अब Aggresive मोड में Iran, बारूद के गुबार में खो जाएंगे अमेरिका और इजरायल- तबाही का नया प्लान Decode

ईरान ने 1000Kg वारहेड मिसाइलों से हमले का इशारा दिया है. एक्सपर्ट के मुताबिक इससे अमेरिका और इजरायल की एयर डिफेंस रणनीति पर भारी दबाव पड़ सकता है. आइए जानते हैं तबाही के नए प्लान का Decode.

( Image Source:  Sora_ AI )
By :  सागर द्विवेदी
Updated On : 10 March 2026 6:35 PM IST

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच ईरान ने ऐसा संकेत दिया है जिसने अमेरिका और इजरायल की सैन्य रणनीति को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक वरिष्ठ कमांडर ने एलान किया है कि अब ईरान 1000 किलोग्राम या उससे ज्यादा वारहेड वाली मिसाइलों से ही हमला करेगा. रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक यह फैसला युद्ध के तरीके में बड़ा बदलाव है, क्योंकि इससे हर मिसाइल का ब्लास्ट रेडियस, मारक क्षमता और विनाशकारी प्रभाव पहले से कई गुना बढ़ जाएगा.

विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सिर्फ सैन्य रणनीति नहीं बल्कि युद्ध के पूरे 'इकोनॉमिक्स' को बदलने की कोशिश है. अब तक ईरान सस्ते ड्रोन और मिसाइलों की बड़ी संख्या से दुश्मन की एयर डिफेंस को थकाने की रणनीति अपनाता था, लेकिन अब वह कम संख्या में लेकिन अत्यधिक विनाशकारी मिसाइलों के जरिए सीधे बड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की तैयारी में दिख रहा है.

क्या अब ईरान ज्यादा शक्तिशाली मिसाइलों से हमला करेगा?

लेबनान के ब्रॉडकास्टर Al Mayadeen के हवाले से ब्रिगेडियर जनरल Majid Mousavi ने कहा कि अब तक जिन हमलों में अमेरिकी और इजरायली सैन्य ठिकानों के साथ क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया था, उनकी तीव्रता और दायरा आगे और बढ़ेगा. इन हमलों में Dubai International Airport और सऊदी अरब की Ras Tanura Refinery जैसे महत्वपूर्ण ढांचों का जिक्र किया गया. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह संकेत है कि ईरान अब युद्ध के नए सामरिक चरण में प्रवेश कर चुका है.

क्या ईरान की रणनीति बदल गई है?

सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि ईरान अब पहले की तरह सिर्फ सस्ते लेकिन घातक Shahed-131 और Shahed-136 ड्रोन की लहरें भेजकर दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली को थकाने की रणनीति पर निर्भर नहीं रहेगा. अब ईरान की रणनीति 'पेनिट्रेशन स्ट्राइक' की है. यानी कम संख्या में लेकिन ज्यादा तेज और भारी वारहेड वाली मिसाइलों से हमला कर दुश्मन के एयरबेस, भूमिगत कमांड सेंटर और मजबूत सैन्य ढांचों को निशाना बनाना.

क्या यह युद्ध के 'इकोनॉमिक्स' को बदलने की कोशिश है?

जियोपॉलिटिकल विश्लेषक Shanaka Anselm Perera ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ईरान का यह कदम युद्ध के आर्थिक समीकरण को बदल सकता है. उनके मुताबिक जब किसी मिसाइल का वारहेड एक टन का होता है, तो उसे रोकने में नाकाम रहने की कीमत दोगुनी हो जाती है, क्योंकि टकराने पर उसका विनाशकारी दायरा भी दोगुना हो जाता है… यानी हर चूक पहले से दो गुना ज्यादा तबाही ला सकती है.' यानी अगर ऐसी मिसाइल को इंटरसेप्ट नहीं किया गया तो उसका नुकसान पहले की तुलना में कई गुना ज्यादा होगा.

क्या ईरान के पास इतना बड़ा मिसाइल भंडार है?

वॉशिंगटन स्थित Center for Strategic and International Studies के अनुसार ईरान के पास मिडिल ईस्ट का सबसे बड़ा और विविध मिसाइल भंडार है.

इसमें कई अत्याधुनिक मिसाइलें शामिल हैं-

  • Soumar Cruise Missile – जिसकी अनुमानित रेंज लगभग 3000 किलोमीटर बताई जाती है
  • Sejjil Ballistic Missile – करीब 2000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम
  • Khorramshahr MRBM – 2000 से 3000 किलोमीटर की रेंज और 1800 किलोग्राम तक पेलोड क्षमता
  • Kheibar Shekan Missile – ठोस ईंधन वाली मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल

क्या पहले ईरान ‘War of Attrition’ की रणनीति अपना रहा था?

युद्ध के शुरुआती चरण में ईरान की रणनीति दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली को लगातार हमलों से थकाने की थी. कम कीमत वाले Shahed ड्रोन और मिसाइलों की बड़ी संख्या से हमला कर वह अमेरिका और उसके सहयोगियों को महंगे इंटरसेप्टर मिसाइल इस्तेमाल करने पर मजबूर कर रहा था.

उदाहरण के तौर पर-

  • Patriot Missile System – लगभग 4 मिलियन डॉलर प्रति मिसाइल
  • THAAD इंटरसेप्टर – लगभग 12 मिलियन डॉलर
  • Arrow-3 मिसाइल – करीब 3 मिलियन डॉलर
  • जबकि एक Shahed ड्रोन की कीमत करीब 50,000 डॉलर बताई जाती है.

क्या अब भारी मिसाइलें इंटरसेप्शन को और मुश्किल बनाएंगी?

विशेषज्ञों के मुताबिक अब जब भारी वारहेड वाली मिसाइलें इस्तेमाल होंगी तो एयर डिफेंस सिस्टम के सामने चुनौती और बढ़ जाएगी. Perera के अनुसार 'रक्षा करने वाले पक्ष को अब हर आने वाली मिसाइल को निष्क्रिय करने की समान संभावना बनाए रखने के लिए पहले की तुलना में ज्यादा इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल करना पड़ेगा.' यानी एक मिसाइल को रोकने के लिए पहले से ज्यादा इंटरसेप्टर मिसाइलें लगानी पड़ सकती हैं.

क्या ईरान की नई रणनीति युद्ध की दिशा बदल सकती है?

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि अगर ईरान वास्तव में 1000 किलोग्राम से ज्यादा वारहेड वाली मिसाइलों का इस्तेमाल शुरू करता है तो इससे अमेरिका, इजरायल और खाड़ी देशों की एयर डिफेंस रणनीति पर भारी दबाव पड़ सकता है. Perera ने चेतावनी देते हुए कहा कि 'आईआरजीसी अब संख्या और वजन में से किसी एक को चुन नहीं रहा है। वह अब दोनों का एक साथ इस्तेमाल कर रहा है.' यानी ईरान अब एक साथ संख्या और ताकत दोनों का इस्तेमाल कर सकता है. यही वजह है कि विशेषज्ञ मान रहे हैं कि आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट का यह युद्ध और ज्यादा खतरनाक और विनाशकारी रूप ले सकता है.

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