कौन हैं AAP विधायक सुखवीर सिंह मैसरखाना? स्कूलों में शिक्षकों की कमी बताई, तो अपनी ही सरकार के निशाने पर कैसे आ गए?
मौर से AAP विधायक सुखवीर सिंह मैसरखाना ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया. वीडियो के बाद पार्टी ने उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में सस्पेंड किया.
पंजाब में आम आदमी पार्टी की ‘शिक्षा क्रांति’ पर सवाल विपक्ष नहीं, अब उसकी अपनी पार्टी का विधायक उठा रहा है. मौर से AAP विधायक सुखवीर सिंह मैसरखाना ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वह सरकार और पार्टी नेतृत्व से शिकायत करके थक चुके हैं. उनके अपने बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं, इसलिए उन्होंने इस सवाल को बच्चों की पढ़ाई से भी जोड़ा. लेकिन उनके करीब 14 मिनट के वीडियो के कुछ ही घंटों बाद पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया.
चौंकाने वाली बात यह है कि AAP ने शिक्षक कमी की शिकायत को कार्रवाई की वजह नहीं बताया, बल्कि पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता का आरोप लगाया. अब सवाल है कि स्कूलों की समस्या पर जवाब देने के बजाय विवाद पार्टी अनुशासन तक कैसे पहुंच गया?
1. कौन हैं सुखवीर सिंह मैसरखाना, जिनके बयान से मचा विवाद?
सुखवीर सिंह मैसरखाना बठिंडा जिले की मौर विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के विधायक हैं. 20 नवंबर 1987 को मैसरखाना गांव में जन्मे मैसरखाना का पेशा खेती है और उन्होंने 12वीं तक पढ़ाई की है. 2022 के विधानसभा चुनाव में वह पहली बार विधायक बने. उनकी पहचान इस विवाद में इसलिए भी अहम है क्योंकि उनके दोनों बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं. यानी शिक्षा व्यवस्था पर उनका सवाल किसी विपक्षी नेता के आरोप तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अपने परिवार के अनुभव का भी हवाला दे रहे हैं.
उनकी शिकायत ने आम आदमी पार्टी सरकार के शिक्षा सुधार के दावों पर बहस जरूर तेज कर दी है. विधानसभा चुनाव से पहले मैसरखाना के बयान को कांग्रेस, बीजेपी और अकाली दल चुनाव मुद्दा भी बना सकती है.
2. सरकारी स्कूलों में ऐसा क्या मिला कि विधायक को लाइव आना पड़ा?
मैसरखाना ने करीब 14 मिनट के लाइव वीडियो में अपने क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया. उन्होंने दावा किया कि वह पहले भी मुख्यमंत्री भगवंत मान, मनीष सिसोदिया और पार्टी नेतृत्व के सामने यह समस्या रख चुके हैं. उन्होंने अपने बच्चे के पढ़ने वाले School of Eminence का भी जिक्र किया. उनका सवाल था कि जब स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक ही नहीं होंगे, तो बच्चों की पढ़ाई कैसे बेहतर होगी?
इस बयान का सीधा संबंध AAP सरकार के उस शिक्षा मॉडल से है, जिसे पार्टी अपनी प्रमुख उपलब्धियों में गिनाती है. अगर विधायक की शिकायत सही है, तो सवाल केवल खाली पदों का नहीं, बल्कि सरकार के दावों और स्कूलों की वास्तविक जरूरतों के बीच अंतर का भी है.
3. अपनी ही सरकार को घेरते हुए मैसरखाना ने क्या कहा?
आप विधायक मैसरखाना ने कहा कि वह शिक्षकों की नियुक्ति की मांग करते-करते थक चुके हैं. उन्होंने यहां तक कहा कि टिकट काटना है तो काट दें, लेकिन बच्चों की शिक्षा का मुद्दा उठाना बंद नहीं करेंगे. उनके बयान का राजनीतिक महत्व इस बात में है कि उन्होंने पद और टिकट की चिंता से ऊपर बच्चों की पढ़ाई को रखने की बात कही. उनके मुताबिक समस्या पहले पार्टी के भीतर उठाई गई थी, लेकिन समाधान नहीं मिलने पर उन्हें सार्वजनिक रूप से बोलना पड़ा.
विधायक मैसरखाना का दावा है; पार्टी के भीतर शिकायतों पर क्या बातचीत हुई और सरकार ने क्या कदम उठाए, इसका पूरा विवरण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है. फिर भी इस बयान ने AAP के सामने असहज स्थिति पैदा कर दी, क्योंकि सरकार की शिक्षा नीति पर सवाल किसी विरोधी दल ने नहीं, बल्कि उसके अपने विधायक ने उठाया.
4. AAP ने शिक्षक कमी के दावे पर क्या जवाब दिया?
पंजाब सरकार और AAP ने मैसरखाना के दावों पर आपत्ति जताई. शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के मुताबिक, मौर क्षेत्र में 90 फीसदी से अधिक शिक्षक पद भरे हुए हैं. संबंधित School of Eminence में 30 स्वीकृत पदों में से 25 पर शिक्षक तैनात हैं और वहां करीब 580 विद्यार्थी पढ़ते हैं. यानी पांच पद खाली हैं. सरकार का पक्ष है कि खाली पदों को भरने की प्रक्रिया चल रही है, जबकि मैसरखाना इसे बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी गंभीर समस्या बता रहे हैं. अब असली सवाल यह है कि इन रिक्तियों का पढ़ाई पर कितना असर पड़ रहा है और उन्हें भरने में कितना समय लगेगा.
5. शिक्षा पर सवाल के बीच पार्टी से बाहर करने की नौबत क्यों आई?
AAP ने मैसरखाना को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित करते हुए ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ और अनुशासनहीनता का हवाला दिया. पार्टी ने आरोप लगाया कि उन्होंने गलत या भ्रामक बातें फैलाकर उसकी छवि खराब की. इस तरह कार्रवाई का आधिकारिक आधार पार्टी अनुशासन बताया गया, जबकि विवाद की शुरुआत सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को लेकर उनके वीडियो से हुई थी.
यही घटनाक्रम सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल खड़ा करता है. AAP सरकार शिक्षा सुधार को अपनी उपलब्धि बताती है, लेकिन उसी सरकार का विधायक जब स्कूलों की व्यवस्था पर सार्वजनिक सवाल उठाता है, तो मामला शिकायत के समाधान से आगे बढ़कर पार्टी की कार्रवाई तक पहुंच जाता है.
अब सरकार के सामने दो सवाल हैं- स्कूलों में खाली पद कब भरे जाएंगे और क्या अपनी ही पार्टी के विधायक की शिकायत का जवाब तथ्यों से देने के बजाय अनुशासनात्मक कार्रवाई करना उचित राजनीतिक संदेश देता है?