Alankar Agnihotri के साथ 48 घंटे में क्या-क्या हुआ? इस्तीफे से हाउस अरेस्ट दावे तक की पूरी टाइमलाइन
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के बाद 48 घंटे में क्या हुआ? निलंबन, प्रदर्शन, पुलिस घेरा और हाउस अरेस्ट दावे की पूरी टाइमलाइन.;
उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट रहे पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा महज एक प्रशासनिक फैसला नहीं रहा, बल्कि देखते ही देखते यह राजनीतिक, वैचारिक और संवैधानिक बहस का केंद्र बन गया. यूजीसी के नए नियमों और प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ कथित दुर्व्यवहार को कारण बताते हुए दिया गया इस्तीफा सोशल मीडिया पर सामने आते ही प्रशासन में हलचल मच गई.
इस्तीफे के कुछ ही घंटों बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए अलंकार अग्निहोत्री को निलंबित कर दिया और विभागीय जांच के आदेश दे दिए. दूसरी ओर, खुद अलंकार ने दावा किया कि उन्हें हाउस अरेस्ट किया गया है, सरकारी सुरक्षा और सुविधाएं वापस ले ली गई हैं और वे प्रशासनिक दबाव में हैं. इसके बाद जो हुआ, वह अगले दो दिनों तक बरेली को प्रशासनिक छावनी में बदल देने वाला घटनाक्रम था.
पहला दिन: इस्तीफे से शुरू हुआ भूचाल
सोमवार दोपहर करीब 1:30 बजे अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा पत्र और फोटो सोशल मीडिया पर सामने आया. कुछ ही देर में उनके सरकारी आवास पर समर्थकों और पत्रकारों की भीड़ जुटने लगी. शाम तक वे लगातार मीडिया से बात करते रहे और अपने फैसले को वैचारिक बताया. इस दौरान कई अधिकारी उनसे मिलने पहुंचे और उन्हें निर्णय पर पुनर्विचार के लिए मनाने की कोशिश की गई.
शाम का घटनाक्रम: प्रशासन और राजनीति की एंट्री
शाम 6 बजे के बाद घटनाक्रम ने राजनीतिक रंग लेना शुरू किया. साथी पीसीएस अधिकारी, फिर समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधि पहुंचे और नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से उनकी फोन पर बात कराई गई. इसके बाद अलंकार डीएम आवास के लिए रवाना हुए. वहां डीएम, एडीएम प्रशासन और एसएसपी सहित वरिष्ठ अधिकारियों से उनकी मुलाकात हुई, जो करीब रात 8 बजे तक चली.
रात का मोड़: बंधक बनाए जाने का आरोप
डीएम आवास से लौटने के बाद अलंकार ने अपने सरकारी आवास पर प्रेस वार्ता की और रात करीब 10 बजे मीडिया से बात करते हुए खुद को “बंधक” बनाए जाने का आरोप लगाया. कुछ देर बाद वे समर्थकों के साथ घर से बाहर निकले और निजी वाहन से निकल गए. देर रात करीब 3 बजे वे वापस लौटे और वहीं रात्रि विश्राम किया, लेकिन तब तक मामला राज्य स्तर पर पहुंच चुका था.
दूसरा दिन: सड़क से कलेक्ट्रेट तक प्रदर्शन
मंगलवार सुबह करीब 11 बजे अलंकार अग्निहोत्री पैदल ही कलेक्ट्रेट के लिए निकल पड़े. कलेक्ट्रेट गेट के पास उन्होंने जमीन पर बैठकर धरना दिया और फिर डीएम चेंबर के सामने नारेबाजी शुरू हुई. डीएम के मौके पर न होने के कारण दोपहर में वे वापस लौटे, लेकिन कुछ ही घंटों बाद समर्थकों के साथ दोबारा कलेक्ट्रेट पहुंचे और देर शाम तक प्रदर्शन चलता रहा.
शाम होते-होते बढ़ा पुलिस घेरा
मंगलवार शाम करीब 5 बजे अलंकार के आवास पर पुलिस तैनाती बढ़ा दी गई. समर्थकों को बाहर निकाल दिया गया और धीरे-धीरे एडीएम कंपाउंड छावनी में तब्दील हो गया. शाम 7:30 बजे तक भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया. इसी दौरान अलंकार की सरकारी गाड़ी और गनर वापस ले लिए गए, जिससे विवाद और गहरा गया.
हाउस अरेस्ट का दावा
शाम 7:48 बजे अलंकार अग्निहोत्री ने व्हाट्सएप स्टेटस के जरिए दावा किया कि वे हाउस अरेस्ट हैं और मोबाइल जैमर लगाए गए हैं. उन्होंने संपर्क न होने की स्थिति में हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की बात कही. इसी बीच शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से उनकी फोन पर बातचीत भी हुई, जिसमें शंकराचार्य ने पूरे घटनाक्रम पर दुख जताया.
कठघरे में नौकरशाही
कानपुर देहात के मूल निवासी, बीटेक और एलएलबी डिग्रीधारी पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री का यह मामला अब सिर्फ एक इस्तीफे तक सीमित नहीं रहा. 48 घंटे के भीतर यह प्रशासनिक कार्रवाई, राजनीतिक प्रतिक्रिया और संवैधानिक सवालों का ऐसा संगम बन गया है, जिसने उत्तर प्रदेश की नौकरशाही को कठघरे में खड़ा कर दिया है. आने वाले दिनों में यह विवाद और किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हैं.