता-पिता सामान्य चोट, कीड़े के काटने या हल्की इंफेक्शन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से सामने आया एक मामला सभी कि लिए चेतावनी है कि हर सूजन मामूली नहीं होती. तीन साल के मासूम की कोहनी पर आई हल्की सूजन को परिवार ने पहले साधारण समझा, पर धीरे-धीरे बढ़ती दर्द और चलने-फिरने में दिक्कत के बाद जब जांच हुई तो सामने आया एक चौंकाने वाला सच. यह था एपिथेलियोइड सारकोमा, सॉफ्ट टिशू का बेहद रेयर और आक्रामक कैंसर.
डॉक्टरों के मुताबिक, यह कैंसर कुल सॉफ्ट टिशू सारकोमा के 1% से भी कम मामलों में पाया जाता है और इस उम्र के बच्चों में तो और भी दुर्लभ है. समय पर पहचान न होती तो बीमारी और तेजी से फैल सकती थी। यह मामला हर पैरेंट्स के लिए अलर्ट है. बच्चों में लंबे समय तक रहने वाली सूजन, बढ़ती गांठ या लगातार दर्द को कभी हल्के में न लें, क्योंकि कभी-कभी ‘साइलेंट’ दिखने वाला लक्षण अंदर से बेहद खतरनाक हो सकता है.
बुलंदशहर के 3 साल के बच्चे का मामला क्यों चौंकाने वाला है?
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के तीन वर्षीय बच्चे में कोहनी के पास सूजन एक साल तक बनी रही. बाद में जांच में यह पुष्टि हुई कि यह एपिथेलियोइड सारकोमा है, जो फेफड़ों तक फैल चुका था. इसका इलाज ग्रेटर नोएडा स्थित चर्चित में किया गया. मासूम का इलाज जारी है.
पीड़ित मासूम के परिजनों के अनुसार, सूजन पहली बार लगभग एक साल पहले दिखाई दी थी और धीरे-धीरे ज्यादा दर्दनाक होती गई, जिससे बच्चे के चलने-फिरने में कमी आने पर मेडिकल जांच की जरूरत पड़ी. बच्चे को सितंबर में ग्रेटर नोएडा के फोर्टिस ले जाया गया, और छह महीने तक इलाज चला. डायग्नोस्टिक टेस्टिंग से कोहनी के जोड़ में ट्यूमर होने की पुष्टि हुई. आगे के स्कैन से पता चला कि यह फेफड़ों में जल्दी फैल गया है, जिससे तुरंत सर्जरी को पहले सुरक्षित ऑप्शन के तौर पर खारिज कर दिया गया.
एपिथेलियोइड सारकोमा क्या है?
एपिथेलियोइड सारकोमा एक दुर्लभ और आक्रामक सॉफ्ट टिशू ट्यूमर है, जो कुल सॉफ्ट टिशू सारकोमा के 1% से भी कम मामलों में पाया जाता है. यह आमतौर पर किशोरों और युवाओं में देखा जाता है, लेकिन छोटे बच्चों में यह बेहद कम होता है.
बच्चों में सूजन कब बन सकती है कैंसर का संकेत?
डॉक्टरों के अनुसार अगर बच्चे में 2 से 3 हफ्तों से ज्यादा सूजन बनी रहे और गांठ लगातार बढ़ने का संकेत मिले, साथ ही दर्द के साथ सूजन हो, बच्चों को चलने-फिरने में दिक्कत हो, बिना वजह वजन घटे तो यह रेयरेस्ट एपिथेलियोइड सारकोमा टिशू कैंसर हो सकता है.
एपिथेलियोइड सारकोमा के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
त्वचा के नीचे कठोर गांठ, धीरे-धीरे बढ़ती सूजन, शुरुआत में कम दर्द, बाद में तीव्र दर्द, उन्नत अवस्था में शरीर के अन्य हिस्सों (जैसे फेफड़े) में फैलाव व अन्य परेशानी शामिल होते हैं.
क्या यह कैंसर तेजी से फैलता है?
एपिथेलियोइड सारकोमा को एग्रेसिव कैंसर माना जाता है. अगर समय पर पहचान न हो, तो यह फेफड़ों सहित अन्य अंगों में मेटास्टेसिस कर सकता है.
इलाज क्या है? क्या रिकवरी संभव है?
एपिथेलियोइड सारकोमा कैंसर का इलाज बायोप्सी और स्कैन से पुष्टि है. इससे पीड़ित मरीज चाहे वो तीन साल का बच्चा ही क्यों न हो, उसे कीमोथेरेपी देना जरूरी होता है. स्थिति गंभीर है तो सर्जरी भी करना पड़ता है. डॉक्टरों का कहना है कि समय पर डायग्नोसिस और इलाज से रिकवरी की संभावना बेहतर हो जाती है.
माता-पिता के लिए डॉक्टरों की खास चेतावनी कैसे?
बच्चों में लंबे समय तक रहने वाली सूजन, लगातार दर्द या शारीरिक बदलावों की तुरंत जांच कराएं. सॉफ्ट टिशू ट्यूमर दुर्लभ हैं, लेकिन चुपचाप बढ़ सकते हैं.
चेतावनी : ‘साधारण सूजन’ को कभी हल्के में न लें!
बुलंदशहर के मासूम का यह मामला इस बात का सबूत है कि बच्चों के शरीर में किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है. सतर्कता, समय पर जांच और विशेषज्ञ सलाह ही बच्चों के स्वास्थ्य की सबसे बड़ी सुरक्षा है.