नोएडा में सैलरी बढ़ाने की मांग पर फेज-2 में फैक्टरी के कारीगरों का हंगामा, सड़क जाम, DM ने की कारखाना मालिकों संग बैठक
नोएडा के फेज-2 में फैक्ट्री कारीगरों ने वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्य सड़क जाम कर दी, जिससे ट्रैफिक प्रभावित हुआ. प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद हालात काबू में आए और डीएम ने फैक्ट्री मालिकों के साथ बैठक कर मजदूरों को वेतन व सुविधाओं को लेकर आश्वासन दिया.
नोएडा के औद्योगिक इलाके में मजदूरों का गुस्सा अब खुलकर सड़कों पर दिखाई दे रहा है. फेज-2 क्षेत्र में लगातार तीसरे दिन हजारों कारीगर वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन करते नजर आए. हालात ऐसे बने कि मजदूरों ने मुख्य सड़क जाम कर दी, जिससे ट्रैफिक पूरी तरह प्रभावित हुआ और प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप करना पड़ा.
बढ़ती महंगाई, किराए का दबाव और रोजमर्रा के खर्चों ने मजदूरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. इसी को लेकर वे अब खुलकर विरोध जता रहे हैं. प्रशासन ने स्थिति संभालने के लिए पुलिस बल के साथ-साथ उच्च अधिकारियों को भी मौके पर भेजा और देर शाम जिला अधिकारी ने फैक्ट्री मालिकों के साथ अहम बैठक कर समाधान निकालने की कोशिश की.
फेज-2 में मजदूरों का प्रदर्शन क्यों भड़का?
नोएडा के फेज-2 स्थित होजरी कॉम्प्लेक्स में काम करने वाले मजदूर अचानक सड़कों पर उतर आए. NSEZ से सूरजपुर जाने वाले मुख्य मार्ग को जाम कर दिया गया. हजारों की संख्या में मजदूरों ने एकजुट होकर वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया.
प्रशासन ने हालात कैसे संभाले?
प्रदर्शन की सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया. हालात बिगड़ते देख RRF टीम को भी तैनात किया गया. पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, साथ ही लेबर कमिश्नर मौके पर पहुंचे और मजदूरों को शांत करने की कोशिश की. काफी मशक्कत के बाद जाम खुलवाया गया और स्थिति को नियंत्रण में लाया गया.
मजदूरों की मुख्य मांगें क्या हैं?
मजदूरों का कहना है कि मौजूदा वेतन में परिवार चलाना बेहद मुश्किल हो गया है. उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच उनका गुजारा करना मुश्किल हो गया है.' मजदूरों ने हरियाणा के मॉडल की तर्ज पर न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग रखी है. उनकी मांग इस प्रकार है:
- अकुशल श्रमिक: ₹15,220
- अर्धकुशल श्रमिक: ₹16,781
- कुशल श्रमिक: ₹18,501
- उच्च कुशल श्रमिक: ₹19,426
महंगाई ने मजदूरों पर कितना दबाव बढ़ाया?
मजदूरों के मुताबिक, कमरे का किराया लगातार बढ़ रहा है. इसके अलावा गैस सिलेंडर और अन्य जरूरी चीजें भी महंगी हो चुकी हैं. ऐसे में वर्तमान सैलरी में घर चलाना मुश्किल हो गया है, जिससे आक्रोश बढ़ता जा रहा है.
डीएम की बैठक में क्या फैसला हुआ?
देर शाम जिला अधिकारी मेधा रूपम ने फैक्ट्री मालिकों के साथ बैठक की. इस दौरान साफ निर्देश दिए गए कि किसी भी मजदूर की नौकरी नहीं जाएगी. सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन तुरंत लागू किया जाए. सभी नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए. फैक्ट्री मालिक इन निर्देशों पर सहमत हो गए और उन्होंने फैक्ट्री के बाहर नोटिस लगाकर मजदूरों को जानकारी देने का भी फैसला लिया.
श्रम विभाग ने क्या कहा?
अपर श्रमायुक्त राकेश द्विवेदी ने बताया कि प्रशासन ने कंपनियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं. उन्होंने कहा कि 'श्रमिकों के हित में कंपनी प्रबंधन एवं श्रमिकों के बीच हुए समझौते के सभी प्रावधान अब जनपद की प्रत्येक कंपनी में प्रभावी रूप से लागू होंगे.' इसके तहत मजदूरों को ये सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी-
- डबल ओवरटाइम
- साप्ताहिक अवकाश
- बोनस
साथ ही श्रमिकों से अपील की गई है कि वे शांति बनाए रखें और अफवाहों से दूर रहें.