LPG Booking से पकड़ा गया ‘हत्यारा फौजी’! नाम बदला, दूसरी शादी की; लेकिन इस गलती के चक्कर पहुंचा सलाखों के पीछे

LPG बुकिंग और PAN कार्ड की एक गलती ने 4 साल से फरार आर्मी के पूर्व कैप्टन को पकड़वा दिया. जानें कैसे पुलिस ने डिजिटल ट्रैकिंग से किया गिरफ्तार.

( Image Source:  @HateDetectors-X )

करीब चार साल से फरार चल रहे सेना के पूर्व कैप्टन संदीप तोमर को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. पत्नी की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पाने के बाद वह कानून से बचने के लिए अलग-अलग राज्यों में पहचान बदलकर रह रहा था, लेकिन एक छोटी सी डिजिटल गलती ने उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया.

यह गिरफ्तारी सिर्फ एक अपराधी को पकड़ने की कहानी नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि आज के डिजिटल दौर में कोई भी अपराधी ज्यादा समय तक छिप नहीं सकता. नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (NATGRID) और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई ने इस हाई-प्रोफाइल केस का अंत कर दिया.

संदीप तोमर कौन है क्या था आरोप?

संदीप तोमर भारतीय सेना का पूर्व कैप्टन रह चुका है, जिसे अपनी पत्नी श्वेता सिंह की हत्या के आरोप में दोषी ठहराया गया था. यह घटना साल 2013 में पंजाब के अबोहर कैंट में हुई थी, शादी के महज पांच महीने बाद ही श्वेता की संदिग्ध मौत हो गई थी. शुरुआत में तोमर ने इसे आत्महत्या बताया, लेकिन फॉरेंसिक जांच में खुलासा हुआ कि गला घोंटकर हत्या की गई थी. इसके बाद 2014 में कोर्ट ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई और सेना से बर्खास्त कर दिया गया.

जमानत के बाद कैसे फरार हो गया आरोपी?

करीब पांच साल जेल में रहने के बाद 2019 में उसे पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी, क्योंकि उसकी अपील लंबित थी. लेकिन सितंबर 2022 में जब हाईकोर्ट ने उसकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा, तो उसे सरेंडर करना था. इसके बजाय वह फरार हो गया और करीब चार साल तक पुलिस से बचता रहा.

फरारी के दौरान कहां-कहां छिपा रहा?

फरार रहने के दौरान संदीप तोमर ने अपनी पहचान बदल ली और अलग-अलग शहरों में रहा.

पहले वह जीरकपुर में रियल एस्टेट एजेंट बना. फिर ओडिशा और बेंगलुरु में ठिकाना बदला आखिर में मध्य प्रदेश के पांढुर्णा में एक जूस फैक्ट्री में मैनेजर बनकर रहने लगा. इतना ही नहीं, फरारी के दौरान उसने दूसरी शादी भी कर ली थी.

आखिर पुलिस ने उसे कैसे पकड़ा?

संदीप तोमर की गिरफ्तारी एक सुनियोजित और हाई-टेक ऑपरेशन का नतीजा है. पुलिस और NATGRID ने उसके डिजिटल फुटप्रिंट्स को ट्रैक किया. वह नकली नाम से रह रहा था, लेकिन उसने अपनी असली PAN कार्ड का इस्तेमाल कर एक बैंक अकाउंट खुलवाया.

यहीं से उसकी गलती शुरू हुई-

उसी अकाउंट में सैलरी आ रही थी. उसी से उसने LPG गैस सिलेंडर बुक किया. जैसे ही PAN का इस्तेमाल हुआ, सिस्टम में अलर्ट ट्रिगर हो गया. पुलिस ने बैंक ट्रांजैक्शन ट्रैक किए और गैस एजेंसी से एड्रेस निकाला. मोबाइल टावर लोकेशन से कन्फर्म होने के बाद पांढुर्णा में उसका ठिकाना पता चल गया.

गिरफ्तारी कैसे हुई और अब आगे क्या?

लोकेशन कन्फर्म होने के बाद फाजिल्का पुलिस ने मध्य प्रदेश पुलिस के साथ मिलकर छापेमारी की और आरोपी को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर पंजाब लाया गया और 28 मार्च 2026 को अबोहर में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

क्यों अहम है यह गिरफ्तारी?

यह मामला इसलिए भी चर्चा में था क्योंकि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अप्रैल 2026 तक इस केस पर अपडेट मांगा था. ऐसे में पुलिस के लिए आरोपी को पकड़ना बड़ी चुनौती बन गया था. यह गिरफ्तारी इस बात का सबूत है कि कानून से भागना आसान नहीं है. खासतौर पर तब, जब डिजिटल दुनिया हर कदम पर नजर रख रही हो.

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