उज्जैन में नगर निगम 15 मीटर चौड़ी सड़क बनाने की योजना पर काम कर रहा है, जिसके दायरे में अब शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा भी आ रहा है. जिसको हटाने की तैयारी भी चल रही है लेकिन मुस्लिम समुदाय ने इसको लेकर आपत्ति दर्ज कराई है और उनमें इसको लेकर काफी आक्रोश भी देखने को मिल रहा है. हालांकि मामले को लेकर अब कानूनी लड़ाई भी चल रही है.

दूसरी तरफ मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग मस्जिद में जमा हुए और रातभर पहरा दिया. वहीं प्रशासन ने मस्जिद के आसपास के सुरक्षाबलों की कई कंपनियां तैनात की है और मस्जिद समिति को भी मनाने का प्रयास किया. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहले ही इस कार्रवाई को चुनौती देने वाली दो याचिकाएं खारिज कर चुका है.

आखिर क्या है पूरा विवाद?

उज्जैन में 2028 के सिंहस्थ पर्व से पहले सड़कों को चौड़ा करने की तैयारी चल रही है. इसी योजना के तहत उज्जैन नगर निगम एक सड़क को 15 मीटर चौड़ा करने की प्रक्रिया में है. प्रस्तावित सड़क के दायरे में शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा भी आ रहा है. मस्जिद वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकृत है. मस्जिद मैनेजमेंट और समुदाय के कुछ सदस्यों ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि सड़क चौड़ीकरण के लिए मस्जिद के बजाय सामने मौजूद इमारत को हटाने का विकल्प अपनाया जा सकता है.

मस्जिद के किन हिस्सों पर पड़ेगा असर?

मस्जिद समिति के मुताबिक, अगर मस्जिद पर कार्रवाई हुई तो प्रार्थना कक्ष का एक हिस्सा, करीब 120 फुट ऊंची मीनार और मजहर चौक शाही प्रभावित हो सकते हैं. मस्जिद के इमाम मोहम्मद इब्राहिम ने कहा "यह एक धार्मिक नगर है. किसी भी धार्मिक स्थल को ध्वस्त नहीं किया जाना चाहिए. चौड़ीकरण की प्रक्रिया में धार्मिक स्थलों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए." उन्होंने मस्जिद को 636 साल पुराना बताते हुए कहा कि इससे पहले हुए सड़क चौड़ीकरण के दौरान धार्मिक स्थलों को नुकसान नहीं पहुंचाया गया था.

हाईकोर्ट ने पहले क्या फैसला दिया था?

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 9 सितंबर को सड़क चौड़ीकरण के लिए शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने के नगर निगम के फैसले को चुनौती देने वाली दो याचिकाएं खारिज कर दी थीं. न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट ने माना कि नगर निगम ने जरूरी प्रक्रिया का पालन किया और संबंधित पक्षों को आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया. अदालत ने यह तर्क भी स्वीकार नहीं किया कि मस्जिद को केवल धार्मिक स्थल होने के कारण निशाना बनाया जा रहा है.

आदेश में बताया गया कि उसी सड़क पर 10 मंदिरों और एक मस्जिद के हिस्से पहले हटाए जा चुके हैं. इसके अलावा उज्जैन में करीब 80 धार्मिक स्थलों से जुड़े निर्माणों पर भी कार्रवाई की गई है. हाईकोर्ट के पहले फैसले के बाद भी विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. मस्जिद समिति ने उच्च पीठ के समक्ष याचिका दायर की है और मामले की सुनवाई सोमवार को होने की बात कही गई है.