तलाक पर बजा ढोल! गाजे-बाजे से रिटायर्ड जज पिता बेटी को लाए घर वापस, दिया सोसाइटी में स्ट्रांग मैसेज

मेरठ में एक रिटायर्ड जज ने तलाक के बाद अपनी बेटी का ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत कर समाज को नई दिशा दी. यह घटना महिलाओं के आत्मसम्मान, साहस और परिवार के समर्थन की मिसाल बन गई है.

( Image Source:  X: @jeetusp )
Edited By :  रूपाली राय
Updated On : 5 April 2026 6:00 AM IST

शनिवार को उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में एक बहुत ही खास और दिल को छू लेने वाला नजारा देखने को मिला. रिटायर्ड जज ज्ञानेंद्र शर्मा ने अपनी इकलौती बेटी प्रणिता शर्मा के तलाक हो जाने के बाद उसे ढोल-नगाड़ों, फूलों और पूरे सम्मान के साथ घर वापस लाए. इस घटना ने समाज की पुरानी और सड़ी-गली सोच को पूरी तरह से चुनौती दी है. आमतौर पर तलाक को समाज में शर्म की बात माना जाता है, खासकर लड़कियों के लिए. लेकिन ज्ञानेंद्र शर्मा जी ने ये साबित कर दिया कि बेटी कोई बोझ या सामान नहीं है. उन्होंने अपनी बेटी के आत्मसम्मान और खुशी को सबसे ऊपर रखा.

क्या था पूरा मामला?

प्रणिता शर्मा शास्त्रीनगर, मेरठ की रहने वाली हैं. उनका शादी 14 दिसंबर 2018 को शाहजहांपुर के मेजर गौरव अग्निहोत्री के साथ हुई थी. शादी के शुरुआती दिनों में सब कुछ ठीक था, लेकिन कुछ समय बाद ही ससुराल वालों का व्यवहार बदलने लगा. पिछले 7-8 सालों से प्रणिता मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से बहुत ज्यादा प्रताड़ना सह रही थीं. उनके एक बेटा भी है, फिर भी ससुराल पक्ष का व्यवहार नहीं बदला. आखिरकार प्रणिता ने मेरठ फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल कर दी. शनिवार को कोर्ट ने उनका तलाक मंजूर कर दिया. फैसला सुनते ही पूरा परिवार खुशी-खुशी मनाने लगा. 

पिता का मैसेज 

रिटायर्ड जज ज्ञानेंद्र शर्मा ने बहुत ही मजबूत शब्दों में कहा, 'मेरी बेटी कोई सामान नहीं है. वह मेरे परिवार का हिस्सा है. मैंने ससुराल वालों से न तो कोई एलीमनी (भत्ता) मांगा और न ही कोई सामान वापस लिया. मेरी बेटी जब शादी के समय बाजे-गाजे के साथ विदा हुई थी, तो उसकी वापसी भी उसी सम्मान और खुशी के साथ होनी चाहिए.' उन्होंने अपनी बेटी के लिए पूरा समर्थन जताया और समाज को नई मिसाल दी. 

प्रणिता का संदेश दूसरी महिलाओं के लिए

प्रणिता शर्मा मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन कर चुकी हैं और अभी फाइनेंस डायरेक्टर के पद पर काम कर रही हैं. उन्होंने तलाक के बाद दूसरी महिलाओं को एक बहुत महत्वपूर्ण सलाह दी है. शादी से पहले लड़कियों को अच्छी पढ़ाई करनी चाहिए और आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनना चाहिए. किसी भी तरह की प्रताड़ना या हिंसा बर्दाश्त नहीं करनी चाहिए. चुप रहने की बजाय अपने लिए आवाज उठानी चाहिए. प्रणिता ने बताया कि साल 2022 में उनके भाई की मौत के बाद वे बहुत टूट गई थीं, लेकिन माता-पिता का अटूट प्यार और सहयोग मिला, जिसकी वजह से वे फिर से मजबूत होकर खड़ी हुईं. यह घटना उन सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है जो मुश्किल हालात में फंसी हुई हैं. यह दिखाता है कि सही समर्थन और साहस के साथ महिलाएं अपनी जिंदगी को फिर से नई शुरुआत दे सकती हैं. 

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