प्रयागराज के फाफामऊ में कैसे हुआ इतना बड़ा हादसा? मजदूरों के लिए लंच टाइम बना लाइफ सेवियर; देखें दिल दहलाने वाले Video
प्रयागराज के फाफामऊ में कोल्ड स्टोरेज ढहने से 4 मजदूरों की मौत और 17 घायल हो गए. धमाके और अमोनिया गैस रिसाव के बीच राहत-बचाव कार्य दूसरे दिन भी जारी है.
प्रयागराज कोल्ड स्टोरेज हादसा: संगम नगरी प्रयागराज के फाफामऊ इलाके में सोमवार को जो भयानक हादसा हुआ, उसने पूरे उत्तर प्रदेश को गहरे सदमे में डाल दिया है. मंगलवार को दूसरे दिन भी बचाव कार्य पूरे जोर-शोर से चल रहा है. जेसीबी मशीनें और बुलडोजर लगातार मलबे को हटा रहे हैं. कंक्रीट के बड़े-बड़े टुकड़ों को एक-एक करके हटाकर मलबे के नीचे दबे हुए लोगों को निकालने की कोशिश की जा रही है. अब तक इस दुखद हादसे में 4 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. जबकि 17 अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं और वे प्रयागराज के स्वरूपरानी नेहरू (SRN) अस्पताल तथा बेली अस्पताल में डॉक्टरों की देखरेख में अपनी जान की लड़ाई लड़ रहे हैं.
हादसा कैसे हुआ?
सोमवार दोपहर करीब 1:30 बजे का समय था. पूरा इलाका अपने रोजमर्रा के काम में व्यस्त था। अचानक एक बहुत तेज धमाका हुआ. चश्मदीदों के अनुसार, धमाके की आवाज इतनी जोरदार थी कि लग रहा था जैसे कोई बहुत बड़ा बम फट गया हो. धमाके के साथ ही 27 साल पुरानी जर्जर कोल्ड स्टोरेज की इमारत का एक बड़ा हिस्सा जोर से भरभराकर नीचे गिर पड़ा. चारों तरफ घनी धूल का गुबार छा गया. साथ ही अमोनिया गैस का तेज रिसाव भी शुरू हो गया, जिससे हवा में खौफनाक स्थिति बन गई.
उस समय कितने लोग थे वहां?
हादसे के समय कोल्ड स्टोरेज में लगभग 110 मजदूर काम कर रहे थे. लेकिन किस्मत से हादसा लंच टाइम दोपहर 1 से 2 बजे के दौरान हुआ. ज्यादातर मजदूर खाना खाकर बाहर निकल गए थे. कुछ टहलने, कुछ चाय पीने और कुछ सुर्ती या बीड़ी पीने चले गए थे. केवल 25-30 मजदूर ही खाना खाकर वहीं ठंडी जगह पर आराम करने के लिए लेटे हुए थे. इन्हीं बदनसीब लोगों पर अचानक छत और दीवारें ढह पड़ीं. चश्मदीद मजदूरों का कहना है कि अगर यह हादसा लंच टाइम के बाहर होता, तो मरने वालों की संख्या सौ से भी ज्यादा हो सकती थी.
मासूम कार्तिक और उसकी मां रंजना की करुण कहानी
इस हादसे की सबसे दिल दहला देने वाली कहानी 3 साल के छोटे से मासूम कार्तिक उर्फ गुड्डू की है. उसकी मां रंजना कोल्ड स्टोरेज परिसर में कपड़े धोने का काम करती थी. धमाके की आवाज सुनते ही रंजना ने अपनी जान की परवाह किए बिना मलबे के अंदर कूदकर अपने बेटे को बाहर निकाला. छोटा कार्तिक इस समय अस्पताल में बेहद गंभीर हालत में भर्ती है. रंजना पहले ही अपने पति को खो चुकी है. अब उसका इकलौता सहारा भी अस्पताल के बेड पर जिंदगी और मौत से जूझ रहा है. मां और बेटे दोनों की सिसकियां देखकर किसी का भी दिल पसीज जाए.
मालिक पर कार्रवाई
कोल्ड स्टोरेज के मालिक समाजवादी पार्टी के बड़े नेता और पूर्व पशुपालन मंत्री अंसार अहमद उर्फ पहलवान हैं. पुलिस ने इस मामले में सख्त एक्शन लिया है. फाफामऊ थाने में पूर्व मंत्री अंसार अहमद, उनके बेटों और मैनेजर सहित कुल 12 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है. इसमें 7 लोगों के नाम साफ लिखे गए हैं और 5 अज्ञात आरोपियों के नाम हैं. पुलिस ने अंसार अहमद के दो भतीजों समेत 4 लोगों को हिरासत में ले लिया है. मुख्य आरोपी पूर्व मंत्री अंसार अहमद की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है.
सरकार की मदद
इस हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुख व्यक्त किया है. सरकार की ओर से मृतकों के परिवार वालों को 2-2 लाख रुपये की सहायता देने और गंभीर रूप से घायल मजदूरों को 50-50 हजार रुपये देने का ऐलान किया गया है. यह हादसा न सिर्फ एक इमारत के गिरने की घटना है, बल्कि लापरवाही और जर्जर इमारतों की वजह से मजदूरों की जान पर बन रहे खतरे की एक और मिसाल है. उम्मीद है कि बचाव कार्य जल्द पूरा होगा और घायलों को जल्द से जल्द ठीक होने में मदद मिलेगी.
हादसे में मृतकों की लिस्ट
प्रयागराज के फाफामऊ इलाके में सोमवार को हुए भयानक कोल्ड स्टोरेज हादसे में अब तक 4 मजदूरों की मौत हो चुकी है. पुलिस ने सभी मृतकों की पहचान कर ली है. मृतकों के नाम इस प्रकार हैं:
ज्योविश कुमार (उम्र 22 वर्ष)
निवासी: सहरसा, बिहार
जगदीश कुमार (उम्र 42 वर्ष)
निवासी: चंदापुर, फाफामऊ, प्रयागराज (स्थानीय निवासी)
मनोज उर्फ बिल्लर चौधरी (उम्र 36 वर्ष)
निवासी: सहरसा, बिहार
मसिन्दर कुमार (उम्र 19 वर्ष)
निवासी: सहरसा, बिहार
ये चारों मजदूर मलबे में दबने से अपनी जान गंवा बैठे. इनमें से तीन मजदूर बिहार के सहरसा जिले के रहने वाले थे, जबकि एक स्थानीय निवासी था. हादसे में 12 से 17 अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका इलाज प्रयागराज के SRN और बेली अस्पताल में चल रहा है. कई घायलों की हालत अभी भी नाजुक बताई जा रही है. यह हादसा उन गरीब मजदूरों के लिए बहुत बड़ा सदमा है, जो अपनी रोजी-रोटी के लिए दूर-दूर से काम करने आते हैं. सरकार की ओर से मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि देने का ऐलान किया गया है.