डिलीवरी एजेंट बनकर आया लुटेरा, 54 साल की महिला ने दिखाई बहादुरी, चाकू और पिस्तौल लेकर घुसे बदमाश को अकेले खदेड़ा
पंजाब के मोहाली 54 साल एक महिला ने हिम्मत दिखाते हुए हथियारबंद हमलावर का डटकर सामना किया. जहां बदमाशों ने महिला पर चाकू से कई वार किए. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी.
मोहाली में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई, जहां डिलीवरी एजेंट बनकर घर में घुसे एक बदमाश का सामना 54 साल की महिला ने अकेले किया. जैसे ही आरोपी ने चाकू और पिस्तौल जैसा हथियार निकालकर डराने की कोशिश की, महिला ने घबराने के बजाय बहादुरी दिखाते हुए तुरंत उसे पकड़ लिया. इस दौरान दोनों के बीच जमकर हाथापाई हुई, लेकिन महिला पीछे नहीं हटी.
जान जोखिम में डालकर महिला ने न सिर्फ खुद को बचाया, बल्कि अपने परिवार की भी रक्षा की. उसकी हिम्मत के आगे बदमाश घबरा गया और मौके से भाग खड़ा हुआ.
डिलीवरी एजेंट बनकर घर में घुसा आरोपी
मंगलवार को यह आरोपी पार्सल देने के बहाने घर पहुंचा. महिला के सात साल के पोते ने दरवाजा खोला, जिसके बाद वह आसानी से घर के अंदर दाखिल हो गया. जैसे ही वह अंदर आया, उसने एक हाथ में पिस्तौल जैसा हथियार और दूसरे हाथ में चाकू निकाल लिया. महिला, जिनकी पहचान सुषमा शर्मा के रूप में हुई है, उस वक्त घर पर मौजूद थीं. अचानक सामने आए इस खतरे को देखकर उन्होंने घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करने का फैसला किया.
जान की परवाह किए बिना किया मुकाबला
सुषमा शर्मा ने बिना समय गंवाए हमलावर को पकड़ लिया. उन्होंने एक हाथ से उसके हथियार वाले हाथ को थाम लिया और दूसरे हाथ से उसकी गर्दन पकड़ ली. इस दौरान दोनों के बीच जोरदार हाथापाई हुई. हमलावर ने खुद को छुड़ाने के लिए उन पर चाकू से हमला किया, जिसमें सुषमा को तीन बार चोटें आईं. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार उसका सामना करती रहीं. वह जोर-जोर से मदद के लिए चिल्लाती भी रहीं.
हमलावर मौके से फरार
महिला की बहादुरी और जोरदार प्रतिरोध से हमलावर घबरा गया. वह किसी तरह खुद को छुड़ाकर वहां से भाग निकला. भागते समय वह अपना मोबाइल फोन और हेलमेट वहीं छोड़ गया, जो बाद में पुलिस के लिए अहम सुराग साबित हुआ. इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने आरोपी को गुरुवार को पकड़ लिया. फिलहाल मामले की जांच जारी है.
परिवार की सुरक्षा बनी प्राथमिकता
सुषमा शर्मा ने बताया कि उस समय उनके साथ उनकी बहू और छोटा पोता भी घर में मौजूद थे. ऐसे में उनके लिए पीछे हटना संभव नहीं था. उन्होंने अपने परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता दी और पूरी ताकत से हमलावर का सामना किया. मोहाली की यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि मुश्किल हालात में हिम्मत और सूझबूझ सबसे बड़ा हथियार होती है. सुषमा शर्मा की बहादुरी न सिर्फ प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी दिखाती है कि खतरे के समय साहस दिखाकर बड़ी घटनाओं को टाला जा सकता है.