आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के बाद बिजनौर के सस्पेंड दारोगा और महिला कांस्टेबल ने कर ली शादी? नया VIDEO जारी कर बताई पूरी कहानी
बिजनौर के निलंबित इंस्पेक्टर नीरज तोमर और महिला कांस्टेबल पिंकी सैनी का नया वीडियो वायरल है. क्या दोनों ने शादी कर ली? जानिए वीडियो में क्या कहा.
उत्तर प्रदेश के बिजनौर में इंस्पेक्टर नीरज तोमर और महिला कांस्टेबल पिंकी सैनी से जुड़ा मामला लगातार चर्चा में है. बढ़ापुर थाने के प्रभारी पद से निलंबन की कार्रवाई के कुछ दिन बाद अब दोनों का एक नया वीडियो सामने आया है. वीडियो में दोनों मंदिर में एक-दूसरे को जीवनसाथी स्वीकार करने की बात कहते नजर आ रहे हैं. इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कथित आपत्तिजनक वीडियो के विवाद के बीच दोनों के रिश्ते को लेकर नया मोड़ कैसे आ गया?
हालांकि, वायरल वीडियो में दोनों ने जिस तरह एक-दूसरे को जीवनसाथी मानने की बात कही है, उसे कानूनी रूप से संपन्न विवाह नहीं माना जा सकता. खुद महिला पुलिसकर्मी ने भी वीडियो में कानूनी अड़चनों का जिक्र किया है. पूरे मामले में कथित वीडियो की वास्तविकता और विवाह की कानूनी स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है.
निलंबन के बाद सामने आया मंदिर वाला वीडियो
23 अक्टूबर 2026 को सामने आए करीब 32 सेकेंड के वीडियो में निलंबित निरीक्षक नीरज तोमर एक महिला पुलिसकर्मी के साथ नजर आते हैं. वीडियो में महिला कहती है कि दोनों ने मंदिर में मानसिक रूप से एक-दूसरे को जीवनसाथी स्वीकार कर लिया है. वह यह भी बताती है कि कुछ कानूनी अड़चनों के कारण अभी औपचारिक रूप से विवाह नहीं हुआ है और आगे कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी.
वीडियो में दोनों लोगों से अपने निजी रिश्ते में अनावश्यक दखल नहीं देने की अपील भी करते हैं. इसके सामने आने के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है. हालांकि, केवल इस वीडियो के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि दोनों का कानूनी विवाह हो चुका है.
आखिर किस मामले में निलंबित हुए थे इंस्पेक्टर नीरज तोमर?
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत बढ़ापुर थाने के आधिकारिक WhatsApp ग्रुप में कथित आपत्तिजनक वीडियो साझा किए जाने के मामले से हुई थी. आरोप लगा कि तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक ने ग्रुप में करीब एक मिनट 13 सेकेंड का वीडियो भेजा था, जिसे बाद में हटा दिया गया. मामला अधिकारियों तक पहुंचने के बाद बिजनौर के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने जांच के निर्देश दिए. संबंधित पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए गए और जांच रिपोर्ट के आधार पर निरीक्षक के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई. इसके बाद बढ़ापुर थाने की जिम्मेदारी दरोगा धर्मेंद्र कुमार को सौंपे जाने की खबर सामने आई.
महिला कांस्टेबल ने वीडियो को बताया फर्जी
मामले में नया मोड़ तब आया, जब महिला पुलिसकर्मी ने कथित आपत्तिजनक वीडियो को फर्जी बताते हुए अपनी छवि खराब करने की साजिश का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग उन्हें परेशान कर रहे हैं और वायरल सामग्री के जरिए उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है. महिला के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. इसलिए कथित वीडियो की वास्तविकता, उसे किसने साझा किया और उसके पीछे क्या परिस्थितियां थीं, इन सभी पहलुओं पर जांच के निष्कर्ष अहम होंगे. महिला का आरोप सामने आने के बाद मामले के दोनों पक्षों की जांच और भी महत्वपूर्ण हो गई है.
क्या दोनों ने सच में शादी कर ली है?
सोशल मीडिया पर दोनों के मंदिर में शादी करने की चर्चा है, लेकिन सामने आए वीडियो में महिला खुद कहती है कि कानूनी अड़चनों के चलते अभी औपचारिक विवाह नहीं हुआ है. ऐसे में दोनों के एक-दूसरे को जीवनसाथी स्वीकार करने के बयान और कानूनी विवाह के बीच अंतर समझना जरूरी है. फिलहाल, विवाह की कानूनी स्थिति साफ करने वाली कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. दोनों के पहले से विवाहित होने या पुलिस सेवा के नियमों के उल्लंघन से जुड़े दावों की भी आधिकारिक पुष्टि जरूरी है. केवल वायरल वीडियो के आधार पर इन दावों को सच नहीं माना जा सकता.
निलंबन से लेकर नए वीडियो तक, अब किन सवालों के जवाब बाकी?
नीरज तोमर और महिला कांस्टेबल से जुड़ा मामला अब कई सवाल खड़े कर रहा है. पहला, थाने के आधिकारिक WhatsApp ग्रुप में कथित आपत्तिजनक वीडियो साझा किए जाने की घटना में जांच का अंतिम निष्कर्ष क्या होगा? दूसरा, महिला द्वारा वीडियो को फर्जी बताने के आरोपों की पुष्टि कैसे होगी? तीसरा, मंदिर में एक-दूसरे को जीवनसाथी स्वीकार करने के बावजूद कानूनी विवाह में बताई गई अड़चनें क्या हैं?
इन सवालों के जवाब संबंधित जांच और आधिकारिक बयानों से ही स्पष्ट होंगे. फिलहाल, निलंबन के बाद दोनों का नया वीडियो सामने आने से मामला फिर सुर्खियों में है. सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं और पुष्ट तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि वायरल वीडियो अपने आप में सभी आरोपों या दावों का प्रमाण नहीं है.