संगम तट पर महाभारत! मौनी अमावस्या स्नान के दौरान हंगामा, दूसरे दिन भी अनशन पर शंकराचार्य, शिष्य पहुंचे अस्पताल- Top Updates

प्रयागराज के संगम तट पर मौनी अमावस्या स्नान के दौरान उस वक्त हंगामा मच गया, जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हो गई. इस दौरान कई शिष्य घायल हुए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया. घटना के बाद शंकराचार्य धरने पर बैठ गए और प्रशासन पर दुर्व्यवहार के आरोप लगाए, जबकि प्रशासन ने भारी भीड़ और सुरक्षा कारणों से लगाए गए प्रतिबंधों को सही ठहराया.;

( Image Source:  @jyotirmathah-X )
Edited By :  सागर द्विवेदी
Updated On : 19 Jan 2026 11:25 AM IST

प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या स्नान पर्व के दौरान उस वक्त बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब संगम नोज के पास शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों और पुलिस के बीच धक्कामुक्की हो गई. इस हंगामे में शंकराचार्य के 12 समर्थक घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल भेजा गया. घटना के बाद संत समाज में आक्रोश फैल गया और मामला सियासी रंग भी लेने लगा.

हंगामे के बाद देर शाम शंकराचार्य त्रिवेणी मार्ग स्थित अपने शिविर के बाहर शिष्यों के साथ अन्न-जल त्याग कर धरने पर बैठ गए. उन्होंने प्रशासन पर जानबूझकर संगम स्नान से रोकने और साधु-संतों के साथ मारपीट का आरोप लगाया. वहीं, दिन में कांग्रेस कमेटी के महासचिव विवेकानंद पाठक और देर रात पूर्व विधायक अनुग्रहण नारायण सिंह शंकराचार्य से मिलने पहुंचे, जिससे सियासी हलचल और तेज हो गई.

धक्कामुक्की में 12 घायल, तीन को अस्पताल में भर्ती

घायलों में सात से आठ शिष्यों को पैर, हाथ, कमर और चेहरे में चोटें आईं. डॉक्टरों ने सभी को भर्ती होने की सलाह दी, लेकिन केवल तीन शिष्य ही एसआरएन अस्पताल में भर्ती हुए. भर्ती होने वालों में शिव शक्ति, दंगल सिंह और डॉ. दुर्गा प्रसाद पचौरी शामिल हैं. शिव शक्ति और दुर्गा प्रसाद पचौरी को कमर में चोट आई है, जबकि दंगल सिंह के पैर में गंभीर चोट बताई गई है. तीनों ने पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया है. अस्पताल के ईएमओ डॉ. सत्य प्रकाश के मुताबिक, “सोमवार को एक्स-रे रिपोर्ट आने के बाद ही चोटों की गंभीरता साफ हो पाएगी.”

कंप्यूटर बाबा का विरोध, रथ के सामने लेटकर प्रदर्शन

शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र ने आरोप लगाया कि “योगीराज के अनुसार प्रशासन ने साधु-संतों को पीटा है, जो निंदनीय है.” धरने के दौरान कंप्यूटर बाबा रथ के सामने जाकर लेट गए और भावुक होते हुए कहा कि “जब तक प्रशासन शंकराचार्य से क्षमा याचना नहीं करेगा, तब तक हम यहां से नहीं हटेंगे.” देर शाम तक शंकराचार्य का धरना जारी रहा.

संत समाज में मतभेद, परंपरा पर उठे सवाल

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने कहा कि 'माघ मेले में किसी भी नई धार्मिक परंपरा की शुरुआत कदाचित उचित और शास्त्र सम्मत नहीं है. जिस आयोजन में संगम में करोड़ों लोग पुण्य स्नान के लिए एकत्र हों, वहां पालकी या रथ ले जाकर अव्यवस्था पैदा करना सर्वथा अनुचित है.' उन्होंने यह भी कहा कि साधु-संत इस माघ मेले को मिनी कुंभ मान रहे हैं, इसलिए व्यवस्था में संतों को सहयोग देना चाहिए, लेकिन भीड़ के बीच ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़े.

परमहंस आश्रम टीकरमाफी के कट्टर स्वामी ने कहा कि 'संतों के साथ हुई घटना की निंदा करता हूं. शंकराचार्य भगवान कहे गए हैं, उनके शिष्यों से धक्कामुक्की करना गलत है, लेकिन शंकराचार्य का धरने पर बैठना उनका कार्य नहीं है. जुलूस के साथ स्नान के लिए अनुमति लेनी चाहिए थी.” स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी टीकरमाफी ने भी कहा कि हम पांच दशक से देख रहे हैं कि कोई शंकराचार्य रथ या पालकी पर सवार होकर स्नान करने नहीं आए. यह परंपरा नहीं है और ऐसा नहीं होना चाहिए.'

'प्रशासन आकर माफी मांगे'- शंकराचार्य

हंगामे के बाद शंकराचार्य ने शिविर के सामने धरने पर बैठते हुए कहा कि 'प्रशासन ने जानबूझकर मुझे स्नान करने से रोका. मैंने अपनी आंखों से देखा कि पुलिस के बड़े-बड़े अधिकारी साधु-संतों को पीट रहे थे. संत समाज इसे बर्दाश्त नहीं करेगा. मेरी मांग है कि प्रशासन के लोग यहां आकर माफी मांगें.”

शिष्यों ने लगाया दुर्व्यवहार का आरोप

शंकराचार्य के शिष्य स्वामी वैष्णानंद, प्रकाश पारिक, रजनीश दुबे और बलराम तिवारी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया, धक्के देते हुए ले जाया गया और घंटों बेवजह बैठाकर रखा गया.

प्रशासन का पक्ष: “अव्यवस्था फैलाने की इजाजत नहीं”

दरअसल, मौनी अमावस्या के दिन पालकी और शिष्यों के साथ संगम स्नान की अनुमति न मिलने पर विवाद शुरू हुआ था. संगम नोज पर भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने शंकराचार्य को सीमित संख्या में पैदल जाकर स्नान करने का विकल्प दिया था, लेकिन वे इस पर सहमत नहीं हुए. प्रशासन का कहना है कि उस दिन करीब 4.52 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया, ऐसे में सुरक्षा और व्यवस्था सर्वोपरि थी. प्रशासन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कहा कि वे सभी साधु-संतों और श्रद्धालुओं का सम्मान करते हैं, लेकिन किसी को भी अव्यवस्था फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

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